वित्त-बीमा

विदेशी फंड जुटाना अब आसान, आरबीआई ने ईसीबी नियमों में दी राहत

उधारी की सीमा बढ़ाई गई है साथ ही परिपक्वता से जुड़े नियमों को आसान किया गया है और कुछ श्रेणियों में कुल लागत की अधिकतम सीमा हटा दी गई है

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अंजलि कुमारी   
Last Updated- February 18, 2026 | 9:43 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा बाहरी वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) के नियमों में ढील दिए जाने से भारतीय कंपनियों के लिए विदेश से पूंजी जुटाना आसान होने की उम्मीद है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इन बदलावों से कंपनियों की विदेशी फंडिंग में बेहतर बढ़ोतरी हो सकती है।

संशोधित ढांचे के तहत अब अधिक कंपनियां और मान्यता प्राप्त ऋणदाता, ईसीबी के माध्यम से उधारी ले सकेंगे। उधारी की सीमा बढ़ाई गई है साथ ही परिपक्वता से जुड़े नियमों को आसान किया गया है और कुछ श्रेणियों में कुल लागत की अधिकतम सीमा हटा दी गई है। इन कदमों का मकसद व्यवस्था को अधिक लचीला बनाना और वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों के अनुरूप ढालना है।

संशोधित नियमों के अनुसार कंपनियां अब 1 अरब डॉलर तक या अपनी शुद्ध संपत्ति के 300 प्रतिशत तक विदेशी उधार ले सकती हैं। इससे बड़ी कंपनियों को विदेशी पूंजी बाजार से अधिक धन जुटाने का अवसर मिलेगा। लंबी अवधि की उधारी पर ब्याज दर की सीमा हटने से कंपनियां अब बाजार की परिस्थितियों के अनुसार दर तय कर सकेंगी, जिससे सौदों को अंतिम रूप देने में लचीलापन बढ़ेगा।

श्रीराम फाइनैंस के कार्यकारी उपाध्यक्ष उमेश रेवांकर ने कहा, ‘नए ईसीबी नियम आरबीआई की ओर से तंत्र को खोलने की दिशा में बड़ा कदम हैं। पहले फंड के उपयोग पर कई तरह की पाबंदियां थीं लेकिन अब इसका दायरा बढ़ा दिया गया है जो सकारात्मक संकेत है। इससे ऋण की मात्रा और निर्गम की संख्या बढ़ सकती है।’

उन्होंने कहा, ‘विदेशी बाजार से धन जुटाने की वास्तविक मांग, बाजार में खपत और नकदी की स्थितियों पर निर्भर करेगी। फिलहाल देश में पर्याप्त नकदी उपलब्ध है इसलिए कंपनियां तभी विदेशी बाजार का रुख करेंगी जब उन्हें बड़े स्तर पर विस्तार करना होगा या अधिक पूंजी की जरूरत होगी।’

आरबीआई ने न्यूनतम औसत परिपक्वता अवधि के नियमों को भी तर्कसंगत बनाया है और इन प्रावधानों की शर्तों को भी व्यापक किया है। अब कंपनियां, ईसीबी से जुटाई गई राशि का उपयोग पुराने कर्ज की फंडिंग करने और विस्तार योजनाओं के लिए भी कर सकेंगी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक ब्याज दरों में नरमी आती है तब कंपनियां महंगे घरेलू कर्ज की जगह सस्ते विदेशी कर्ज को प्राथमिकता दे सकती हैं। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच कुल 27.5 अरब डॉलर की ईसीबी जुटाई गई।

दिसंबर 2025 में भारतीय कंपनियों जिनमें गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) भी शामिल हैं, उन्होंने ईसीबी और विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बांड (एफसीसीबी) के माध्यम से 4.43 अरब डॉलर जुटाने के प्रस्ताव आरबीआई के पास दाखिल किए। यह वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक का सबसे बड़ा मासिक आंकड़ा है। दिसंबर में प्रस्ताव दाखिल करने वाली प्रमुख कंपनियों में इंडियन रेलवे फाइनैंस कॉरपोरेशन लिमिटेड भी शामिल थी। कंपनी ने बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 29.95 करोड़ डॉलर जुटाने की योजना पेश की।

इस बीच खेतान ऐंड कंपनी के पार्टनर अश्विन बिश्नोई ने नए ईसीबी नियमों को बड़ा बदलाव लाने वाला बताया। उन्होंने कहा, ‘यह भारतीय विलय एवं अधिग्रहण और ऋण बाजारों के लिए ‘1991 जैसा क्षण’ है क्योंकि इससे भारत में एक ऐसे बाजार (एलबीओ) की शुरुआत होगी जब कंपनियां अपने पैसे के बजाय ज्यादा कर्ज लेकर खरीदेंगी और भारत अमेरिका, ब्रिटेन जैसे देशों के समकक्ष खड़ा होगा।

उन्होंने कहा कि नए नियमों के तहत अब अधिग्रहण फंडिंग के लिए भी ईसीबी मददगार हो सकता है और उधारी की लागत बाजार पर छोड़ी गई है, जिससे पहले लागू ब्याज सीमा हटा दी गई है।’

First Published : February 18, 2026 | 9:38 PM IST