राष्ट्रीय प्रशिक्षुता प्रोत्साहन योजना (एनएपीएस) के तहत किए गए आवेदनों की संख्या 2025 में छह साल के निचले स्तर पर आ गई है। यह आंकड़ा संकेत देता है कि नियोक्ताओं के खाली पदों में वृद्धि करने के बावजूद प्रशिक्षुता की मांग में लगातार सुस्ती बनी हुई है।
2025 में कुल आवेदनों की संख्या घटकर 4,01,560 रह गई और यह 2019 के बाद से सबसे कम है। 2022 में आवेदनों की संख्या सबसे ज़्यादा 42.8 लाख थी। यह 2023 में घटकर 29.7 लाख और 2024 में 25.3 लाख हो गई। नवीनतम आंकड़े 2022 के शीर्ष (सबसे ज्यादा संख्या) से 90 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दिखाते हैं। यह महामारी के बाद रिकवरी के समय देखे गए स्तरों से भी काफी कम है।
यह गिरावट तब आई है जब नियोक्ता पोर्टल पर अप्रेंटिसशिप के अवसर पैदा कर रहे हैं। डैशबोर्ड के अनुसार योजना की शुरुआत से लेकर अब तक कुल 77 लाख रिक्तियां बनाई गई हैं। हालांकि 70.8 लाख से अधिक रिक्तियां उपलब्ध हैं।
यह बताता है कि उम्मीदवारों के आवेदनों में मंदी के बावजूद नियोक्ता प्रशिक्षुओं की तलाश जारी रखे हुए हैं। यह अंतर प्रशिक्षुओं के मौकों की आपूर्ति और प्लेटफॉर्म के जरिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की संख्या के बीच बढ़ती खाई की ओर इशारा करता है।
एनएपीएस केंद्र सरकार का प्रमुख प्रशिक्षुता प्रोत्साहन कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य वित्तीय सहायता प्रदान करके और उम्मीदवारों को नियोक्ताओं के साथ मिलान की सुविधा प्रदान करके प्रतिष्ठानों को प्रशिक्षुओं को शामिल करने के लिए प्रोत्साहित करना है। यह योजना सरकार की कौशल रणनीति का प्रमुख स्तंभ है और कार्यबल में प्रवेश करने वाले युवाओं को उद्योग-प्रासंगिक, ऑन-द-जॉब प्रशिक्षण प्रदान करने का इरादा रखती है।
टीमलीज डिग्री अप्रेंटिसशिप के सीईओ निपुन शर्मा ने कहा कि आवेदनों में गिरावट काफी हद तक जागरूकता का मुद्दा है। दरअसल, योजना के तहत उपलब्ध अवसरों से कंपनियां और संभावित अप्रेंटिस पूरी तरह वाकिफ नहीं हैं। उन्होंने बताया, ‘जागरूकता का बड़ा मुद्दा है और कुल मिलाकर हम जागरूकता पर और अधिक कार्य कर सकते हैं। कई कंपनियां और साथ ही संभावित आवेदक भी ऐसी योजनाओं से अवगत नहीं हैं और प्रशिक्षु चाहते हुए भी प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं।’