वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) का सिक्योरिटाइजेशन बाजार में सबसे मजबूत प्रदर्शन रहा है। इस दौरान जारी राशि सालाना आधार पर 22 प्रतिशत बढ़कर 60,000 करोड़ रुपये हो गई है। क्रिसिल रेटिंग्स ने एक रिपोर्ट में यह कहा है। एजेंसी ने कहा है कि इसमें 98 प्रतिशत से ज्यादा राशि एनबीएफसी से आई है, जबकि इसके पहले बैंकों का लेनदेन अधिक होता था।
सिक्योरिटाइज्ड असेट क्लास में भी उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला है। वाहन ऋण को पीछे छोड़ते हुए गोल्ड लोन पहले स्थान पर आ गया है। इस तिमाही के दौरान कुल सिक्योरिटाइजेशन में गोल्ड लोन का हिस्सा लगभग 31 प्रतिशत रहा, जबकि वाहन ऋणों का हिस्सा घटकर लगभग 26 प्रतिशत रह गया।
गोल्ड लोन सिक्योरिटाइजेशन में वृद्धि के साथ एक बड़े निजी बैंक की सुस्त गतिविधि के कारण रिटेल मॉर्गेज बैक्ड सिक्योरिटाइजेशन (एमबीएस) इश्युएंस सालाना आधार पर 900 आधार अंक घटकर 12 प्रतिशत रह गया। इस निजी बैंक ने पिछले साल की इसी अवधि में महत्त्वपूर्ण एमबीएस जारी किए थे।