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पाइप निर्माताओं पर लॉकडाउन की चोट

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Last Updated- December 12, 2022 | 2:37 AM IST

एक्सचेंजों पर सूचीबद्घ प्लास्टिक पाइप कंपनियों का प्रदर्शन पिछले साल के दौरान शानदार रहा। कई कंपनियों के शेयरों ने निवेशकों का पैसा इस अवधि के दौरान दोगुना किया। जहां बाजार पूंजीकरण के लिहाज से सबसे बड़ी सूचीबद्घ कंपनी एस्ट्रल पाइप्स में एक साल पहले के स्तरों से 3 गुना का इजाफा दर्ज किया गया, वहीं प्रतिफल के मोर्चे पर बड़़ी सफलता प्रिंस पाइप्स ऐंड फिटिंग्स को मिली। देश में छठी सबसे बड़ी पाइप निर्माता का शेयर पिछले साल के दौरान सात गुना बढ़ गया। इस सेक्टर ने पिछले साल के दौरान रेटिंग में बड़ा सुधार दर्ज किया है और उसे ऊंची वृद्घि की उम्मीदों, शानदार मार्जिन, और प्रमुख कंपनियों के लिए बाजार भागीदारी में मजबूती से मदद मिली।
जहां 40,000 करोड़ रुपये की पूंजी वाले इस सेक्टर का दीर्घावधि विकास परिदृश्य मजबूत बना हुआ है, वहीं अल्पावधि विकास कारकों का अभाव दिख रहा है। पिछली कुछ तिमाहियों के दौरान मजबूत प्रदर्शन के बाद इस सेगमेंट में तिमाही आधार पर गिरावट आने की आशंका है और इसे कम बिक्री के साथ साथ कमजोर मार्जिन का सामना करना पड़ सकता है। जहां प्रमुख कंपनियां न्यून आधार की मदद से सालाना आधार पर मजबूत वृद्घि दर्ज करेंगी, वहीं तिमाही आधार पर राजस्व 30 प्रतिशत और 50 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना है।
बिक्री और राजस्व पर प्रभाव काफी हद तक कृषि क्षेत्र में कमजोर मांग की वजह से दिखा है, क्योंकि यह प्लम्बिंग और निर्माण सेगमेंटों के बाद सबसे बड़ा उपभोक्ता सेगमेंट है। महामारी-केंद्रित समस्याओं और लॉकडाउन की वजह से अप्रैल और मई के दौरान कृषि उत्पादों के लिए कमजोर मांग को बढ़ावा दिया। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के राजेश रवि और सौरभ डुगार का कहना है, ‘चूंकि पीवीसी कीमतों में नरमी आनी शुरू हो गई है, जिससे पाइप कीमतों में गिरावट को बढ़ावा मिल रहा है, भले ही वितरकों ने खरीदारी टाल दी है। इससे वित्त वर्ष 2021-22 के लिए जून तिमाही की बिक्री प्रभावित हुई है।’
इससे मुनाफे पर बड़ा प्रभाव दिखेगा। रिलायंस सिक्योरिटीज में वरिष्ठ शोध विश्लेषक अराफात सैयद का कहना है, ‘परिचालन मुनाफा मार्जिन तिमाही आधार पर 550 आधार अंक तक घटने का अनुमान है, क्योंकि पीवीसी कीमतों में ऊंचे स्तरों से 20 प्रतिशत की गिरावट को देखते हुए ऊंचा मार्जिन बरकरार रहने की संभावना नहीं है।’ उतार-चढ़ाव की मात्रा का अंदाजा इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि प्रिंस पाइप्स का मार्जिन जहां वित्त वर्ष 2021 की चौथी तिमाही में 19.3 प्रतिशत पर था, वहीं वित्त वर्ष 2022 की पहली तिमाही में यह करीब 900 आधार अंक तक घटकर 10 प्रतिशत रह जाने का अनुमान है।
12 मई के अपने ऊंचे स्तरों से, पीवीसी रेसिन कीमतें 19 रुपये प्रति किलोग्राम तक घटकर 119 रुपये किलोग्राम रह गई हैं जिससे कंपनियों की प्राप्तियां प्रभावित होंगी। जेएम फाइनैंशियल के विश्लेषकों का कहना है कि प्लास्टिक पाइप कंपनियों द्वारा वित्त वर्ष 2022 की पहली तिमाही में इन्वेंट्री नुकसान दर्ज किए जाने की संभावना है, जबकि वित्त वर्ष 2021 की तीसरी और चौथी तिमाही में उन्हें इन्वेंट्री लाभ मिला। जहां ये दबाव बरकरार रह सकते हैं, वहीं विश्लेषकों को वैश्विक आपूर्ति शृंखला और व्यापार में समस्याओं की वजह से कीमतें स्थिर बने रहने की संभावना है। कच्चे माल की कीमत में उतार-चढ़ाव इस क्षेत्र के लिए प्रमुख कारक है, क्योंकि इसका कुल बिक्री में 60 प्रतिशत का योगदान है।
इन कंपनियों पर दबाव की भरपाई तभी की जा सकती है जब वे क्लोरिनेटेड पीवीसी पाइप और फिटिंग उत्पादों की बढ़ती भागीदारी के साथ ज्यादा मार्जिन वाले व्यवसायों पर ध्यान केंद्रित करें। मौजूदा समेकन से भी मदद मिलने की संभावना है। सैंक्टम वेल्थ मैनेजमेंट के शोध निदेशक आशिष चतुरमोहता का कहना है कि प्रमुख पांच कंपनियों का योगदान वित्त वर्ष 2012 के 22 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2021 में करीब 37 प्रतिशत पर पहुंच गया। उनका कहना है कि प्रमुख संगठित कंपनियों को लगातार बाजार भागीदारी बढ़ाने और बेहतर प्राप्तियों में मदद मिलेगी।
कमजोर पहली तिमाही के बावजूद, विश्लेषक इस सेक्टर के परिदृश्य को लेकर उत्साहित हैं। जिहां यह सेक्टर वित्त वर्ष 2021 तक पिछले पांच साल के दौरान 10 प्रतिशत की दर से बढ़ा है, वहीं वित्त वर्ष 2025 तक इसके 12 प्रतिशत की तेज गति से बढऩे की संभावना है। रिलायंस सिक्योरिटीज के सैयद का कहना है, ‘जल जीवन मिशन पर सरकार के जोर, कृषिगत ऋण में वृद्घि, और ग्रामीण बुनियादी ढांचा विकास कोष के लिए आवंटन में वृद्घि घरेलू पीवीसी पाइप कंपनियों के लिए अच्छा संकेत हैं। हमें अगले दो-तीन साल के दौरान बिक्री की रफ्तार मजबूत बने रहने की संभावना है।’
जहां चार प्लास्टिक पाइप कंपनियों में से दो के शेयर पिछले वर्ष के दौरान मजबूत रहे, वहीं इनमें अल्पावधि तेजी सीमित रह सकती है। जहां राजस्व वृद्घि की रफ्तार निर्माण और कृषिगत मांग में सुधार पर निर्भर करेगी, वहीं मार्जिन सीमित दायरे में बना रहेगा। निवेशक भारी गिरावट पर इन शेयरों पर विचार कर सकते हैं।

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First Published - July 18, 2021 | 11:21 PM IST

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