सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) को तेजी से बढ़ते गोल्ड लोन पोर्टफोलियो द्वारा समर्थित प्राथमिकता क्षेत्र ऋण प्रमाण पत्रों (पीएसएलसी) की बिक्री से बेहतरीन मुनाफा हुआ है। वित्त वर्ष 26-27 की अप्रैल-जून तिमाही (वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही) में कई ऋणदाताओं के गैर ब्याज आय में तेज वृद्धि हुई है।
एक सरकारी बैंक के वरिष्ठ बैंकर ने कहा, ‘इस समय सोना सबसे लाभदायक ऋण सेग्मेंट है। पीएसएलसी की बिक्री से सरकारी बैंक मुनाफा कमा रहे है। कुछ सरकारी बैंक गोल्ड लोन कारोबार में सक्रिय हैं, जिनके मुनाफे में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है।’
पीएसएलसी के माध्यम से बैंक अंतर्निहित ऋण संपत्तियों को स्थानांतरित किए बगैर प्राथमिकता क्षेत्र के ऋण दायित्वों को खरीद और बेच सकते हैं। प्राथमिकता के क्षेत्र के ऋण लक्ष्य पार कर चुके बैंक उन ऋणदाताओं को अधिशेष प्रमाणपत्र बेच सकते हैं, जिन्होंने अपना लक्ष्य पूरा नहीं किया है। इस प्रक्रिया में उन्हें शुल्क आय होती है।
भारतीय रिजर्व बैंक के मानदंडों के तहत वाणिज्यिक बैंकों, लघु वित्त बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सहकारी बैंकों को अपने समायोजित शुद्ध बैंक क्रेडिट (एएनबीसी) का कम से कम 40 प्रतिशत प्राथमिकता क्षेत्रों को उधार देना आवश्यक है।
इंडियन ओवरसीज बैंक (आईओबी) ने बताया कि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में बैंक की पीएसएलसी कमीशन से आमदनी पिछली तिमाही (वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही) के 48 करोड़ रुपये से 1,697.92 प्रतिशत बढ़कर 863 करोड़ रुपये हो गई। पिछले साल की समान अवधि के 199 करोड़ रुपये की तुलना में कमीशन से आमदनी सालाना आधार पर 333.67 प्रतिशत बढ़ी है। इस वृद्धि की वजह से बैंक की गैर ब्याज आय पहली तिमाही में 2,160 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जो पिछली तिमाही (वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही) के 1,291 करोड़ रुपये से 67.31 प्रतिशत और पिछले साल की समान अवधि के 1,481 करोड़ रुपये से 45.85 प्रतिशत अधिक है।
इंडियन ओवरसीज बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी अजय कुमार श्रीवास्तव ने बैंक के परिणाम घोषणा के बाद कहा, ‘गैर-ब्याज आय में 45.85 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो मुख्य रूप से पीएसएलसी की बिक्री और तकनीकी रूप से बट्टे खाते में डाले गए खातों की वसूली के साथ-साथ सामान्य गैर-ब्याज आय की वजह से है।’ वहीं सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने तिमाही के दौरान 2,000 करोड़ रुपये के पीएसएलसी की बिक्री की, क्योंकि उसका कुल प्राथमिकता क्षेत्र का ऋण नियामकीय जरूरतों से 40 प्रतिशत से बहुत अधिक 58 प्रतिशत था। कमजोर वर्गों को ऋण एएनबीसी का 17.35 प्रतिशत था, जो अनिवार्य 12 प्रतिशत के मुकाबले अधिक है। वहीं बैंक का कृषि ऋण न्यूनतम 18 प्रतिशत के मुकाबले 22.41 प्रतिशत था।
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी रजनीश कर्नाटक ने तिमाही परिमाम के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि बैंक ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में पीएसएलसी की बिक्री से 250 करोड़ रुपये कमाए हैं। बैंकर्स ने कहा कि पीएसएलसी आय में वृद्धि मुख्य रूप से गोल्ड लोन पोर्टफोलियो के तेजी से वृद्धि की वजह से है। ऋणदाताओं को अपने प्राथमिकता क्षेत्र के ऋण लक्ष्यों को पार करने और बिक्री के लिए अधिशेष प्रमाणपत्र बेचने के कारण उन्हें लाभ हुआ।
एक अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के एक वरिष्ठ बैंकर ने कहा, ‘हमने इस तिमाही में पीएसएलसी बिक्री के माध्यम से अच्छा लाभ कमाया है। सोने का व्यवसाय वर्तमान में बहुत लाभदायक है