एचएसबीसी इंडिया ने वारी रिन्यूएबल टेक्नॉलजीज को एसोसिएटेड पावर स्ट्रक्चर्स प्राइवेट लिमिटेड (एपीएसपीएल) में 55 प्रतिशत हिस्सेदारी के अधिग्रहण के लिए लगभग 1,255 करोड़ रुपये दिए हैं।
इसके साथ ही वह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की संशोधित व्यवस्था के तहत अधिग्रहण के लिए रकम मुहैया कराने वाले शुरुआती निजी या विदेशी बैंकों में शुमार हो गया है। सौदे के लिए रकम एचएसबीसी से मिले ऋण और वारी की इक्विटी से आई है।
रिजर्व बैंक ने वाणिज्यिक बैंक ऋण सुविधा निर्देश में 30 मार्च, 2026 को संशोधन किया था, जिसके बाद यह लेनदेन हुआ है। इस संशोधन के जरिये अधिग्रहण के लिए कंपनियों को धन मुहैया कराना आसान हो गया है। संशोधित नियम 1 जुलाई से लागू होने हैं मगर बैंक पहले ही उन्हें अपना सकते हैं। एचएसबीसी ने यह व्यवस्था तय तारीख से पहले ही लागू कर दी, जिससे उसे वारी का सौदा कराने में मदद मिली।
एचएसबीसी ने कहा कि यह लेनदेन अधिग्रहण के लिए रुपये में रकम मुहैया कराने का सौदा था और भारत में संधोधित व्यवस्था के तहत अधिग्रहण के लिए धन दिलाने के शुरुआती सौदों में है।
एचएसबीसी इंडिया के फाइनैंसिंग सॉल्यूशंस के सह प्रमुख चेतन जोशी ने कहा, ‘यह भारत में किसी बैंक द्वारा किए गए ऐसे पहले लेनदेनों में है और जहां तक हमें पता है, भारत में नए मानकों के तहत धन मुहैया कराने वाले हम पहले विदेशी या निजी बैंक हैं। यह लेनदेन सफलता से होने के साथ ही हम ऐसे सौदों की मजबूत पाइपलाइन तैयार करने में जुटे हैं। हमें उम्मीद है कि आने वाले महीनों में ऐसे और लेनदेन होंगे।’
नियामक को जी गई जानकारी में वारी ने कहा कि उसने लगभग 1,225 करोड़ रुपये में एपीएसपीएल में 55 प्रतिशत हिस्सेदारी ली है। इसमें प्राथमिक अधिग्रहण शेयर आवंटन के जरिये हुआ और द्वितीयक अधिग्रहण शेयरों के हस्तांतरण से हुआ। अधिग्रहण पूरा होने के साथ ही एपीएसपीएल वारी रिन्यूएबल टेक्नॉलजीज की सहायक कंपनी बन गई है।
इससे पहले मई में कंपनी ने अधिग्रहण से जुड़े निर्णायक समझौते किए थे। इनमें एक शेयरधारक समझौता और एक शेयर खरीद और सबस्क्रिप्शन समझौता था। सौदे से पहले एपीएसपीएल में वारी की कोई हिस्सेदारी नहीं थी।
इस महीने की शुरुआत में भारतीय स्टेट बैंक के अध्यक्ष सीएस शेट्टी ने कहा था कि बैंक ने अधिग्रहण के लिए रकम उपलब्ध कराने का अपना पहला सौदा कर लिया है और दूसरा सौदा जल्द पूरा करने की कोशिश चल रही है।