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रुपया-रूबल में व्यापार को मंजूरी!

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Last Updated- December 11, 2022 | 8:48 PM IST

केंद्र सरकार शुरुआती चरण में कृषि, फार्मा और ऊर्जा जैसे उन क्षेत्रों में भारत और रूस के बीच स्थानीय मुद्राओं में कारोबार की अनुमति दे सकती है, जहां अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा सामूहिक रूप से प्रतिबंध नहीं लगाए गए हैं। मामले के जानकार लोगों ने कहा कि रक्षा जैसे अन्य क्षेत्रों में इस तरह की व्यापार सुविधा के लिए काफी विचार-विमर्श की जरूरत होगी क्योंकि ऐसा होने से पश्चिमी देशों में संकेत जाएगा कि भारत प्रतिबंधों को नजरअंदाज कर रहा है। इन क्षेत्रों के कारोबार के लिए रणनीतिक निर्णय लेने की जरूरत होगी।
एक जानकार शख्स ने कहा, ‘अगर ऊर्जा, फार्मा और कृषि से इतर क्षेत्रों में स्थानीय मुद्रा से व्यापार की अनुमति देते हैं तो लगेगा कि हम प्रतिबंधों को नहीं मान रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि यह रणनीतिक निर्णय है। व्यापार एक पहलू है लेकिन यह भी अहम है कि हम यूरोप और अमेरिका को किस तरह का संदेश देते हैं। कृषि, फार्मा और ऊर्जा क्षेत्रों में रुपया-रूबल में व्यापार को लागू करना भी आसान है। उक्त शख्स ने कहा, ‘अन्य क्षेत्रों के लिए हमें इस पर विचार करना होगा कि हम प्रतिबंधों को मानते हैं या नहीं। ऐसे में यह कठिन निर्णय होगा।’ उन्होंने कहा कि रक्षा उपकरण और दोहरे उपयोग वाले सामान के व्यापार के बारे में व्यापक विचार-विमर्श के बाद निर्णय लिया जाएगा।
भारतीय रिजर्व बैंक भी यूको बैंक जैसे बैंकों के साथ चर्चा कर रहा है। ईरान पर प्रतिबंध के समय यूको बैंक के जरिये ही इस देश के साथ लेनदेन किया गया था और भारतीय स्टेट बैंक भुगतान की सुविधा के लिए तीसरे पक्ष को नियुक्त करने की संभावना तलाश रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक रूबल के मूल्य में लगातार आ रही गिरावट को ध्यान में रखते हुए विनिमय दर तय करने पर निर्णय ले सकता है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा रूस के कई बैंकों को स्विफ्ट से बाहर कर देने के बाद निर्यातक को भुगतान संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सीमा पार लेनदेन स्विफ्ट प्रणाली के जरिये ही किया जाता है। निर्यातकों ने सरकार को अपनी चिंता बताई है और रुपया-रूबल व्यापार व्यवस्था शुरू करने का आग्रह किया है। इससे रूस के आयातकों को रूबल में भुगतान की अनुमति होगी और भारतीय निर्यातक रुपये में भुगतान कर सकेंगे। रूस के सरकारी बैंक सबरबैंक और वीटीबी का भारत में परिचालन है और लेनदेन में मध्यस्थता के लिए उससे गठजोड़ किया जा सकता है। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि भारत ने रूस पर तटस्थ रुख बनाए रखा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि हालांकि दोनों देशों के बीच कोई भी लेन-देन विनियम दर पर होगा।

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First Published - March 11, 2022 | 11:24 PM IST

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