अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के साथ प्रधानमंत्री मोदी | फाइल फोटो
भारत सरकार अमेरिका के ताजा घटनाक्रम पर पूरी नजर रखे हुए है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने बीते शुक्रवार को राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के एक बड़े फैसले को गलत ठहराया। कोर्ट ने माना कि ट्रंप ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पॉवर्स एक्ट (IEEPA) के जरिए टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं रखते थे। यह कानून सिर्फ राष्ट्रीय आपात स्थिति के लिए बनाया गया था।
कोर्ट के इस फैसले के बाद ट्रंप ने तुरंत प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने घोषणा की कि 24 फरवरी से अमेरिका में आने वाले कई आयातित सामानों पर 10 प्रतिशत की अतिरिक्त ड्यूटी लगेगी। यह ड्यूटी सेक्शन 122 के तहत लगाई जा रही है। इसमें भारत से आने वाले ज्यादातर सामान भी शामिल होंगे, जब तक कोई खास छूट न मिले।
इस बदलाव से भारत को फायदा होने की संभावना दिख रही है। भारत के अमेरिका को होने वाले कुल निर्यात का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा अब 18 प्रतिशत के मौजूदा टैरिफ से बच सकता है। पहले यह टैरिफ 25 प्रतिशत था, लेकिन हाल ही में हुए ट्रेड डील में इसे घटाकर 18 प्रतिशत करने का फैसला लिया गया।
कुछ हफ्ते पहले 7 फरवरी को भारत और अमेरिका ने एक साथ बयान जारी किया था। दोनों ने एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति जताई थी। अमेरिका ने भारत पर लगे 25 प्रतिशत के दंडात्मक टैरिफ हटा दिए थे। ऐसा भारत के रूसी तेल खरीदना बंद करने के वादे को मानते हुए किया गया था।
अब दोनों देश इस डील के कानूनी दस्तावेज को अंतिम रूप देने में लगे हैं। भारत की तरफ से मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन के नेतृत्व में एक टीम रविवार को वॉशिंगटन रवाना हो रही है। टीम वहां जाकर समझौते के कानूनी टेक्स्ट पर बातचीत करेगी। दोनों पक्षों का मकसद मार्च तक इस समझौते पर दस्तखत करना है।
भारत सरकार ने आधिकारिक बयान में कहा है कि वो सुप्रीम कोर्ट के फैसले और ट्रंप की नई घोषणा का बारीकी से अध्ययन कर रही है। इन कदमों का भारत की अर्थव्यवस्था और व्यापार पर क्या असर पड़ेगा, इसकी जांच जारी है।