कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन ने शुक्रवार को कहा कि सरकार की भूमि अधिग्रहण नीति में बदवाल करने की कोई योजना नहीं है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब देश में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लंबित रहने में भूमि अधिग्रहण नीति प्रमुख बाधाओं में से एक बन गई है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में प्रो-एक्टिव गवर्नेंस ऐंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन (प्रगति) की 50 वीं बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि 85 लाख करोड़ रुपये की 3,300 से अधिक परियोजनाओं में 7,735 मुद्दे उठाए गए, जिनमें से 7,156 का समाधान किया गया।
प्रगति विभिन्न वजहों से अटकी परियोजनाओं में तेजी लाने के लिए होने वाली समीक्षा व्यवस्था है।
सोमनाथन ने कहा कि प्रगति के माध्यम से जिन 7,156 मसलों का समाधान किया गया, उनमें 35 प्रतिशत भूमि अधिग्रहण से जुड़े हुए, 20 प्रतिशत वन क्षेत्र, वन्य जीव और पर्यावरण से जुड़े हुए, 18 प्रतिशत उपयोग/मार्ग के अधिकार से जुड़े हुए और अन्य कानून-व्यवस्था, निर्माण, बिजली उपयोगिता अनुमोदन और वित्तीय मुद्दों से संबंधित थे। यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार भूमि अधिग्रहण नीति की समीक्षा करेगी, सोमनाथन ने कहा, ‘भूमि अधिग्रहण नीति में संशोधन करने की कोई योजना नहीं है।’
उन्होंने कहा कि 500 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की परियोजनाओं की समीक्षा प्रगति प्लेटफॉर्म द्वारा की गई और राज्य सरकारों भी इस व्यवस्था के तहत मसलों के समाधान की इच्छुक हैं, जिसे एक दशक पहले पेश किया गया था। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों की परवाह किए बिना सभी राज्य अपनी परियोजनाएं पूरी करना चाहते हैं और सभी मुख्य सचिवों ने इसमें सहयोग दिया है।