केंद्र सरकार ने आज एक बार फिर 40 किसान संगठनों को 30 दिसंबर को अगले दौर की बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। इसमें सभी ‘प्रासंगिक मसलों’ पर बातचीत होगी, जिससे चल रहा गतिरोध खत्म किया जा सके। उधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि अधिनियमों को आक्रामक समर्थन जारी रखते हुए कहा कि इन सुधारों से किसानों की जिंदगी बेहतर होगी। विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों की ओर से पिछले सप्ताह भेजे गए पत्र के जवाब में केंद्र सरकार ने आज कहा कि किसान प्रदर्शन कर रहे हैं और वह साफ इरादे और खुले मस्तिष्क से सभी प्रासंगिक मसलों का तार्किक समाधान निकालने को प्रतिबद्ध है। किसानों ने अपने पत्र में तीन कृषि अधिनियमों को रद्द किए जाने पर बातचीत करने की इच्छा जताई थी।
विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों के संगठन ने सरकार से प्रस्ताव किया था कि वे सितंबर में लाए गए तीन कृषि कानूनों को वापस लिए जाने, एमएसपी की कानूनी गारंटी दिए जाने और मसौदा विद्युत अधिनियम और एनसीआर प्रदूषण अध्यादेश पर ठोस कदम उठाए जाने को लेकर 29 दिसंबर, मंगलवार को बातचीत को इच्छुक हैं। अब यह बातचीत 30 दिसंबर को विज्ञान भवन में दोपहर 2 बजे होने की संभावना है। बातचीत बहाल करने के केंद्र की पेशकश को संज्ञान में लेते हुए कृषि सचिव संजय अग्रवाल ने कहा कि तीन कृषि कानूनों, एमएसपी पर खरीद व्यवस्था के साथ विद्युत संशोधन विधेयक और दिल्ली-एनसीआर के आसपास प्रदूषण रोकने के लिए लाए गए अध्यादेश पर विस्तार से बातचीत होगी। बहरहाल सरकार ने बाद में किसानों की 3 कृषि विधेयकों को वापस लिए जाने की प्रमुख मांग की शर्त को लेकर कुछ विशेष नहीं कहा। विरोध प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे संगठनों में से एक आल इंडिया किसान संघर्ष कोऑर्डिनेशन कमेटी ने कहा, ‘सरकार के पत्र से संकेत मिलता है कि वह शब्दों के साथ चालाकी कर रहीहै और वह किसान संगठनों की ओर से प्रस्तावित एजेंडे पर बातचीत को इच्छुक नहीं है। यह सरकार के दोहरे चरित्र को उजागर करता है।’
विरोध प्रदर्शन कर रहे 40 किसान संगठनों और केंद्र के बीच 5 दौर की औपचारिक बातचीत का कोई निष्कर्ष नहीं निकला है। आखिरी वार्ता 5 दिसंबर को हुई थी, जबकि छठे दौर की वार्ता 9 दिसंबर को गृह मंत्री अमित शाह के साथ होनी थी, लेकिन कुछ यूनियनों के नेता सहमति नहीं बना सके। सरकार द्वारा अगले दौर की वार्ता की दी गई तिथि को ही किसान संगठनों ने सिंघु सीमा और टिकरी सीमा से कुंडली मानेसर पलवल (केएमपी) राजमार्ग पर ट्रैक्टर मार्च का फैसला किया है। करीब एक महीने से पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों के किसान दिल्ली सीमा पर डेरा डाले हुए हैं और वे 3 कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने धमकी दी है कि अगर मांगें नहीं मानी गई तो वे आने वाले दिनों में अपना आंदोलन और तेज कर देंगे।
बहरहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 100वीं कृषि रेल को हरी झंडी दिखाते हुए कृषि कानूनों को ऐतिहासिक सुधार बताया, जिससे कृषि क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की स्थिति मजबूत होगी। उन्होंने कानून को पूरा समर्थन जारी रखा है। मोदी ने कहा कि सरकार की नीतियां स्पष्ट हैं और कृषि क्षेत्र में सुधार को लेकर उसका मन साफ है। उन्होंने कहा कि सरकार कृषि क्षेत्र और किसानों को सशक्त बनाने के लिए पूरी ताकत और समर्पण के साथ काम जारी रखेगी। कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने आज कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अगले दौर की बातचीत में कुछ समाधान निकल आएगा।