बीमा धोखाधड़ी की जांच के लिए एजेंसी

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 3:42 PM IST

भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) बीमा धोखाधड़ी की जांच के लिए एक स्वतंत्र जांच एजेंसी स्थापित करने की सिफारिश पर विचार कर रहा है। सिफारिश में कहा गया है कि बीमा धोखाधड़ी की जांच के लिए गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) की तरह एक स्वतंत्र एजेंसी बनाई जाए। एसएफआईओ कंपनी मामलों के मंत्रालय के अंतर्गत स्थापित एजेंसी है, जो कॉरपोरेट धोखाधड़ी की जांच करती है।

एजेंसी बनाने का सुझाव बीमा नियामक एवं बीमा परिषदों द्वारा गठित एक कार्य समूह ने दिया है। इसमें उद्योग और बीमा नियामक दोनों के प्रतिनिधि हैं। प्रस्तावित एजेंसी को बीमा धोखाधड़ी जांच एजेंसी कहा गया है और बीमा अधिनियम 1938 में संशोधन के जरिये इसे स्थापित करने की सिफारिश पर विचार किया जा रहा है। एजेंसी को आईआरडीएआई के मातहत ही रखने का प्रस्ताव है। एक अधिकारी ने बताया कि आईआरडीएआई को सिफारिश मिल गई है और उस पर विचार चल रहा है। बीमा धोखाधड़ी की जांच के लिए स्वतंत्र एजेंसी बनाए जाने से देश में बीमा फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी पर काबू करने में मदद मिलेगी। दुनिया के कई देशों में बीमा धोखाधड़ी रोकथाम एजेंसियां पहले से काम कर रही हैं। अमेरिका में नैशनल इंश्योरेंस क्राइम ब्यूरो, कनाडा में कैनेडियन नैशनल इंश्योरेंस क्राइम सर्विसेज, ब्रिटेन में इंश्योरेंस फ्रॉड ब्यूरो एवं इंश्योरेंस फ्रॉड एन्फोर्समेंट डिपार्टमेंट आदि इसी तरह की एजेंसियां हैं।

प्रस्तावित एजेंसी बीमा धोखाधड़ी पर नजर रखने में मदद कर सकती है। इससे बीमा कंपनियों के घाटे को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। अनुमान है कि धोखाधड़ी के कारण बीमा कंपनियों को सालाना 45,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होता है। फिलहाल कुछ राज्यों में वाहन बीमा में धोखाधड़ी जांचने के लिए विशेष जांच इकाइयां हैं, लेकिन बीमा धोखाधड़ी की जांच के लिए देश में स्वतंत्र एजेंसी अथवा एकसमान कानून या नियम नहीं हैं।

कार्य समूह ने सुझाव दिया है कि कंपनी मामलों में धोखाधड़ी की जांच एवं रोकथाम के लिए जिस तरह ब्रिटेन के सीरियस फ्रॉड ऑफिस की तर्ज पर 2015 में एसएफआईओ की स्थापना की गई थी, उसी तरह बीमा क्षेत्र में फर्जीवाड़े एवं धोखाधड़ी की जांच, रोकथाम एवं अपराधी को दंडित करने के लिए बीमा धोखाधड़ी जांच एजेंसी स्थापित करने की आवश्यकता है। बताया गया है कि प्रस्तावित स्वतंत्र जांच एजेंसी बीमा धोखाधड़ी करने वालों का डेटाबेस तैयार करेगी और मामलों की जांच करते हुए अपराधियों को न्यायिक ढांचे के तहत लाएगी। कार्य समूह ने यह भी सुझाव दिया है कि बीमा नियामक ‘बीमा धोखाधड़ी’ को परिभाषित करने पर भी विचार कर सकता है। इसके अलावा आईआरडीएआई धोखाधड़ी का पता लगाने, मामले की जांच करने और अपराधियों पर मुकदमा चलाने के लिए एक नियामकीय एवं वैधानिक ढांचा भी तैयार कर सकता है। 

First Published : September 11, 2022 | 9:59 PM IST