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क्लोजिंग ऑक्शन सेशन में हेरफेर पर सेबी की बड़ी कार्रवाई, कॉपटॉल और मानसी ब्रोकिंग पर लगाई रोक

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यह मामला 13 अगस्त को बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर सेंसेक्स अनुबंध के निपटान के दिन सीएएस के दौरान किए गए कथित हेरफेर वाले कारोबार से जुड़ा है।

Last Updated- August 19, 2026 | 11:05 PM IST
SEBI

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने तेजी से कार्रवाई करते हुए कॉपटॉल मॉरीशस इन्वेस्टमेंट और मानसी शेयर ऐंड स्टॉक ब्रोकिंग के प्रतिभूति बाजार में काम करने पर आज पाबंदी लगा दी। उन पर क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) के दौरान हेरफेर वाले ट्रेड करने का आरोप था। यह मामला 13 अगस्त को बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर सेंसेक्स अनुबंध के निपटान के दिन सीएएस के दौरान किए गए कथित हेरफेर वाले कारोबार से जुड़ा है। नियामक ने यह कार्रवाई कथित हेरफेर के महज छह दिनों के भीतर की है। 

सेबी ने दोनों संस्थाओं द्वारा कमाए गए 3.67 करोड़ रुपये के कथित अनुचित लाभ को जब्त करने का भी निर्देश दिया है। इसमें कॉपटॉल मॉरीशस इन्वेस्टमेंट की कथित कमाई 2.96 करोड़ रुपये और मानसी शेयर ऐंड स्टॉक ब्रोकिंग की 71.64 लाख रुपये है।

नियामक ने दोनों संस्थाओं को आगे के आदेश तक इक्विटी सेगमेंट के सीएएस में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से भाग लेने तथा सीएएस के दौरान ऑर्डर देने, उनमें बदलाव करने या उन्हें रद्द करने से भी रोक दिया है। हालांकि मानसी शेयर ऐंड स्टॉक ब्रोकिंग के मामले में यह रोक केवल उसके प्रोपराइटरी ट्रेडिंग अकाउंट पर लागू होगी। इससे चंद घंटे पहले एक कार्यक्रम में सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा कि हाल में शुरू किए गए सीएएस ढांचे में हेरफेर वाली किसी भी गतिविधि में शामिल प्रतिभागी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

फिक्की कैपिटल मार्केट्स कॉन्फ्रेंस (सीएपीएएम) को संबोधित करते हुए सेबी के चेयरमैन ने कहा, ‘अगर लोग सीएएस में हेरफेर करते हैं तो हम सख्त कार्रवाई करेंगे और तुरंत करेंगे। अगर किसी को लगता है कि वह सीएएस को बदनाम करने के लिए उसमें हेरफेर कर लेंगे तो वह गलतफहमी में है।’ सेबी के चेयरमैन ने कहा कि पहले की वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (वीडब्ल्यूएपी) प्रणाली के मुकाबले सीएएस हेरफेर वाली किसी भी गतिविधि की पहचान करने में ज्यादा असरदार है। पांडेय ने कहा, ‘सीएएस प्रणाली में हेरफेर को पकड़ने की अधिक क्षमता है। पुरानी वीडब्ल्यूएपी के मुकाबले सीएएस प्रणाली में हम हेरफेर को अपेक्षाकृत आसानी से पकड़ सकते हैं।’

सेबी ने इन दोनों संस्थानों के खिलाफ जारी अंतरिम आदेश में उनके बैंक खातों से नियामक की मंजूरी के बिना पैसे निकालने पर भी रोक लगाने का निर्देश दिया गया है। ऑर्डर में यह भी कहा गया है कि सीएएस के लागू होने से अस्थिरता और हेरफेर कम होने की उम्मीद है क्योंकि यह प्रणाली ज्यादा कुशल और पारदर्शी बन जाएगा, जिससे सेबी को पुरानी प्रणाली की तुलना में हेरफेर का पता लगाने में आसानी होगी।

आदेश में सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्र वार्ष्णेय ने कहा, ‘यह ध्यान रखना जरूरी है कि हेरफेर करने वाले ऐसे तौर-तरीकों का वायदा एवं विकल्प सेगमेंट में कारोबार करने वाले लोगों पर बहुत बुरा असर पड़ता है।’

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First Published - August 19, 2026 | 11:05 PM IST

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