भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा कि रिजर्व बैंक गैरबैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को ऊपरी स्तर, मध्यम स्तर और निचले स्तर में वर्गीकृत करने के लिए नया ढांचा पेश करने की तैयारी कर रहा है। मल्होत्रा ने कहा, ‘हम बहुत जल्द एनबीएफसी के लिए एक नया ढांचा लेकर आ रहे हैं। एनबीएफसी को ऊपरी, मध्य, निचले स्तर में वर्गीकृत करने के लिए नया ढांचा आएगा।’
मौजूदा समय में एनबीएफसी को सूचकांक आधारित विनियमन (एसआरबी) ढांचे के तहत वर्गीकृत किया जाता है। इस ढांचे को अक्टूबर 2021 में अपनाया गया था। इस क्रम में एनबीएफसी को चार स्तर बुनियादी, मध्यम, उच्च और शीर्ष में वर्गीकृत किया गया है। यह वर्गीकरण एनएबीएफसी के आकार, प्रणालीगत महत्त्व और जोखिम प्रोफाइल के आधार पर है।
इस ढांचे के तहत रिजर्व बैंक परिसंपत्ति आकार और स्कोरिंग पद्धति के आधार पर ऊपरी स्तर (एनबीएफसी-यूएल) में आने वाली एनबीएफसी की समय-समय पर पहचान भी करता है। वर्ष 2024-25 की इस सूची की बड़ी कंपनियों में बजाज फाइनैंस, श्रीराम फाइनैंस, टाटा कैपिटल, आदित्य बिरला फाइनैंस और महिंद्रा ऐंड महिंद्रा फाइनैंशियल सर्विसेज आदि हैं।
इस सूची में हाउसिंग फाइनैंस कंपनियां जैसे एलआईसी हाउसिंग फाइनैंस और पीएनबी हाउसिंग फाइनैंस के साथ-साथ निवेश इकाइयां जैसे टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड हैं। ऐसी कंपनियों का ऊपरी परत में शामिल होना इस स्तर की विविधता भी दर्शाता है।
एनबीएफसी को देनदारी संरचना, जमा लेने वाली और जमा न लेने वाली और गतिविधि के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। इसमें निवेश और क्रेडिट कंपनियां, हाउसिंग फाइनैंस कंपनियां, सूक्ष्म वित्त संस्थान और अन्य कंपनियां शामिल हैं।
रिजर्व बैंक (फरवरी, 2026 तक) ने सार्वजनिक धन के बिना, ग्राहक इंटरफेस के बिना और 1,000 करोड़ रुपये से कम की संपत्ति वाली छोटी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को पंजीकरण से छूट देने का भी प्रस्ताव पेश किया है। पात्र एनबीएफसी नियामक अनुपालन को कम करने के लिए 30 सितंबर, 2026 तक प्रवाह पोर्टल के माध्यम से स्वैच्छिक अपंजीकरण के लिए आवेदन कर सकती हैं।