इस बार के बजट में आयकर रिटर्न दाखिल करने का एक नया तरीका पेश किया गया, जिसे ‘अपडेटेड रिटर्न’ कहा गया है। इसके लिए आयकर अधिनियम की धारा 139 में 8(ए) नाम की एक नई उपधारा जोड़ी गई है। यह योजना 1 अप्रैल 2022 से लागू हो चुकी है और अभी तक 75,000 से ज्यादा ‘अपडेटेड रिटर्न’ दाखिल भी किए जा चुके हैं।
प्रिवी लीगल सर्विस एलएलपी के मैनेजिंग पार्टनर मोइज रफीक कहते हैं,‘अपडेटेड रिटर्न करदाताओं को पिछली बार दाखिल किए गए ‘रिटर्न’ में हुई भूल-चूक और गलती सुधारने का मौका देता है। यदि करदाता पिछली बार समय पर रिटर्न दाखिल नहीं कर पाए थे तो उन्हें रिटर्न दाखिल करने का मौका भी इससे मिलता है।’
क्या है मामला
अपडेटेड रिटर्न योजना के तहत कोई करदाता आकलन की तारीख से 2 साल तक भरे गए ‘रिटर्न’ में सुधार कर सकता है। इसके लिए उसे कुछ जुर्माना भी अदा करना होगा। एक साल के भीतर ‘अपडेटेड रिटर्न’ दाखिल करने पर 25 फीसदी जुर्माना लगेगा और 2 साल में दाखिल करने पर 50 फीसदी जुर्माने का भुगतान करना होगा। पीएसएल एडवोकेट्स एंड सॉलिसिटर्स के असोसिएट पार्टनर शोएब कुरैशी कहते हैं, ‘ध्यान रहे कि अपडेटेड रिटर्न दाखिल करने से नुकसान होता है या कर देनदारी में कमी आती है तो इस प्रावधान के इस्तेमाल की इजाजत नहीं होगी। वित्त वर्ष 2021-22 के लिए अपडेटेड रिटर्न 31 मार्च 2025 तक ही दाखिल किया जा सकता है। रफीक बताता हैं कि अपडेटेड रिटर्न भरने के लिए अलग से एक आयकर फॉर्म ‘यू’ है।’
अतिरिक्त आय
करदाता अपनी अतिरिक्त आय की घोषणा करने के लिए ही अपडेटेड रिटर्न दाखिल कर सकता है। यदि वह आय का जिक्र पहले करना भूल गया था और उस आय पर उसे अतिरिक्त कर भी अदा करना है तो अपडेटेड रिटर्न उसी के लिए है।
अपडेटेड रिटर्न और संशोधित रिटर्न को एक जैसा न समझें क्योंकि दोनों अलग-अलग हैं। संशोधित रिटर्न वही व्यक्ति दाखिल कर सकता है, जिसने समय पर अपना रिटर्न दाखिल किया था। साथ ही यह रिटर्न वित्त वर्ष खत्म होने के नौ महीने के भीतर ही दाखिल किया जा सकता है। यदि करदाता के पास संशोधित रिटर्न दाखिल करने का मौका नहीं बचा है यानी समय खत्म हो गया है तो वह अपडेटेड रिटर्न ही दाखिल कर सकता है। वेद जैन एंड असोसिएट्स के पार्टनर अंकित जैन कहते हैं, ‘जिन करदाताओं ने तय समय के बाद यानी बिलेटेड रिटर्न दाखिल किया है, वे संशोधित रिटर्न दाखिल नहीं कर सकते। उनके पास अपडेटेड रिटर्न दाखिल करने का ही विकल्प है।’
लाभ एक ही बार
यदि किसी करदाता के खिलाफ आकलन की कार्यवाही, तलाश और सर्वे चल रहे हैं तो वह अपडेटेड रिटर्न दाखिल करने का पात्र नहीं है। अपडेटेड रिटर्न केवल एक ही बार दाखिल किया जा सकता है। जैन कहते हैं, ‘यदि किसी व्यक्ति ने एक बार अपडेटेड रिटर्न दाखिल कर दिया है तो वह दोबारा इसे दाखिल नहीं कर सकता है।
कार्रवाई से बचें
अपडेटेड रिटर्न दाखिल करते हुए एक करदाता अपनी उस आय का खुलासा कर सकता है, जिसे वह पिछली बार बताना भूल गया था। विक्टोरियम लीगलिस-एडवोकेट्स ऐंड सॉलिसिटर्स में असोसिएट अनन्या गुप्ता कहती हैं, ‘यह भविष्य में कानूनी कार्यवाही और मुकदमेबाजी से राहत देगा। इससे मुकदमे में कमी आएगी।
आज के समय में कर प्राधिकरण कई स्रोतों से आय से संबंधित जानकारी हासिल कर सकता है। यदि कोई व्यक्ति अपनी किसी तरह की आय की घोषणा करने में विफल रहता है तो कर प्राधिकरण उस व्यक्ति को दोषी मान सकता है।
जैन कहते हैं, ‘इस तरह के मामले में करदाता को अघोषित आय पर लगने वाले कर का 300 फीसदी तक भुगतान जुर्माने के रुप में करना पड़ सकता है। अपडेटेड रिटर्न करदाता को इस तरह की आय का खुलासा करने का अवसर देता है। यह योजना करदाता को बहुत कम खर्च में कानून का अनुपालन करने का अवसर भी देती है।’
कभी ऐसा भी होता है कि आप किसी निश्चित वर्ष के लिए रिटर्न दाखिल करने की तैयारी कर रहे होते हैं और पता चलता है कि आप पिछले वर्ष के रिटर्न में अपनी किसी आय की घोषणा करना भूल गए थे। अभी तक इस स्थिति में करदाता के पास रिटर्न में सुधार करने का कोई विकल्प नहीं था और उसे दोषी बनना पड़ता था। अब उसके पास मौका है।
जैन कहते हैं,‘मगर याद रखें कि अपडेटेड रिटर्न के माध्यम से आप कर देनदारी बढ़ा ही सकते हैं। अपडेटेड रिटर्न दाखिल करके आप घाटे, कर में अतिरिक्त कटौती और अतिरिक्त धनवापसी का दावा नहीं कर सकते हैं।’
सतर्क रहें
दाखिल किए गए रिटर्न में सुधार का केवल एक ही अवसर है। इसलिए अपडेटेड रिटर्न दाखिल करते हुए अच्छी तरह से जांच ले कि आप किसी भी तरह की आय की घोषणा करना तो नहीं भूले हैं।
अंत में गुप्ता कहते हैं, ‘इस प्रावधान का प्रयोग करते हुए आयकर की धारा 139(8ए) के तहत अपडेटेड रिटर्न दाखिल करने पर प्राधिकरण आपके खिलाफ कोई मुकदमा दाखिल नहीं करेगा यह अभी तक स्पष्ट नहीं है।’