प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी | फाइल फोटो
पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग में कई भारतीय नागरिकों के घायल होने और कम से कम एक की मौत की खबरों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को इजरायल, सऊदी अरब, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के शीर्ष नेतृत्व से बात की। प्रधानमंत्री ने उन देशों में भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इन नेताओं को धन्यवाद दिया और उनसे इस संघर्ष को समाप्त करने का आह्वान किया। खाड़ी देशों में कम से कम 90 लाख भारतीय नागरिक रहते हैं।
विपक्षी दलों और धार्मिक समूहों ने सरकार ने मांग की है कि भारत अमेरिका-इजरायल हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या पर बयान जारी करे। दूसरी ओर सूत्रों ने कहा कि सरकार का मानना है कि यहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सबसे महत्त्वपूर्ण है। खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले 90 लाख अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) में से अधिकांश सऊदी अरब (24.6 लाख), यूएई (35.4 लाख), बहरीन (3.23 लाख), कुवैत (9.93 लाख), ओमान (6.84 लाख), कतर (8.35 लाख) और जॉर्डन (16,897) में रहते हैं। इनमें से किसी ने भी खामेनेई की मौत पर कोई बयान जारी नहीं किया है और न ही 57 सदस्य देशों वाले इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) के अधिकांश देशों ने ऐसा किया है। ईरान में 10,320, इराक में 17,100 और इजरायल में 20,000 एनआरआई मौजूद हैं।
बहरीन के राजा हमद बिन इसा अल खलीफा और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान के साथ अपनी टेलीफोन पर बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के उल्लंघन में हाल के हमलों की निंदा की और वहां रहने वाले भारतीय समुदाय की देखभाल करने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।
प्रधानमंत्री ने सऊदी अरब के प्रधानमंत्री के साथ अपनी बातचीत के बारे में एक्स पर लिखा, ‘भारत सऊदी अरब पर उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के उल्लंघन में हाल के हमलों की निंदा करता है। हम इस बात पर सहमत हुए हैं कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता की जल्द से जल्द बहाली अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।’
एक अन्य पोस्ट में मोदी ने कहा कि उनकी बहरीन के राजा के साथ टेलीफोन पर वार्ता हुई है। उन्हें बताया कि भारत हमलों की निंदा करता है और बहरीन में भारतीय समुदाय को दिए गए अटूट समर्थन के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। इससे पहले दिन में प्रधानमंत्री ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी बात की। मोदी ने कहा कि उन्होंने हाल के घटनाक्रम पर भारत की चिंताओं से अवगत कराया और अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता बताया।
बीते रविवार की रात प्रधानमंत्री ने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से बात की और खाड़ी देश पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि भारत इन कठिन समय में यूएई के साथ एकजुटता से खड़ा है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हैदराबाद हाउस में अपने प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति पर चर्चा की। मोदी ने अपने मीडिया बयान में कहा, ‘पश्चिम एशिया में मौजूदा स्थिति हमारे लिए गहरी चिंता का विषय है। भारत बातचीत और कूटनीति के जरिए सभी विवादों के समाधान चाहता है।’
गृह मंत्रालय ने राज्यों को ईरान समर्थक उपदेशकों पर नजर रखने के लिए कहा है। मंत्रालय ने कहा कि इजरायल-अमेरिका के हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ये उपदेशक भड़काऊ बयान दे सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप हिंसा हो सकती है। इसलिए एहतियात बरतने की जरूरत है।
मंत्रालय ने 28 फरवरी को भेजे पत्र में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से चरमपंथियों और वैश्विक आतंकी समूह के हैंडल की सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर रखने के लिए भी कहा है। परिपत्र में राज्यों से अपने अधिकार क्षेत्र में अमेरिका और इजरायल के वाणिज्य दूतावासों, दूतावासों, राजनयिक कार्यालयों व अन्य संस्थाओं की सुरक्षा बढ़ाने के लिए कहा गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार शाम को सुरक्षा पर मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) की बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात की समीक्षा की गई और यहां रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा पर चिंता व्यक्त की। सीसीएस ने सभी संबंधित विभागों को संघर्ष प्रभावित देशों में भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए आवश्यक और व्यवहार्य उपाय करने का भी निर्देश दिया।
अधिकारियों ने कहा कि ईरान सहित पश्चिम एशिया में भारत के विदेश मंत्रालय के मिशनों ने अनिवासी भारतीयों को मानवीय सहायता प्रदान करने के लिए नियंत्रण कक्ष स्थापित किए हैं।
सीसीएस ने जंग जल्द समाप्त करने और बातचीत एवं कूटनीति के जरिए आपसी मसले सुलझाने पर जोर दिया। बैठक में 18 फरवरी को ईरान में हुए हवाई हमलों और उसके बाद कई खाड़ी देशों में हुए हमलों सहित हालात के बारे में जानकारी दी गई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा और शक्तिकांत दास, सीडीएस जनरल अनिल चौहान, कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन और विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी इस बैठक में मौजूद थे।
ईरान पर अमेरिकी-इजरायली सैन्य हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की निंदा करने के लिए जम्मू-कश्मीर और तेलंगाना सहित देश के कुछ हिस्सों में विरोध प्रदर्शन सोमवार को भी जारी रहे। कश्मीर में लगभग 15 लाख शिया रहते हैं। यहां रविवार को लाल चौक, सैदा कदल, बडगाम, बांदीपोरा, अनंतनाग और पुलवामा में विरोध प्रदर्शन हुए।
राज्य सरकारों ने फंसे हुए नागरिकों की मदद के लिए केंद्र से आग्रह किया है। आंध्र प्रदेश एनआरआई मंत्री के श्रीनिवास ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण फंसे तेलुगु नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने के लिए तत्काल उपाय कर रही है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोमवार को प्रभावित देशों में फंसे पंजाबियों की सहायता के लिए चौबीसों घंटे हेल्पलाइन नंबर की घोषणा की। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से निकासी की तैयारी शुरू करन का आग्रह किया।
(साथ में एजेंसियां)