facebookmetapixel
Advertisement
Explainer: AI से खेती का समाधान! किसानों के लिए वरदान कहा जा रहा Bharat-VISTAAR क्या है?मुंबई में मिले मोदी-मैक्रों: द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा और 26/11 के शहीदों को दी श्रद्धांजलिPSU Banks पर म्युचुअल फंड्स बुलिश, जनवरी में निवेश 3 साल के हाई पर; SBI को सबसे ज्यादा फायदाबिहार को IT हब बनाने की कोशिश? CIPL के साथ सरकार ने किया MoU साइन, खुलेगा वर्ल्ड-क्लास AI सेंटरदिल्ली में अब जमीन का भी ‘आधार’: 14 अंकों के इस डिजिटल नंबर से कैसे बदल जाएगी प्रॉपर्टी की दुनिया?पोर्टफोलियो में मुनाफा का रंग भर देगा ये Paint Stock! नतीजों के बाद ब्रोकरेज ने 42% अपसाइड का दिया टारगेटPost Office Scheme: 115 महीनों में गारंटीड डबल रिटर्न, पोस्ट ऑफिस की इस स्कीम में खुलता है जॉइंट अकाउंट भीभारत में AI सेक्टर में 2 साल में $200 अरब निवेश की उम्मीद, टेलेंट और जिम्मेदार उपयोग पर जोर: अश्विनी वैष्णवAdani Group का बड़ा दांव: रिन्यूएबल एनर्जी से चलने वाले डेटा सेंटर्स में करेगा $100 अरब का निवेशPM Kisan 22वीं किस्त पर बड़ा अपडेट, करोड़ों किसानों को होली से पहले हो सकता है फायदा

वित्त वर्ष 2026 में बैंकों के 1.51 लाख करोड़ रुपये के कर्ज बट्टे खाते में जाने की आशंका

Advertisement

इक्रा का अनुमान, कर्ज में तेज़ी के बावजूद बहीखाता सुधारने के लिए बैंकों को उठाना पड़ सकता है बड़ा कदम

Last Updated- April 08, 2025 | 10:57 PM IST
Bank

भारत के वाणिज्यिक बैंकों के इस वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 26) में 1.51 लाख करोड़ रुपये के फंसे हुए कर्ज को बट्टे खाते में डालने के आसार हैं। रेटिंग एजेंसी इक्रा के अनुमान के अनुसार बैंक अपने बहीखाते को दुरुस्त करने के लिए यह कदम उठा सकते हैं।

रेटिंग एजेंसी के अनुसार वित्त वर्ष 26 में बैंकों का ऋण करीब 10.8 से 10.9 फीसदी की दर से बढ़कर 20.2 लाख करोड़ रुपये होने की उम्मीद है। एजेंसी ने पहले ऋण में 9.7 से 10.3 फीसदी की वृद्धि होने का अनुमान जताया था।
अनुमान है कि बैंकों की वृद्धिशील ऋण विस्तार करीब 19 लाख करोड़ रुपये से 20.5 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है जबकि यह वित्त वर्ष 25 में 18 लाख करोड़ रुपये था। नीतिगत रीपो दर में कुल मिलाकर 75 आधार अंक कटौती की उम्मीद जताई जा रही है, जो फरवरी 2025 से शुरू हो चुकी है। हालांकि इक्रा को वित्त वर्ष 2026 में बैंकों का शुद्ध ब्याज मार्जिन 15 से 17 आधार अंक घटने का अनुमान है।

भारतीय रिजर्व बैंक नियमों के नियामकीय प्रावधानों में राहत देने से ऋण वृद्धि बढ़ी है। रेटिंग एजेंसी के अनुसार घरेलू अर्थव्यवस्था में ब्याज में कटौती और शुद्ध ब्याज आय (एनआईआई) दबाव में रहने के कारण लाभप्रदता में कुछ आधार अंक की कटौती आ सकती है लेकिन यह सहज दायरे में रहेगी।

Advertisement
First Published - April 8, 2025 | 10:57 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement