केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि भारत तब तक अमेरिका के साथ कोई व्यापारिक समझौता नहीं करेगा जब तक कि अमेरिका ऐसा कानूनी और नीतिगत ढांचा तैयार नहीं करता जिससे भारत को प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में विशेष व्यापारिक लाभ मिल सके।
ब्रिटेन के दो दिवसीय दौरे पर गए गोयल ने लंदन में एक कार्यक्रम में कहा, ‘जब तक प्रतिस्पर्धात्मक लाभ देने का मसौदा अंतिम रूप नहीं ले लेता है तब तक हम अमेरिका के साथ समझौते को लागू नहीं कर सकते। फिलहाल चर्चा इस बात पर केंद्रित है कि अमेरिका किस प्रकार उपयुक्त साधन और कानूनी समर्थन देगा ताकि भारत को यह प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सके। जिस दिन यह सुनिश्चित हो जाएगा उसी दिन समझौता भी हो जाएगा।’
गोयल की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब उन्होंने एक दिन पहले ही नई दिल्ली में अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर के साथ व्यापार वार्ता का एक और दौर पूरा किया है। बैठक के बाद वाणिज्य मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने और प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हालांकि, बयान में लंबित मुद्दों पर किसी विशेष प्रगति के संकेत नहीं मिले हैं।
फरवरी में भारत और अमेरिका द्वारा अंतरिम व्यापार समझौते की घोषणा के बाद यह दोनों देशों के बीच वार्ता का तीसरा दौर था। इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारत पर लगाया गया 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क हटाने और पारस्परिक शुल्क को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने की प्रतिबद्धता जताई थी।
हालांकि इसके तुरंत बाद अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा इंटरनैशनल इमरजेंसी इकनॉमिक पावर्स एक्ट (आईईईपीए) के तहत लगाए गए पारस्परिक शुल्क को रद्द कर दिया। इसके बाद अमेरिका ने सभी व्यापारिक साझेदार देशों पर 10 प्रतिशत का आधारभूत शुल्क लागू किया जिसकी अवधि 24 जुलाई को समाप्त हो रही है।
अमेरिका के उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद दोनों देशों के अधिकारियों ने कई बार कहा कि संशोधित व्यापार समझौता लगभग तैयार है। लेकिन गोयल की हाल की टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि इस समझौते को जल्द अंतिम रूप देने की जल्दबाजी अब नहीं दिखाई जा रही है।
गोयल ने कहा, ‘जब हमने समझौते को अंतिम रूप दिया था तब आईईईपीए के तहत लगाए गए शुल्क लागू थे। उस समय भारत पर कुल मिलाकर लगभग 50 प्रतिशत शुल्क का बोझ था इसलिए हमारी बातचीत इस आधार पर हुई थी कि इस शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत किया जाएगा।’ उन्होंने आगे कहा, ‘पूरा समझौता इस बात पर आधारित था कि 18 प्रतिशत शुल्क के साथ हमें अपने पड़ोसी देशों और अन्य प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बढ़त मिलेगी। यही कारण था कि यह समझौता हमारे लिए आकर्षक था।’
गोयल ने कहा, ‘सर्वोच्च न्यायालय ने बराबरी के शुल्क को रद्द कर दिया है और मौजूदा 10 प्रतिशत शुल्क की अवधि भी 24 जुलाई को समाप्त होने वाली है ऐसे में हमारे पास यह समझौता लागू करने का कोई ठोस कारण होना चाहिए जिस पर पहले सहमति बनी थी।’
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने यह घोषणा की थी कि ग्रीर भारत आकर अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देंगे, ऐसे में यह उम्मीदें बढ़ गई थीं कि दोनों देश 24 जुलाई से पहले समझौते की घोषणा कर सकते हैं।
यह वही तारीख है जब अमेरिका के अस्थायी 10 प्रतिशत सार्वभौमिक शुल्क की अवधि खत्म होने वाली है। हालांकि, ग्रीर की भारत यात्रा से पहले वाणिज्य मंत्री गोयल ने कहा था कि वह 24 जुलाई की समय-सीमा को लेकर चिंतित नहीं हैं जिसके बाद इन उम्मीदों में कुछ कमी आ गई थी।
इस बीच, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) ने कथित जबरन श्रम से जुड़े आरोपों की जांच के बाद भारत के आयात पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि यह शुल्क तुरंत लागू नहीं होगा क्योंकि अमेरिका ने इस प्रस्ताव पर 6 जुलाई तक सार्वजनिक टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।