facebookmetapixel
Advertisement
विकास के अगले चरण के लिए भूमि व कारोबारी माहौल में सुधार जरूरी: प्रधानमंत्री मोदी तमिलनाडु में सरकार के 100 दिन, एमजीआर की याद दिला रहे विजयपश्चिम बंगाल में कारोबार को बढ़ावा, नई सरकार के पहले 100 दिन में निवेश पर जोर1991 के आ​र्थिक सुधारों से उद्योग को मिला प्रतिस्पर्धा का भरोसा, औद्योगिक और व्यापार नीति में तालमेल बिठाना जरूरीऑफर फॉर सेल के जरिये जुटाई गई रकम में उफान, LIC का अहम योगदानQ1 Results: लिस्टेड कंपनियों के मुनाफे में 16% की तेज बढ़त, BFSI और मेटल सेक्टर का बड़ा योगदानRBI के फैसले से बैंकों में हलचल, FCNR(B) जमा जुटाने की रफ्तार बढ़ीबाजार हलचल: प्री-आईपीओ शेयर, नया SLB कॉन्ट्रैक्ट और UPI नियम पर नजरजुलाई में बायोकॉन बनी MF की पसंदीदा स्मॉल-कैप खरीद, ₹3,300 करोड़ का निवेशराजस्व और मार्जिन के मोर्चे पर अपोलो से आगे मैक्स, मरीजों की बढ़ती संख्या से ग्रोथ को सहारा

केंद्रीय करों में राज्यों का हिस्सा 29 फीसदी

Advertisement
Last Updated- December 11, 2022 | 4:41 PM IST

केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2020-21 से घटकर 29 से 32 फीसदी के करीब रह गई है, जबकि इसे 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार 41 फीसदी होना चाहिए था। रविवार को हुई बैठक में कुछ राज्यों ने राजस्व बंटवारे पर चिंता जताई।
बीते 5 वर्षों में दिख रहा है कि राज्यों की हिस्सेदारी 34.5 फीसदी से लेकर 37 फीसदी तक रही है, सिर्फ वित्त वर्ष 2020 में उन्हें 42 फीसदी हिस्सेदारी देने की सिफारिश की गई थी।
नरेंद्र मोदी सरकार के शुरुआती साल (2014-15) में राज्यों की हिस्सेदारी केवल 27.13 फीसदी थी, जबकि इसे 13वीं वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत 32 फीसदी होनी चाहिए थी। 14वें और15वें वित्त आयोग की सिफारिशों में कोई खास अंतर नहीं देखा गया। हालांकि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जो अब केंद्र शासित प्रदेश बन चुके हैं को समायोजित करते हुए एनके ​सिंह की अध्यक्षता वाले आयोग ने केंद्रीय करों में राज्यों का हिस्सा 41 फीसदी रखने की सिफारिश की थी जबकि वाईवी रेड्डी की अध्यक्षता वाले आयोग ने 42 फीसदी हिस्सेदारी की सिफारिश की थी।
केंद्र द्वारा अधिक उपकर वसूलने राज्यों को कर में कम हिस्सा मिल रहा है। संविधान के अनुच्छेद 271 के तहत सभी केंद्रीय कर और शुल्क, निर्दिष्ट उद्देश्यों के लिएलगाए गए उपकर और अधिभार को छोड़कर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ बांटना होगा। केंद्रीय करों में उपकर और अधिभार का हिस्सा मोदी सरकार के पहले वर्ष में छह फीसदी बढ़कर अब 20 फीसदी से अधिक हो गया है। यह जानना होगा कि उत्पाद शुल्क में लगने वाले उपकर को कमतर आंका गया है। सिर्फ वहीं उपकर लिए गए हैं जो राजस्व और अन्य विभागों ने बजट के दौरान बताए थे। हालांकि सिर्फ बुनियादी उत्पाद शुल्क ही राज्यों के साथ बांटे जाते हैं। अगर हम पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क को भी शामिल करते हैं तो उपकर और अधिभार का हिस्सा काफी बढ़ जाएगा। उदाहरण के लिए 2022-23 (बजट अनुमान ) के लिए यह 24 फीसदी हो जाएगा।
हालांकि वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने पिछले सप्ताह लोकसभा को एक लिखित जवाब में बताया कि केंद्र सरकार द्वारा एकत्र किए गए पेट्रोल और डीजल पर विभिन्न उपकर मुख्य रूप से केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए उपयोग किए जाते है, जिसके तहत राज्यों को भी धन हस्तांतरित किए जाते हैं ताकि वे इसे अमल में लाना सुनिश्चित कर सकें।
अगर इसी ढांचे को बनाए रखा जाता है तो भी विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकार राज्यों को दिए जाने वाले रुपये को बढ़ा सकती है क्योंकि 2022-23 के बजट के अनुमान से कर संग्रह काफी अधिक है। इस वर्ष की पहली तिमाही में केंद्र ने 5.68 लाख करोड़ रुपये जमा किए हैं जो कि पिछली समान अवधि से 22.4 फीसदी अधिक है। बजट अनुमान में वित्त वर्ष 22 की तुलना में इस पूरे साल कर संग्रह में 1.8 फीसदी की वृद्धि होगी।

Advertisement
First Published - August 11, 2022 | 12:31 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement