Representational Image
साल 2026 में भी बॉन्ड बाजार पर दबाव बने रहने की आशंका है क्योंकि भारी आपूर्ति (विशेष रूप से राज्य सरकार की प्रतिभूतियों की) से ब्याज दरें ऊंची बनी रहेंगी। ब्याज दरों में कटौती का दौर लगभग समाप्त हो चुका है, ऐसे में बेंचमार्क 10 वर्षीय ब्याज दर निकट भविष्य में 6.50 फीसदी से 6.75 फीसदी के दायरे में रहने की संभावना है और उसके बाद इसमें और वृद्धि हो सकती है। वैश्विक बॉन्ड सूचकांक में शामिल होने या उधार लेने की समय-सारणी में किए गए बदलावों से मिलने वाला समर्थन मामूली होगा, न कि यह कोई बड़ा बदलाव लाने वाला होगा। बाजार के जानकारों ने ये बातें कही।
दूसरी ओर, रुपया (जो 2025 में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली एशियाई मुद्रा है) मार्च तिमाही में मौसमी रूप से मजबूत चालू खाता स्थिति और अपेक्षित प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के कारण निकट भविष्य में मामूली रूप से मजबूत होने की संभावना है। हालांकि, बाजार के विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए उच्च शुल्क और अनिश्चित वैश्विक निवेश से उत्पन्न चुनौतियों के कारण यह बढ़त सीमित रह सकती है। 2026 के लिए समग्र दृष्टिकोण कुछ हद तक हालांकि सकारात्मक बना हुआ है, लेकिन मुद्रा मामूली गिरावट के साथ साल की समाप्ति कर सकता है, जो इसकी सामान्य वार्षिक गिरावट करीब 3 फीसदी से काफी कम होगी। उत्तरार्ध में मुद्रा की स्थिति व्यापार समझौतों, केंद्रीय बजट और पूंजी निवेश की गतिशीलता पर निर्भर करेगी।
आईसीआईसीआई बैंक के ट्रेजरी और आर्थिक अनुसंधान प्रमुख शैलेंद्र झिंगन ने कहा, निकट भविष्य में रुपये को लेकर नजरिया कुछ सकारात्मक है। चालू खाता के परिप्रेक्ष्य से चौथी तिमाही आम तौर पर सकारात्मक है और इस साल अमेरिका द्वारा लगाए गए उच्च टैरिफ के रूप में कुछ चुनौतियां होंगी, फिर भी समग्र स्थिति में सुधार हो रहा है। हमारा मानना है कि अगले साल रुपये का अवमूल्यन सामान्य 3 फीसदी से कम हो सकता है, जो निकट भविष्य के लिए सकारात्मक है, लेकिन साल के अंत तक मामूली अवमूल्यन होगा और मार्च के अंत तक रुपये का स्तर डॉलर के मुकाबले करीब 90 के आसपास रहेगा।
बॉन्ड के बारे में उन्होंने कहा, आपूर्ति बहुत अधिक रहने के कारण (खासकर सरकारी ऋणों के मामले में) अगले साल भी चुनौतियां बनी रहेंगी। हम ब्याज दर चक्र के अंत में हैं और संभवतः अब और कटौती नहीं होगी, इसलिए बॉन्ड यील्ड में थोड़ी वृद्धि हो सकती है। निकट भविष्य में 10 वर्षीय यील्ड 6.5 फीसदी से 6.75 फीसदी के दायरे में रह सकती है। सूचकांक में शामिल होने से मामूली सहायता मिल सकती है, लेकिन कोई खास नहीं और अगर आगे कोई ब्याज दर कटौती नहीं होती है तो यील्ड कर्व का स्वाभाविक झुकाव तेजी से बढ़ने की ओर होगा।
चालू वर्ष में बेंचमार्क 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड पर यील्ड 6.59 फीसदी पर स्थिर रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में 17 आधार अंक कम है। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति द्वारा वर्ष के दौरान 125 आधार अंकों की दर कटौती के बावजूद आपूर्ति दबाव के कारण बॉन्ड यील्ड उच्च बनी रही।
आरबीआई द्वारा ओपन मार्केट ऑपरेशंस और स्वैप ऑक्शन के माध्यम से नकदी को समर्थन देने के बावजूद इसका असर बॉन्ड बाजार पर नहीं दिखा है। पिछले कैलेंडर वर्ष में बेंचमार्क बॉन्ड पर यील्ड में 41 आधार अंकों की गिरावट आई थी।
अमेरिकी व्यापार समझौते में देरी और विदेशी मुद्रा की निकासी के दबाव के चलते रुपया साल भर में 4.74 फीसदी गिरकर 89.88 प्रति डॉलर पर आ गया। 2024 में डॉलर के मुकाबले रुपये में 2.8 फीसदी की गिरावट आई थी। 2025 रुपये के लिए 2022 के बाद सबसे खराब साल रहा, जब यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद डॉलर के मुकाबले रुपये में 10 फीसदी से अधिक की गिरावट आई थी।
इस वर्ष स्थानीय मुद्रा में भारी गिरावट आई और यह एशियाई मुद्राओं में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में से एक बनकर उभरी। यह कमजोरी अमेरिकी व्यापार नीतियों को लेकर अनिश्चितता, अमेरिका और जापान जैसे विकसित बाजारों में लगातार उच्च ब्याज दरें (कैरी ट्रेड पूंजी का एक प्रमुख स्रोत) और विदेशी निवेशकों (एफआईआई) की निरंतर निकासी के कारण उत्पन्न हुई, क्योंकि वैश्विक पूंजी उच्च प्रतिफल वाले बाजारों की ओर आकर्षित हो रही थी। रुपये का मूल्य लगभग 91 के निचले स्तर तक पहुंच गया, लेकिन आरबीआई द्वारा डॉलर की बिक्री के माध्यम से किए गए मजबूत हस्तक्षेप के कारण यह 90 से नीचे आ गया। करूर वैश्य बैंक के ट्रेजरी प्रमुख वी आर सी रेड्डी ने कहा, नए साल में प्रवेश करते ही भारत-अमेरिका के बीच अनुकूल व्यापारिक माहौल, एफआईआई के संभावित पुनरागमन और भुगतान संतुलन की मजबूत स्थिति से 2026 में रुपये की मजबूती को समर्थन मिलने की संभावना है।