प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति की बैठक से पहले इस हफ्ते सरकारी बॉन्ड की यील्ड में कमी आने की उम्मीद है। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के मजबूत आंकड़ों को देखते हुए शुक्रवार को होने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में रीपो दर पर भले ही यथास्थिति बनी रहे मगर सरकारी बॉन्ड की खरीद के लिए ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) कैलेंडर की घोषणा की उम्मीद बढ़ गई है।
बाजार को उम्मीद है कि आरबीआई मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक के ओएमओ की घोषणा कर सकता है।
वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 8.2 फीसदी रही जिससे पहली छमाही में वृद्धि दर 8 फीसदी पहुंच गई। विनिर्माण, निर्माण और सेवा क्षेत्रों में आई तेजी के कारण जीडीपी में मजबूत वृद्धि देखी गई। दिलचस्प है कि अमेरिकी शुल्क सहित बाहरी चुनौतियों के बावजूद जीडीपी में शानदार वृद्धि हुई है।बेंचमार्क 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड इस सप्ताह 6.50 फीसदी से 6.56 फीसदी के दायरे में रहने की उम्मीद है।
हालांकि 21,000 करोड़ रुपये की निर्धारित राशि से अधिक 31,350 करोड़ रुपये के सरकारी बॉन्ड की आपूर्ति होने बाजार में पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा केंद्र सरकार की शुक्रवार को 32,000 करोड़ रुपये के 10 वर्षीय बॉन्ड बेचने की योजना है, जिससे बॉन्ड की कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है।
10 वर्षीय बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड की यील्ड शुक्रवार को 6.54 फीसदी पर बंद हुई।
एक सरकारी बैंक के एक डीलर ने कहा, ‘जब तक नीति की घोषणा नहीं हो जाती, 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड 6.50 से 6.56 फीसदी के दायरे में रहेगी। दर में कटौती भले न हो मगर मौद्रिक नीति के नरम रहने और ओएमओ कैलेंडर घोषित होने की उम्मीद है।’
बाजार के अधिकतर भागीदारों को उम्मीद है कि आरबीआई मौद्रिक नीति समिति हाल ही में रुपये में आई तेज गिरावट को देखते हुए आगामी नीति समीक्षा में रीपो दर को यथावत बनाए रखने का निर्णय ले सकती है।
महीने के अंत में डॉलर की मांग के कारण रुपये पर दबाव दिखा और इसके वर्तमान दायरे में कारोबार करने की उम्मीद है। नवंबर में रुपये में 0.8 फीसदी की गिरावट आई है, जो जुलाई के बाद से इसका सबसे खराब प्रदर्शन है। शुक्रवार को रुपया 0.17 प्रतिशत गिरकर 89.46 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।