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महिलाओं को समान संसाधन मिलें तो बढ़ेगी खेती की पैदावार, रिपोर्ट में बड़ा दावा

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रिपोर्ट के अनुसार मजदूरी, भू-स्वामित्व और संसाधनों की उपलब्धता में असमानता के कारण भारत को कृषि उत्पादन में हर साल 2 लाख करोड़ रुपये तक का नुकसान झेलना पड़ता है

Last Updated- August 19, 2026 | 11:08 PM IST
women farmers
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारतीय कृषि में महिलाओं को पुरुषों की तुलना में समान काम करने पर भी 20 से 30 प्रतिशत कम कमाई होती है। पुरुष श्रमिक को अगर 100 रुपये मिलते हैं तो महिला श्रमिक को केवल 82 रुपये दिए जाते हैं। यह बात अनाज के कारोबार से जुड़े एकीकृत प्लेटफॉर्म आर्या डॉट एजी की रिपोर्ट ‘हर हार्वेस्ट’ में कही गई है।

रिपोर्ट के अनुसार मजदूरी, भू-स्वामित्व और संसाधनों की उपलब्धता में असमानता के कारण भारत को कृषि उत्पादन में हर साल 1.2 लाख करोड़ से 2 लाख करोड़ रुपये तक का नुकसान झेलना पड़ता है। यह आर्थिक नुकसान गांवों में बुनियादी असंतुलन के कारण हो रहा है।

इस समय  लगभग 77 प्रतिशत कामकाजी ग्रामीण महिलाएं कृषि में लगी हुई हैं। वित्त वर्ष 2017-18 में कृषि श्रमबल में उनकी हिस्सेदारी 57 प्रतिशत थी, जो 2023-24 में बढ़कर 64 प्रतिशत से अधिक हो गई।
आधे से ज्यादा कृषि कार्य करने के बावजूद महिलाओं के पास कुल कृषि क्षेत्र का केवल 11.72 प्रतिशत हिस्सा है।

इससे पता चलता है कि महिलाएं अपने नियंत्रण वाली कृषि भूमि के मुकाबले पांच गुना ज्यादा श्रम करती हैं। जो खेत महिलाएं चला रहे हैं, उनकी पैदावार 24 प्रतिशत कम है, जिससे भारत की 48.7 लाख करोड़ रुपये की कृषि अर्थव्यवस्था में उत्पादन 2.5 से 4 प्रतिशत कम रह जाता है।

भूमि का मालिकाना हक ही बताता है कि किसान कौन है, ऋण कसे मिलेगा, सहायता किसे मिलेगी और खरीद किसके लिए होगी। पुरुष तेजी से शहरों में जाकर गैर कृषि कार्यो में लग रहे हैं, इसलिए महिलाएं खेत संभाल रही हैं।

फिर भी कृषि क्षेत्र में काम करने वाली करीब 47.7 प्रतिशत महिलाएं परिवार के खेतों में बिना मजदूरी के काम कर रही हैं, जबकि ऐसे पुरुष केवल 20.2 प्रतिशत हैं। इसकी शुरुआत तब होती है, जब महिलाओं को किसान नहीं माना जाता, जिससे उन्हें बैंकों से कर्ज नहीं मिलता, खाद-बीज आदि खरीदने में दिक्कत आती है और भंडारण की सुविधा भी नहीं मिलती। इसकी वजह से घबराहट में उन्हें अपनी उपज सस्ते में बेचनी पड़ती है, जिससे उनकी आमदनी कम रह जाती है और वे संपत्ति नहीं इकट्ठी कर पातीं। इस अंतर को पाटने का उपाय संसाधन, मान्यता और रिटर्न में निहित है।

समान संसाधन उपलब्ध कराने से महिलाओं द्वारा संचालित खेतों की उपज 20-30 प्रतिशत बढ़ जाएगी, जबकि महिला किसानों की आय में वृद्धि से समग्र घरेलू आय 20-30 प्रतिशत बढ़ जाएगी। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘एक महिला किसान द्वारा कमाया गया एक रुपया दोहरा काम करता है। शुरुआत में इससे उत्पादन बढ़ता है और बाद में लचीलापन आता है।’ नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत महिलाओं के नेतृत्व वाले लगभग 15,000 स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को कृषि ड्रोन से लैस किया जा रहा है, जिससे प्रशिक्षित ऑपरेटरों को प्रति माह 60,000 से 80,000 रुपये तक की कमाई करने में मदद मिलेगी।

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First Published - August 19, 2026 | 11:08 PM IST

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