वित्त-बीमा

IBBI का नया प्रस्ताव: अब कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स को रिकॉर्ड करना होगा हर फैसला, IBC में बढ़ेगी पारदर्शिता

दीवाला नियामक ने कहा कि प्रस्तावित संशोधनों से लेनदारों का निरीक्षण मजबूत होगा और आईबीसी का प्रक्रिया संबंधी अनुशासन बेहतर होगा

Published by
रुचिका चित्रवंशी   
Last Updated- February 17, 2026 | 10:57 PM IST

भारतीय दीवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) ने एक चर्चा पत्र में सुझाव दिया है कि कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (सीओसी) को उचित मूल्य और परिसमापन मूल्य की तुलना में लेनदारों के लिए अपेक्षित वसूली पर अपने विचार-विमर्श को दर्ज करना चाहिए। आईबीबीआई ने कहा है कि सीओसी को यह भी रिकॉर्ड करना चाहिए कि क्या कॉरपोरेट दीवाला समाधान प्रक्रिया के दौरान की गई बाजार खोज पर्याप्त थी और क्या चैलेंज मैकेनिज्म या योजनाओं को फिर से आमंत्रित करने जैसे तंत्रों का संबंधित नियमों के मुताबिक उपयोग किया गया था या नहीं।

इन उपायों से आईबीसी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता आने की उम्मीद है और इससे सीओसी के मूल्यांकन और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं की मजबूती के संबंध में टाले जा सकने वाले विवादों से बचने में मदद मिलेगी।

आईबीबीआई ने प्रस्ताव दिया है कि समिति को समाधान आवेदक की क्षमता और विश्वसनीयता व धन की उपलब्धता सहित समाधान योजना के कार्यान्वयन की निश्चितता पर विचार-विमर्श का रिकॉर्ड बनाना चाहिए।

दीवाला नियामक ने कहा कि प्रस्तावित संशोधनों से लेनदारों का निरीक्षण मजबूत होगा और आईबीसी का प्रक्रिया संबंधी अनुशासन बेहतर होगा।

आईबीबीआई ने आगे प्रस्ताव दिया है कि सीओसी के लिए अपनी पहली बैठक में दीवाला प्रक्रिया से गुजर रही कंपनी की एक संरचित गोइंग कंसर्न असेसमेंट रिपोर्ट रखना अनिवार्य किया जाए। आईबीबीआई ने अपने चर्चा पत्र में कहा, ‘इस आकलन में अन्य बातों के साथ-साथ संचालन की वित्तीय व्यवहार्यता, अनुमानित आय, व्यय और संबंधित नकदी प्रवाह, कार्यशील पूंजी की जरूरतें और संचालन के जारी रहने या निलंबित होने से होने वाले मूल्य ह्रास के जोखिमों की जांच की जाएगी।’

 बोर्ड ने प्रस्तावित संशोधनों में विलंबित दावों के संदर्भ में सीओसी की भूमिका को स्पष्ट करने की बात की है। इसमें कहा गया है कि समाधान पेशेवरों द्वारा स्वीकार्य पाए गए सभी विलंबित दावों को ऐसे दावों की प्राप्ति के एक सप्ताह के भीतर निर्णय लेने वाले प्राधिकारी के समक्ष रखा जाएगा, और समाधान योजना में उनके उपचार के बारे में केवल अपनी सिफारिश के लिए सीओसी के समक्ष रखा जाएगा।

आईबीबीआई ने कहा कि यह फैसला से भविष्यम में परिचालन वाले दीवाला समाधान प्रक्रिया की लागत के लिए वाणिज्यिक आधार बनेगा।

बोर्ड ने प्रस्तावित बदलावों में देरी से किए गए क्लेम के मामले में सीओसी की भूमिका को साफ करने को कहा है। इसने कहा है कि समाधान पेशेवर द्वारा स्वीकार किए गए देरी से हुए दावों के मामले में दावे मिलने के एक सप्ताह के भीतर अधिकृत प्राधिकारी के सामने रखा जाएगा।

आईबीबीआई ने संबंधित ऑपरेशनल क्रेडिटर्स को सीओसी में हिस्सा लेने से बाहर रखने का भी प्रस्ताव दिया है। हालांकि अगर ऐसे गैर संबंधित ऑपरेशनल क्रेडिटर्स की संख्या 18 से कम है, तो आईबीबीआई ने कहा है कि कमेटी ऐसे सभी अनरिलेटेड ऑपरेशनल क्रेडिटर्स को सीओसी में शामिल करेगी।

आईबीबीआई ने 10 मार्च, 2026 तक अपने चर्चा पत्र पर सार्वजनिक टिप्पणियां मांगी हैं।

आईबीसी के तहत सीओसी में दीवाला मामलों में फाइनैंशियल क्रेडिटर्स शामिल होते हैं और इसमें ऑपरेशनल क्रेडिटर्स भी शामिल हो सकते हैं, जिनके मतदान का अधिकार और साझेदारी सीमित होती है।  अगस्त 2024 में आईबीबीआई ने स्वनियामक दिशानिर्देश पेश किए थे। इसके तहत सीओसी को फैसला लेने की प्रक्रिया के दौरान ईमानदारी, गोपनीयता, वस्तुनिष्ठता बनाए रखनी थी और हित के टकराव की किसी भी स्थिति का खुलासा करना था।

First Published : February 17, 2026 | 10:57 PM IST