सात राज्यों ने मंगलवार को साप्ताहिक बॉन्ड नीलामी के जरिए 11,600 करोड़ रुपये जुटाए। यह उनके अधिसूचित राशि 13,600 करोड़ रुपये से कम था। महाराष्ट्र ने 2050 और 2055 के बॉन्ड की सभी निविदाओं को पुन: जारी करना अस्वीकार कर दिया। महाराष्ट्र की हरेक निविदा का मूल्य 1,000 करोड़ रुपये था। उधारी ली गई राशि इस कैलेंडर की राशि 19,450 करोड़ रुपये से महत्त्वपूर्ण रूप से कम है।
सरकारी बैंक के डीलर ने बताया, ‘अनुमान के अनुरूप कटऑफ थी। महाराष्ट्र के लिए निविदा अच्छी थीं लेकिन उन्होंने पुन: करने के लिए किसी निविदा को नहीं चुनने का फैसला किया।’ इससे पूर्व महाराष्ट्र ने इस साल के लिए 26 अगस्त को निविदाएं अस्वीकार की थीं। विशेषज्ञों के अनुसार महाराष्ट्र की वित्तीय स्थिति अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर है। इसलिए उन्होंने किसी भी कीमत पर उधारी नहीं लेने का फैसला किया। 10 साल के राज्य बॉन्ड की कटऑफ यील्ड 7.14 प्रतिशत थी जबकि यह बीते सप्ताह 7.23 प्रतिशत थी।
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, ‘महाराष्ट्र का फैसला संभवत: उसका राजकोषीय प्रबंधन दर्शाता है। अभी उधारी की लागत कहीं अधिक है। उदाहरण के तौर पर आंध्र प्रदेश के 10 वर्षीय एसडीएल ने सरकारी प्रतिभूतियों के 60 आधार अंक से ऊपर कारोबार किया। महाराष्ट्र संभवत: यील्ड के सुस्त होने का इंतजार कर रहा है।