फ्रांस की वाहन कलपुर्जा कंपनी वेलियो ने बुधवार को कहा कि वह भारत में 2,150 करोड़ रुपये का निवेश करेगी और 2028 तक देश में अपनी सालाना बिक्री को तीन गुना बढ़ाकर करीब 7,510 करोड़ रुपये पर पहुंचा देगी।
वेलियो इलेक्ट्रिक मोटर्स, इन्वर्टर, ऑन-बोर्ड चार्जर, डीसी-डीसी कन्वर्टर, बैटरी कूलिंग सिस्टम, पार्किंग सेंसर, कैमरे और रेडार-आधारित ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम बनाती है। वह चेन्नई, पुणे, साणंद और गुरुग्राम में छह विनिर्माण संयंत्रों के साथ-साथ चेन्नई और बेंगलूरु में अनुसंधान एवं विकास (आरऐंडडी) केंद्रों का परिचालन करती है।
यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वेलियो के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ़ पेरिलैट ने कहा कि भारत में 2,150 करोड़ रुपये का निवेश कंपनी की वैश्विक एलिवेट 2028 रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने कहा, भारत वेलियो की वैश्विक वृद्धि और नवाचार योजना का प्रमुख स्तंभ है और कंपनी देश में अपने इंजीनियरिंग केंद्रों और औद्योगिक उपस्थिति बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
वेलियो इंडिया के अध्यक्ष (समूह) और प्रबंध निदेशक जयकुमार जी ने कहा कि कंपनी का मुख्य ध्यान उच्च-प्रौद्योगिकी उत्पादों को स्थानीय स्तर पर बनाने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा, इलेक्ट्रिफाइड वाहनों के लिए ई-ऐक्सल और कॉम्बो यूनिट सहित स्थानीयकरण पर हमारा ध्यान है। इसके अलावा हम एडीएएस में भी काम कर रहे हैं। इससे हम ग्राहक कार्यक्रमों का समर्थन करने के साथ-साथ भारत के एक्सईवी इकोसिस्टम के विकास में योगदान देने में सक्षम बनते हैं है।
ई-ऐक्सल एक कॉम्पैक्ट यूनिट है, जो इलेक्ट्रिक मोटर, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और ट्रांसमिशन को एक ही असेंबली में जोड़कर पहियों को चलाती है। कॉम्बो यूनिट में एक इंटीग्रेटेड ऑनबोर्ड चार्जर (जो बाहरी पावर सोर्स से बैटरी को चार्ज करता है) और एक डीसी-डीसी कनवर्टर (जो हाई-वोल्टेज बैटरी पावर को सामान्य वाहन कार्यों के लिए लो-वोल्टेज में बदलता है) शामिल होता है। एडीएएस या एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम में पार्किंग सेंसर, कैमरे और रेडार जैसी सुविधाएं शामिल होती हैं, जो ड्राइवरों की सहायता करती हैं और सुरक्षा बढ़ाती हैं।
कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि उपरोक्त निवेश का एक बड़ा हिस्सा इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों में इस्तेमाल होने वाले घटकों पर खर्च किया जाएगा। पारंपरिक आंतरिक दहन इंजन (आईसीई) के पुर्जों में 80-90 फीसदी स्थानीयकरण की तुलना में वर्तमान में कंपनी के लगभग आधे इलेक्ट्रिक वाहन घटक ही स्थानीय स्तर पर बनते हैं। इसलिए कंपनी पुणे और चेन्नई के अपने संयंत्रों में उत्पादन क्षमता बढ़ा रही है।