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किसानों की आय बढ़ाएंगी तीन नई सहकारी समितियां: अमित शाह

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शाह ने रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को हतोत्साहित करते हुए जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

Last Updated- March 13, 2024 | 9:39 PM IST
File Photo: Union Home Minister Amit Shah

सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि तीन नई सहकारी समितियां – एनसीओएल, एनसीईएल और बीबीएसएसएल – जैविक खाद्य पदार्थों सहित कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाएंगी। साथ ही ये देश में खेती-बाड़ी की विभिन्न समस्याओं का हल करने में मदद करेंगी।

उन्होंने यहा वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, नौरोजी नगर में तीन राष्ट्रीय स्तर की बहु-राज्य सहकारी समितियों – भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (बीबीएसएसएल), नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (एनसीओएल) और नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट लिमिटेड (एनसीईएल) के नए कार्यालय भवन का उद्घाटन करने के बाद यह बात कही।

शाह ने रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को हतोत्साहित करते हुए जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने घोषणा की कि अगले पांच वर्षों में हर जिले में जैविक खेती और उत्पादों को प्रमाणित करने के लिए एक प्रयोगशाला होगी। शाह ने कहा कि एनसीओएल सहकारी अमूल के अलावा देश में जैविक खेती को बढ़ावा देगी।

अमूल पहले ही बाजार में कई जैविक उत्पाद पेश कर चुकी है। उन्होंने कहा कि जैविक उत्पादों का कुल वैश्विक बाजार 10 लाख करोड़ रुपये का है और भारत का जैविक उत्पादों का निर्यात केवल 7,000 करोड़ रुपये है। उन्होंने कहा, ‘‘हम भारत के जैविक निर्यात को 70,000 करोड़ रुपये तक बढ़ाना चाहते हैं। यह एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य है लेकिन हम इसे हासिल करेंगे।’’

शाह ने कहा कि उनके घर में जैविक दाल, चावल और गेहूं के आटे का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में जैविक उत्पादों की खपत बढ़ेगी। बीज समिति बीबीएसएसएल के लिए उन्होंने कहा कि अगले पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये का कारोबार हासिल करने का लक्ष्य है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के दृष्टिकोण को हासिल करने के लिए, तीनों सहकारी समितियां कृषि और संबंधित गतिविधियों से जुड़े लोगों का उत्थान सुनिश्चित करेंगी।

सरकार ने पहले इन तीन सहकारी समितियों की स्थापना को मंजूरी दी थी। इन समितियों को बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम, 2002 के तहत पंजीकृत किया गया है। एनसीईएल का गठन सहकारी क्षेत्र से निर्यात को बढ़ावा देने के लिए किया गया है।

एनसीईएल के सदस्य प्रवर्तकों में गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन महासंघ लिमिटेड (जीसीएमएमएफ), भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (इफको), कृषक भारती सहकारी लिमिटेड (कृभको), राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ (एनएफेड), और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) शामिल हैं।

एनसीईएल सहकारी समितियों और संबंधित संस्थाओं की वस्तुओं और सेवाओं का प्रत्यक्ष निर्यात करेगा। एनसीओएल का गठन जैविक उत्पादों की क्षमता का उपयोग करने और एक स्वस्थ कृषि परिवेश बनाने के लिए किया गया है। यह सहकारी क्षेत्र के जैविक उत्पादों के एकत्रीकरण, खरीद, प्रमाणन, परीक्षण, ब्रांडिंग और विपणन के लिए एक प्रमुख संगठन के रूप में कार्य करेगा।

एनसीओएल के प्रवर्तक नैफैड, एनडीडीबी (राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड), एनसीडीसी, जीसीएमएमएफ और एनसीसीएफ हैं। बीबीएसएसएल उन्नत और पारंपरिक बीज अनुसंधान और उत्पादन से संबंधित है और सहकारी क्षेत्र के माध्यम से उनके प्रसंस्करण तथा विपणन के लिए जिम्मेदार है। इसके प्रवर्तक इफको, कृभको, नेफेड, एनडीडीबी और एनसीडीसी हैं।

बीबीएसएसएल का लक्ष्य सहकारी समितियों के माध्यम से वैश्विक मानकों के अनुरूप भारत में गुणवत्ता वाले बीजों का उत्पादन बढ़ाना और आयातित बीजों पर निर्भरता कम करना है। अच्छी गुणवत्ता वाले बीज कृषि उत्पादन बढ़ाने में मदद करेंगे और बदले में बीज उत्पादक किसानों की आय में वृद्धि होगी।

ये तीनों समितियां कृषि और संबंधित गतिविधियों से जुड़े लोगों के उत्थान को सुनिश्चित करेंगी और पैक्स के माध्यम से किसानों से कृषि उपज और बीज की खरीद करेंगी। इससे पैक्स को और मजबूती मिलेगी क्योंकि इससे जुड़े किसानों को उनकी उपज का अधिकतम मूल्य मिलेगा। समितियां यह सुनिश्चित करने के उद्देश्य से काम करेंगी कि शुद्ध अधिशेष पर मुनाफा सीधे किसानों के खातों में जाए, जिससे इस प्रक्रिया में गड़बड़ी को रोका जा सके।

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First Published - March 13, 2024 | 9:39 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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