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पहली तिमाही में मार्जिन पर रहेगा दबाव

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Last Updated- December 11, 2022 | 5:51 PM IST

अमेरिका व यूरोप में संभावित मंदी और दुनिया भर में बढ़ती महंगाई के बीच भारतीय आईटी सेवा कंपनियों के पहली तिमाही (वित्त वर्ष 23) के नतीजों पर नजर रहेगी, साथ ही मांग के परिदृश्य को लेकर प्रबंधन की टिप्पणी भी देखी जाएगी। आपूर्ति को लेकर चुनौतियां अभी कम नहीं हुई हैं, ऐसे में नौकरी पर बनाए रखने की उच्च लागत और यात्रा खर्च के कारण मार्जिन पर दबाव रहेगा। हालांकि अच्छी बात रुपये में आई गिरावट हो सकती है।
भारतीय आईटी सेवा फर्मों  के नतीजे 8 जुलाई से आने शुरू होंगे और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) सबसे पहले नतीजे का ऐलान करेगी। चार अग्रणी कंपनियों में इन्फोसिस आखिर में 24 जुलाई को नतीजे पेश करेगी।
इस क्षेत्र पर नजर रखने वाले विश्लेषकों ने कहा है कि अग्रणी व मिडकैप आईटी सेवा कंपनियों के प्रबंधन ने दोहराया है कि क्लाउड व डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के कारण मांग के मजबूत माहौल है, लेकिन कई विश्लेषकों का अब मानना है कि मांग में किसी तरह के बदलाव के पहले संकेत वित्त वर्ष 23 की पहली तिमाही में स्पष्ट हो जाएंगे।
मोतीलाल ओसवाल के मुकुल गर्ग और राज प्रकाश भानुशाली ने आईटी क्षेत्र के नतीजे पूर्व समीक्षा रिपोर्ट में कहा है, प्रबंधन से हमारी हुई हालिया बातचीत से संकेत मिलता है कि तकनीकी सेवा पर खर्च की रफ्तार बनी हुई है, ऐसे में हमें खुदरा व विनिर्माण क्षेत्रों पर असर के शुरुआती संकेत मिलने की उम्मीद है।
विश्लेषकों को उम्मीद नहीं है कि कंपनियां अपने अनुमानों में बदलाव करेंगी, लेकिन वित्त वर्ष 23 व वित्त वर्ष 24 की दूसरी छमाही पर असर दिखेगा। मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट में कहा गया है, लंबी अवधि का मांग परिदृश्य अपरिवर्तित बना हुआ है, लेकिन हमारा अनुमान है कि वित्त वर्ष 23 व  वित्त वर्ष 24 की दूसरी छमाही में असर दिखेगा, जिसकी वजह बढ़ती महंगाई और अमेरिका व यूरोप में आर्थिक सुस्ती है। हम वित्त वर्ष 23 व  वित्त वर्ष 24 के लिए रुपलये में ईपीएस में 2  से  5 फीसदी की कमी कर रहे हैं, जबकि डॉलर रुपये का 300-400 आधार अंकों  का सकारात्मक असर दिखा है।
बड़ी कंपनियों की बढ़त की सूची में इन्फोसिस सबसे आगे रह सकती है, जिसके बाद टीसीएस का स्थान रहेगा। सीजनल  कमजोरी और कंपनी विशेष के मसले एचसीएल टेक, विप्रो व टेक महिंद्रा पर असर डालेंगे। मिडकैप कंपनियों में माइंडट्री और परसिस्टेंट बढ़त की अगुआई जारी रखेंगी। रिपोर्ट में ये बातें कही गई है।
बढ़त पर परिदृश्य पर हालांकि ध्यान रहेगा, लेकिन अगले दो तिमाहियों में मार्जिन पर असर बने रहने की संभावना है, उसके बाद ही यह सामान्य होना शुरू होगा। आपूर्ति को लेकर कंपनी में दिक्कतें बनी रहेंगी। हाल में एक्सेंचर के जारी नतीजे से पता चला है कि नौकरी छोड़ने की दर ऊंची बनी हुई है।
कोटक इंस्टिट्यूशनल इक्विटीज की रिसर्च रिपोर्ट में कंवलजीत सलूजा और सतीश कुमार ने  कहा है, कंपनियों  को प्रतिभा बनाए रखने पर ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। भारत और अन्य जगहों  पर ये चुनौतियां बनी हुई हैं। यह दबाव मार्जिन पर चोट पहुंचाएगा और हमारा अनुमान है  कि एबिटा मार्जिन में 70 से 400 आधार अंकों का असर होगा।
उनका कहना है कि मार्जिन पर दबाव इन्फोसिस और टीसीएस तथा टेक महिंद्रा के लिए पारिश्रमिक संशोधन, यात्रा खर्च में वृद्धि, और इस्तेमाल में कमी के तौर पर है, क्योंकि कंपनियां फ्रेशर को ज्यादा नियुक्त कर रही हैं।
ध्यान दिए जाने का एक अन्य कारक मूल्य निर्धारण होगा। आपूर्ति संबंधित चिंताएं अभी भी बनी हुई हैं, कर्मियों को अपने साथ जोड़े रखने की लागत बढ़ी है। कीमत वृद्धि का इंतजार करने वाली कंपनियों के लिए वैश्विक मंदी जैसे हालात की वजह से चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। कोटक की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘दूसरी छमाही में कीमत वृद्धि चुनौतीपूर्ण हो सकती है। फिलहाल ज्यादा तर्कसंगत अनुमान मूल्य निर्धारण वृद्धि के नजरिये के बजाय स्थिर मूल्य निर्धारण होगा।’
यदि आप अपने तिमाही परिणाम की घोषणा करने वाली एक्सेंचर से रुझान पर नजर डालें तो पता चलता है कि मांग मजबूत है, लेकिन कुछ प्रबंधन टिप्पणियां वृद्धि और लागत अनुकूलन पर ध्यान बरकरार रखने का संकेत नहीं देतीं।

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First Published - July 4, 2022 | 12:02 AM IST

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