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FY26 की पहली छमाही में कंपनियों का कैपेक्स 6 साल के हाई पर, इंफ्रा और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने दिखाई तेजी

बिज़नेस स्टैंडर्ड के नमूने में शामिल 702 कंपनियों की कुल ​स्थिर संप​​त्तियां वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही के आखिर में बढ़कर 37.78 लाख करोड़ रुपये हो गईं

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कृष्ण कांत   
Last Updated- February 09, 2026 | 11:02 PM IST

भारत की शीर्ष सूचीबद्ध कंपनियों के चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही के आंकड़ों से पता चलता है कि कंपनी जगत में पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) में तेजी आई है। बैंक, वित्त और बीमा (बीएफएसआई) तथा तेल एवं गैस क्षेत्र को छोड़ दें तो बाकी क्षेत्र की सूचीबद्ध कंपनियों की कुल ​स्थिर संपत्तियां या पूंजीगत खर्च चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही के दौरान 13.1 फीसदी बढ़ा जो बीते 6 साल में सबसे तेज वृद्धि है।

बिज़नेस स्टैंडर्ड के नमूने में शामिल 702 कंपनियों की कुल ​स्थिर संप​​त्तियां वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही के आखिर में बढ़कर 37.78 लाख करोड़ रुपये हो गईं जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान अव​धि में 33.41 लाख करोड़ रुपये और मार्च 2025 के आखिर में 36.33 लाख करोड़ रुपये थीं। इसकी तुलना में इन कंपनियों की ​स्थिर परिसंपत्तियां या पूंजीगत खर्च वित्त वर्ष 2025 की पहली छमाही में 7.9 फीसदी और दूसरी छमाही में 6.9 फीसदी बढ़ा था।

चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में पूंजीगत खर्च में वृद्धि मुख्य रूप से सीमेंट, बिजली, निर्माण और बुनियादी ढांचा, खनन तथा धातु और वाहन क्षेत्र की कंपनियों की बदौलत आई है। ग्रासिम इंडस्ट्रीज ने इसमें सबसे ज्यादा योगदान दिया। इसके बाद अदाणी एंटरप्राइजेज, एनटीपीसी, टाटा स्टील और पावर ग्रिड का स्थान रहा। हमारे नमूने में शामिल कंपनियों के कुल पूंजीगत खर्च में इन पांच कंपनियों की हिस्सेदारी करीब 30 फीसदी रही।

ग्रासिम की कुल ​स्थिर संप​त्तियां सितंबर 2025 के आखिर में सालाना आधार पर 30 फीसदी बढ़कर 1.25 लाख करोड़ रुपये हो गईं जो सितंबर 2025 के आखिर में लगभग 96,500 करोड़ रुपये थीं। ग्रासिम के पूंजीगत खर्च में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से उसकी सूचीबद्ध सीमेंट इकाई अल्ट्राटेक सीमेंट की वजह से हुई है। अल्ट्राटेक सीमेंट की ​स्थिर संप​त्तियां वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में 41.2 फीसदी बढ़कर लगभग 95,500 करोड़ रुपये हो गईं।

इसी तरह अदाणी एंटरप्राइजेज का पूंजीगत खर्च इस दौरान 25.2 फीसदी बढ़कर 1.42 लाख करोड़ रुपये रहा। एनटीपीसी के मामले में यह 8 फीसदी बढ़कर 3.82 लाख करोड़ रुपये रहा। इसी तरह वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में टाटा स्टील का पूंजीगत खर्च 13.6 फीसदी और पावरग्रिड का 6.5 फीसदी बढ़ा है।

कई कंपनियों के मामले में ​​स्थिर संप​त्तियों में बढ़ोतरी की मुख्य वजह अधिग्रहण थी। इसमें अल्ट्राटेक सीमेंट, अदाणी पोर्ट्स, डॉ. रेड्डीज लैब, कोरोमंडल इंटरनैशनल, जेएसडब्ल्यू एनर्जी और टाटा कंज्यूमर जैसी कंपनियां शामिल हैं। अगर नमूने में रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन और ओएनजीसी जैसी कंपनियों को भी शामिल किया जाए तो वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में कंपनी जगत का पूंजीगत खर्च 20 फीसदी से भी ज्यादा बढ़ा है।

वित्तीय कंपनियों से इतर बाकी कंपनियों का कुल पूंजीगत खर्च सितंबर 2025 के आखिर में 20 फीसदी बढ़कर 60.8 लाख करोड़ रुपये रहा जो सितंबर 2024 के आखिर में 50.65 लाख करोड़ और मार्च 2025 में 54.72 लाख करोड़ रुपये था।

सही मायने में वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में पूंजीगत खर्च में कुल वद्धि में तेल एंव गैस कंपनियों का हिस्सा 5.78 लाख करोड़ रुपये रहा जो गैर-वित्तीय क्षेत्र की सभी सूचीबद्ध कंपनियों के कुल पूंजीगत खर्च से ज्यादा था। बीएफएसआई और तेल एवं गैस को छोड़ दें 702 सूचीबद्ध कंपनियों का कुल पूंजीगत खर्च 4.36 लाख करोड़ रुपये था।

वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में पूंजीगत खर्च में रिलायंस इंडस्ट्रीज का दबदबा रहा। उसका पूंजीगत खर्च 84.2 फीसदी बढ़कर 12.89 लाख करोड़ रुपये रहा जो इससे पिछले साल की समान अवधि में करीब 8.1 लाख करोड़ रुपये था।

आंकड़ों से पता चलता है कि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में आय वृद्धि में नरमी और आय-स्थिर संपत्ति अनुपात के आधार पर मापी गई क्षमता उपयोगिता में गिरावट के बावजूद कंपनियों के पूंजीगत खर्च में तेजी आई। नतीजतन, इन कंपनियों का शुद्ध बिक्री-स्थिर संपत्ति अनुपात वित्त वर्ष 2024 की पहली छमाही में 180.6 फीसदी से घटकर चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में ढाई साल के निचले स्तर 167.9 फीसदी पर आ गया।

विश्लेषकों के अनुसार शुद्ध बिक्री और स्थिर संपत्ति अनुपात में और गिरावट से कंपनियों का आगे पूंजीगत निवेश हेतु प्रोत्साहन कम हो जाएगा।

First Published : February 9, 2026 | 10:39 PM IST