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प्रतिस्पर्धा आयोग का बड़ा बदलाव, प्रतिबद्धता मामलों की कुल समय-सीमा 180 दिन हुई

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सीसीआई ने कहा कि प्रतिबद्धता नियमों में बदलाव ढांचे को लागू करने से मिले अनुभवों पर आधारित थे। इस दौरान कुछ प्रशासनिक और प्रक्रिया संबंधी मसले भी सामने आए

Last Updated- August 19, 2026 | 11:15 PM IST
CCI issues new rules for merger, approval required for companies with turnover of more than Rs 500 crore CCI ने विलय के लिए जारी किए नए नियम, 500 करोड़ से ज्यादा कारोबार वाली कंपनियों के लिए मंजूरी जरूरी
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने प्रतिबद्धता के नए नियमों को अधिसूचित किया है। इसमें ऐसे आवेदन दाखिल करने की समय-सीमा 45 दिन से बढ़ाकर 60 दिन कर दी गई है। 18 अगस्त की एक अधिसूचना में सीसीआई ने प्रतिबद्धता के आवेदनों पर अपने आरंभिक विचार-विमर्श के लिए उपलब्ध अवधि को 7 कार्य दिवस से बढ़ाकर 15 और कुल समय-सीमा को 130 दिन से बढ़ाकर 180 कर दिया है।

प्रतिस्पर्धा (संशोधन) अधिनियम, 2023 के तहत अधिनियम की धारा 48ए और 48बी पेश की गई। इसका मकसद निपटान और प्रतिबद्धता का ऐसा तंत्र बनाना है, जिससे एकाधिकार विरोधी जांच का सामना कर रही कंपनियां लंबे कानूनी विवाद के बिना मामलों को सुलझाने के लिए अपनी मर्जी से सुधार के या कुछ शर्तों को मानने के प्रस्ताव दे सकें।

यह प्रावधान लागू होने के बाद से सीसीआई ने अभी तक किसी भी प्रतिबद्धता प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी है। वर्तमान में इंडिगो विमानन कंपनी का संचालन करने वाली इंटरग्लोब एविएशन और गूगल के दो प्रस्ताव विचाराधीन हैं। गूगल का आवेदन प्ले स्टोर पर रियल मनी गेमिंग ऐप सूचीबद्ध करने के संबंध में कथित अनुचित कारोबारी कार्यप्रणाली के आरोपों की जांच से जुड़ा है। इंटरग्लोब की प्रतिबद्धता दिसंबर 2025 में बड़े स्तर पर उड़ानों में रुकावटों के कारण शुरू हुई दबदबे के दुरुपयोग की जांच से जुड़ी है।

दोनों आवेदनों के लिए सार्वजनिक राय मांगी जा चुकी है और आयोग को इस मामले पर अंतिम निर्णय लेना है। सीसीआई ने कहा कि प्रतिबद्धता नियमों में बदलाव ढांचे को लागू करने से मिले अनुभवों पर आधारित थे। इस दौरान कुछ प्रशासनिक और प्रक्रिया संबंधी मसले भी सामने आए। ये मसले निर्धारित समय-सीमा, आवेदनों की खामियों के सुधार और शुल्क के समायोजन तथा अवैध आवेदनों के नतीजों पर स्पष्टता की कमी से जुड़े थे।

सीसीआई ने हितधारकों से इन प्रस्तावित परिवर्तनों पर टिप्पणियां आमंत्रित की थीं। कुछ ने सुझाव दिया कि महानिदेशक की जांच रिपोर्ट जमा करने से पहले किसी भी चरण में प्रतिबद्धता आवेदन की अनुमति दी जानी चाहिए। हालांकि सीसीआई ने कहा कि जांच रिपोर्ट जमा करने तक प्रतिबद्धता आवेदनों की अनुमति देने से प्रक्रिया संबंधी निश्चितता कम हो जाएगी, यह जल्द हस्तक्षेप के उद्देश्य को कमजोर कर देगी और इससे जांच प्रक्रिया में देरी होगी।

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First Published - August 19, 2026 | 11:15 PM IST

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