ब्रिटेन के ऋणदाता स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक ने पिछले एक साल में भारत में अपनी शाखाओं की संख्या 100 से घटाकर 80 कर दी है। बैंक अब वेल्थ मैनेजमेंट जैसी सलाहकार सेवाओं पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। सूत्रों ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को इसकी जानकारी दी। इसके बावजूद अपनी सहायक इकाई के तौर पर व्यवसाय करने का रास्ता अख्तियार नहीं करने वाले विदेशी ऋणदाताओं में स्टैंडर्ड चार्टर्ड के पास शाखाओं का सबसे बड़ा नेटवर्क है।
सूत्रों के मुताबिक बैंक ने आसपास सटी कुछ शाखाओं को एकीकृत कर अपनी मौजूदगी को व्यवस्थित किया है और कई ऐसी शाखाओं को बंद किया गया है जो किसी शहर में एकल शाखा थी। दिलचस्प है कि स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने शाखा बंद करने के बाद बैंकिंग नियामक को शाखा लाइसेंस सरेंडर नहीं किए हैं।
बैंक से जुड़े सूत्र ने कहा, ‘कुछ शाखाएं बंद कर दी गई हैं। हम लाइसेंस की समीक्षा कर रहे हैं कि क्या उन्हें कहीं और इस्तेमाल किया जा सकता है।’
बिज़नेस स्टैंडर्ड के एक सवाल के जवाब में स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने कहा कि बैंक भारत में परिसंपत्ति प्रबंधन और अमीर ग्राहकों के सेगमेंट पर ध्यान केंद्रित कर रहा है और उसे बेहतर बना रहा है। बदलते माहौल और ग्राहकों की जरूरतों को देखते हुए बैंक अब एक-उत्पाद से हटकर बहु-उत्पाद संबंध की ओर बढ़ रहा है।
बैंक ने कहा, ‘इस रणनीति में मौजूदा शाखाओं को दूसरी जगह ले जाने या उन्हें एक साथ मिलाने के लिए जगह की उपयुक्तता का आकलन करना भी शामिल है। उदाहरण के लिए हम मौजूदा शाखाओं में प्राथमिकता केंद्र नेटवर्क का विस्तार कर रहे हैं। 2026 के आखिर तक इनकी संख्या मौजूदा 20 से बढ़ाकर लगभग 30 कर दी जाएगी।’
बैंक ने बयान में कहा है, ‘हम अपने वेल्थ, एसएमई और धनाढ्य ग्राहकों के बैंकिंग व्यवसाय को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम मौजूदा शाखाओं में बड़े आकार के प्राथमिक बैंकिंग केंद्र खोलने, टेक्नॉलोजी का इस्तेमाल करने और रिलेशनशिप मैनेजरों की संख्या बढ़ाने में निवेश करना जारी रखेंगे ताकि अपने ग्राहकों को वैश्विक नजरिया और एक अलग अनुभव दे सकें।’
पिछले कुछ वर्षों में स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने भारत में अपने कामकाज से जुड़ी संपत्तियां बेच रहा है। सबसे पहले उसने अपना पर्सनल लोन का कारोबार कोटक महिंद्रा बैंक को बेच दिया। इस सौदे में मानक परिसंपत्तियों के तहत लगभग 4,100 करोड़ रुपये के बकाया ऋण शामिल थे। इस साल अप्रैल में स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने फेडरल बैंक को 4,50,000 कार्ड ग्राहक बेचने का फैसला किया।
हालांकि विदेशी ऋणदाता ने कार्ड कारोबार को पूरी तरह से नहीं छोड़ा है क्योंकि उसके पास अभी भी बहु-उत्पाद संबंधों के लिए 1,50,000 से 2,50,000 कार्ड हैं। उम्मीद है कि यह सौदा अगले 3-6 महीनों में पूरी हो जाएगी।
पिछले कुछ वर्षों में शाखा नेटवर्क के जरिये काम करने वाले कई विदेशी ऋणदाता ने मॉर्गेज और असुरक्षित ऋण जैसे क्षेत्रों में घरेलू बैंकों से कड़ी टक्कर के बीच उपभोक्ता कारोबार से बाहर निकलने का फैसला किया। 2023 में सिटी ने अपने भारत के उपभोक्ता कारोबार जिसमें उपभोक्ता ऋण, क्रेडिट कार्ड, रिटेल बैंकिंग और परिसंपत्ति प्रबंधन शामिल हैं, को ऐक्सिस बैंक को 11,603 करोड़ रुपये में बेच दिया था।
पिछले महीने डॉयचे बैंक ने अपना भारत में रिटेल बैंकिंग, अमीर ग्राहकों के लिए प्राइवेट बैंकिंग और परिसंपत्ति प्रबंधन कारोबार कोटक महिंद्रा बैंक को 282 करोड़ रुपये में बेचने का फैसला किया।
कई विदेशी ऋणदाता भारत में अपना कारोबार समेट रहे हैं, वहीं एचएसबीसी ने 2025 में एक अलग तरह का फैसला लिया। उसने अमृतसर, भोपाल, भुवनेश्वर, नवी मुंबई और तिरुवनंतपुरम जैसे अहम शहरों में अपनी मौजूदा 26 शाखाओं के अलावा 20 नई शाखाएं खोलने का फैसला किया। इससे पहले 2016 में उसने भारत में अपनी शाखाओं की संख्या 50 से घटाकर 26 कर दी थी।