सीएसआर के तहत टीकाकरण पर केंद्र अनिच्छुक

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 5:37 AM IST

केंद्र सरकार उद्योग जगत द्वारा अपने कर्मियों को टीका लगाने के खर्च का वर्गीकरण कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के तहत करने या फंड का इस्तेमाल टीकाकरण के लिए करने की अनुमति देने को लेकर अनिच्छुक है। बहरहाल अगर कंपनियां सीएसआर का व्यय व्यापक समुदाय के टीकाकरण के लिए करती हैं तो इस पर विचार हो सकता है।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘अगर वे केवल अपने कर्मचारियों को टीकाकरण की सुविधा देती हैं तो वे इसकी लागत को कर्मचारी लाभ के मद में डाल सकती हैं, लेकिन सीएसआर के मद में नहीं।’
उन्होंने आगे यह भी कहा कि अगर कंपनियां समुदाय के टीकाकरण की पहल करती हैं, जिनमें कर्मचारी और उनके परिवार शामिल हों या नहीं, इसकी लागत की गणना सीएसआर में की जा सकती है। बहरहाल इस पर कभी कोई अंतिम चर्चा नहीं हुई है।
जानकारी के मुताबिक कई फर्मों ने हाल में वित्त, कंपनी मामले और स्वास्थ्य मंत्रालयों से संपर्क साधा है और सीएसआर फंड का इस्तेमाल कर्मचारियों के टीकाकरण में करने के लिए अनुमति मांगी है।
कर्मचारियों के टीकाकरण के लिए सीएसआर से खर्च करने का मामला ऐसे समय आया है जब केंद्र सरकार ने राज्यों को अनुमति दी है कि वे विनिर्माताओं से सीधे टीका खरीद सकते हैं। भारत इस समय टीके की कमी का सामना कर रहा है, जबकि कोरोना के मामले रोजाना 3 लाख बढ़ रहे हैं।
सूत्रों ने कहा कि अब तक केंद्र सरकार अपने जनवरी के रुख पर कायम है, जब कंपनी मामलों के मंत्रालय ने अनुमति दी थी कि कोविड टीकाकरण अभियान के लिए जागरूकता के लिए खर्च किए गए थन को सीएसआर के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा। हालांकि इस अधिसूचना में टीकाकरण के खर्च को शामिल नहीं किया गया है।
कर दावे से संबंधित बारीकियों को लेकर एक और अधिकारी ने कहा कि अगर मंत्रालय इसकी मंजूरी दे भी देता है तो कर्मचारियों पर किए गए खर्च को कभी सीएसआर के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जा सकता है और ऐसे में वे कर लाभ का दावा नहीं कर सकते।
वहीं विशेषज्ञों की राय है कि इसकी अनुमति सीमित अवधि के लिए दी जा सकती है, जिससे टीकाकरण अभियान में मदद मिल सके।
कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स के संस्थापक पवन कुमार विजय ने कहा, ‘यह एक राष्ट्रीय आपदा है। ऐसे में मौजूदा ढांचे पर एक बार अलग तरीके से विचार किए जाने की जरूरत है। आज जब हम हर तरफ टीकाकरण कर रहे हैं, अगर कंपनियां कर्मचारियों को टीके उपलब्ध नहीं कराती हैं तो इसकी लागत का वहन या तो कर्मचारियों को या सरकार को करना होगा। ऐसी परिस्थिति को देखते हुए यह बेहतर होगा कि इसे सीएसआर के तहत लाया जाए। इससे न सिर्फ टीकाकरण तेज होगा बल्कि यह ज्यादा प्रभावी तरीके से हो सकेगा। अगर पूरी तरह नहीं तो सीमित अवधि के लिए इसकी अनुमति दी जा सकती है।’
इंस्टीट्यूशनल एडवाइजरी सर्विसेज इंडिया (आईआईएएस) के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक अमित टंडन ने कहा कि सरकार को गैर कर्मचारियों के भुगतान के लिए भी प्रोत्साहित करना चाहिए, लेकिन यह फायदेमंद होगा अगर कंपनियां सीएसआर के तहत अपने कर्मचारियों का टीकाकरण करती हैं। उन्होंने कहा, ‘यह सामाजिक अच्छाई है।’
महामारी के दस्तक देने के तत्काल बाद एमसीए ने सीएसआर नियमों में संशोधन कर कंपनियों को नए टीके, दवाओं व मेडिकल उपकरणों के शोध एवं विकास (आरऐंडडी) पर सीएसआर का धन खर्च करने की अनुमति दे दी थी, जिनका श्रेणीकरण कोविड संबंधी आरऐंडडी गतिविधियों के तहत किया गया है।
पहले के साल के खर्च के एक विश्लेषण से पता चलता है कि सीएसआर बजट से एक अहम हिस्से का टीकाकरण किया जा सकता है, अगर वे गैर कर्मचारियों का भी टीकाकरण कराती हैं।
भारत की कंपनियों ने 2019-20 के दौरान सीएसआर पर 17,885 करोड़ रुपये खर्च किए। विभिन्न वर्षों में किए गए सीएसआर खर्च में अंतर हो सकता है, लेकिन पिछले 5 साल में औसतन हर साल 15,858 करोड़ रुपये इस मद में खर्च किए गए हैं। बुधवार को सीरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया ने टीके की लागत बढ़ाकर 400 से 600 रुपये प्रति खुराक कर दी है।  सीएसआर का खर्च कंपनियों की अपनी स्थिति पर भी निर्भर है। वित्त वर्ष 19 के 18,655 करोड़ रुपये की तुलना में वित्त वर्ष 20 में सीएसआर खर्च 4.1 प्रतिशत गिरकर 18,000 करोड़ रुपये रह गया। वित्त वर्ष 20 में कॉर्पोरेट मुनाफा 9.5 प्रतिशत कम हुआ है।

First Published : April 21, 2021 | 11:43 PM IST