रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने आज कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में कमी आने से भारत में शहरी गैस वितरण (सीजीडी) उद्योग की दैनिक बिक्री मात्रा में 8-10 प्रतिशत की गिरावट भी आ सकती है, जब तक कि निकट भविष्य में स्थिति स्थिर नहीं हो जाती।
सीजीडी कंपनियां बढ़े हुए दामों का बोझ ग्राहकों पर डाल सकती हैं। इससे उनकी लाभप्रदता व नकदी में सुधार होगा और मजबूत प्रायोजकों का समर्थन सीजीडी कंपनियों की साख को भी बनाए रखेगा। हालांकि पश्चिम एशिया में लंबे समय तक बनी रहने वाली अनिश्चितता पर नजर रखनी ही होगी। सीजीडी उद्योग अपनी 60 प्रतिशत आवश्यकता के लिए घरेलू स्तर पर उत्पादित प्राकृतिक गैस पर निर्भर है जबकि शेष 40 प्रतिशत आयात पर आश्रित है।
क्रिसिल ने बयान में कहा, ‘संघर्ष के कारण आयात में भारी कमी आई है। भारत में आयात होने वाली 45 प्रतिशत तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) कतर से आती है। कतर ने क्षेत्र में संकटों के कारण अपने रास लाफान संयंत्र में उत्पादन बंद कर दिया है और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति पर अप्रत्याशित संकट घोषित कर दिया है। इससे भारतीय गैस मूल्य श्रृंखला पर व्यापक प्रभाव पड़ा है। कई प्रमुख गैस व्यापारियों ने निर्धारित कार्गो प्राप्त करने में असमर्थता के कारण अप्रत्याशित संकट का हवाला दिया है।’
सीजीडी उद्योग में तीन खंड हैं : कम्प्रेस्ड नैचुरल गैस (सीएनजी), घरेलू पाइपयुक्त प्राकृतिक गैस (पीएनजी डी) और औद्योगिक व वाणिज्यिक पाइपयुक्त प्राकृतिक गैस (पीएनजी आई ऐंड सी)। सीएनजी और पीएनजी-डी मिलकर उद्योग की कुल बिक्री का 70 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं और इन खंडों पर सबसे कम प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। इसका कारण यह है कि प्राकृतिक गैस की आपूर्ति मुख्य रूप से घरेलू स्रोतों से होती है।