भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) छोटे और मध्यम उद्योगों (SMEs) की लिस्टिंग व्यवस्था में बड़े बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। साथ ही वित्तीय बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) के इस्तेमाल को लेकर जवाबदेही भी कड़ी की जाएगी। बुधवार को मुंबई में फिक्की के सालाना कैपिटल मार्केट्स कॉन्फ्रेंस के इतर सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा कि रेगुलेटर SME फ्रेमवर्क में ट्रेडिंग, मार्केट मेकिंग, अंडरराइटिंग और मेन बोर्ड में माइग्रेशन से जुड़ी कमियों की जांच कर रहा है।
सेबी ने देखा है कि एसएमई प्लेटफॉर्म पर ‘ऑड लॉट’ बन रहे हैं, जिससे निवेशकों के लिए ट्रेड करना मुश्किल हो रहा है। पांडेय ने कहा कि रिटेल भागीदारी को कंट्रोल करने के लिए ट्रेडिंग लॉट और एप्लीकेशन साइज बढ़ाने जैसे कदमों से भी उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं मिले हैं।
मार्केट मेकिंग की व्यवस्था भी चिंता का विषय है। चेयरमैन ने कहा कि यह ठीक से काम नहीं कर रही है और इससे एसएमई कंपनियों की लागत बढ़ रही है। अंडरराइटिंग व्यवस्था में भी बदलाव की जरूरत है। इसके अलावा, मेन बोर्ड में जाने और पेड-अप कैपिटल से जुड़ी आवश्यकताओं पर भी दोबारा विचार करने की जरूरत है। पांडेय ने कहा, “हम व्यापक सुधार का प्रस्ताव लाएंगे और इसके लिए एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया जाएगा।”
Also Read: भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने बदला कमिटमेंट रूल्स, गूगल और इंडिगो के प्रस्तावों पर फैसले का इंतजार
AI और ML को लेकर सेबी वित्तीय बाजार में इन तकनीकों के जिम्मेदारी से इस्तेमाल के लिए दिशानिर्देश तैयार कर रहा है। पांडेय ने कहा कि AI को लेकर पहले किया गया कंसल्टेशन अभी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन उसके बाद से तकनीक के क्षेत्र में कई नए बदलाव हुए हैं। इसलिए प्रस्तावित व्यवस्था में इन नए मुद्दों को भी शामिल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य AI के इस्तेमाल को बढ़ावा देना होगा, लेकिन साथ ही यह भी साफ तौर पर तय किया जाएगा कि इसकी जिम्मेदारी और जवाबदेही किसकी होगी।
पांडेय ने कहा, “तकनीक मौजूद है और हम निश्चित रूप से AI तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देंगे, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी और जवाबदेही को और स्पष्ट रूप से तय करना जरूरी है।” वह आगे भाषण में कहते हैं कि सेबी के दायरे में आने वाली हर संस्था, अपने इस्तेमाल किए जाने वाले किसी भी AI या ML टूल के लिए पूरी तरह जिम्मेदार होगी, चाहे वह टूल उन्होंने खुद बनाया हो या किसी तीसरी पार्टी से लिया हो। यह जिम्मेदारी निवेशकों के डेटा की प्राइवेसी, सुरक्षा और प्रमाणिकता के साथ-साथ ऐसे सिस्टम से मिलने वाले नतीजों पर भी लागू होगी।
सेबी के प्रस्तावित दिशानिर्देशों में अलग-अलग स्तरों के हिसाब से व्यवस्था बनाई जाएगी। इसमें जिम्मेदारी और निगरानी के लिए स्पष्ट नियम होंगे। इसमें “किल स्विच” और “ह्यूमन इन द लूप” जैसे सुरक्षा उपाय भी जरूरी होंगे। इसके साथ डेटा पर नियंत्रण की व्यवस्था भी होगी, ताकि तकनीकी विकास और निवेशकों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाया जा सके।
सेबी ने संदिग्ध फाइनेंशियल प्रमोशन और संभावित रूप से गुमराह करने वाले विज्ञापनों की पहचान करने के लिए ‘प्रोजेक्ट सुदर्शन’ और ‘R(AI)DAR’ के जरिए AI का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। इसने मार्केट इकोसिस्टम में जानकारी साझा करने और साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ‘साइबर सुरक्षा पोर्टल’ भी बनाया है। सेबी ‘लिस्टिंग ऑब्लिगेशन्स एंड डिस्क्लोज़र रिक्वायरमेंट्स’ (LODR) और डीलिस्टिंग फ्रेमवर्क की भी समीक्षा कर रहा है। इसके अलावा, रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs) और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvITs) के लिए, सेबी इस बात पर विचार कर रहा है कि क्या कुछ सीमाओं के भीतर निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स में निवेश के लिए ज्यादा छूट दी जाए।