facebookmetapixel
Advertisement
भारत और UAE के बीच 6 ऐतिहासिक समझौते; अबू धाबी में PM मोदी की यात्रा के दौरान रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र पर बड़ा फैसलापश्चिम एशिया संकट का असर: चार साल में पहली बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, CNG भी हुई महंगीतेल की बढ़ती कीमतों और कमजोर रुपये से शेयर बाजार बेदम; सेंसेक्स-निफ्टी में साप्ताहिक गिरावटApple पर CCI कसेगा शिकंजा, वैश्विक टर्नओवर के बजाय अब भारत के राजस्व पर मांगा जवाबरिकॉर्ड निचले स्तर पर रुपया: ₹96.14 तक लुढ़का, क्या ₹100 प्रति डॉलर तक गिर जाएगा?IMD का पूर्वानुमान: केरल में जल्दी आएगा मॉनसून, लेकिन अल नीनो के कारण सामान्य से कम बारिश की आशंकानीट परीक्षा में बड़ा बदलाव: अगले साल से ऑनलाइन मोड में होगी परीक्षा, शिक्षा मंत्री ने किया ऐलानरक्षा क्षेत्र का नया हब बनेगा आंध्र प्रदेश, सत्य साईं जिले में रखी गई स्टेल्थ फाइटर जेट परियोजना की नींवभोजशाला विवाद पर हाईकोर्ट ने दिया ऐतिहासिक फैसला, परिसर को बताया देवी सरस्वती का मंदिरनई दिल्ली में ब्रिक्स बैठक में पश्चिम एशिया संघर्ष पर नहीं बनी सहमति, बिना संयुक्त विज्ञप्ति के समाप्त हुई चर्चा

भारत गैर शुल्क बाधाएं हटाए

Advertisement

प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति इस बात पर सहमत हुए थे कि परस्पर लाभ वाले द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) को अगले सात से आठ महीने में पूरा कर लिया जाएगा।

Last Updated- March 04, 2025 | 10:56 PM IST
India US Trade Deal

वा​णिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और उनके अमेरिकी समकक्ष के बीच होने वाली बैठक से पहले यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल (यूएसआईबीसी) ने मंगलवार कहा कि बाजार में पहुंच धीमी करने वाली गैर शुल्क बाधाओं और लालफीताशाही को शीघ्रता से हटाया जाना चाहिए।

यूएसआईबीसी के अध्यक्ष अतुल केशप ने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार समझौते से व्यापार को सार्थक रूप से बढ़ावा देना लंबे समय से लंबित है। यह दोनों देशों के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) को भी बढ़ावा देने का कारक बनेगा। इस समझौते से खुली और पूरी बाजार पहुंच भी प्रदान की जा सकती है।

गोयल और अमेरिका के वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने वॉशिंगटन में मंगलवार को पहली बैठक की। गोयल अमेरिका के नवनियुक्त व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जैमीसन ग्रीर से मुलाकात कर भारत सहित अन्य देशों पर एक माह बाद लगाए जाने वाले बराबरी के शुल्क मसले पर बात करेंगे। इसके अलावा इस भेंट के दौरान दोनों देशों के बीच घोषित व्यापार समझौते पर भी चर्चा हो सकती है।

पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप इस बात पर सहमत हुए थे कि परस्पर लाभ वाले द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) को अगले सात से आठ महीने में पूरा कर लिया जाएगा। इस व्यापार समझौते पर उस समय बातचीत हो रही है जब ट्रंप के नेतृत्व वाली सरकार अन्य देशों के शुल्कों, कर और गैर शुल्क बाधाओं से निपटने के लिए अप्रैल की शुरुआत में जवाबी शुल्क लगाने की तैयारी में है।

यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल (यूएसआईबीसी) के प्रेसिडेंट केशप ने कहा, ‘भारत और अमेरिका के कारोबारियो ने एक-दूसरे के देश में कई वर्षों से औपचारिक निवेश या व्यापार ढांचे के बिना निवेश किया है। अमेरिका के व्यापार में भारत की हिस्सेदारी केवल 2.5 फीसदी है और यह संख्या पर्याप्त रूप से बढ़ाई जा सकती है। अब दोनों पक्षों को निवेश, तरक्की और रोजगार सृजन के लिए औपचारिक रूप से एक समान अवसर, पूर्ण और खुली बाजार पहुंच, विवादों के शीघ्र समाधान और विनियामक नीतियों पर जोर देना चाहिए।’

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर कारोबार जगत भी आशावादी है। दिल्ली स्थित एक थिंक टैंक ने कहा कि अमेरिका पहले व्यापार समझौतों की अवहेलना करता रहा है, इसलिए भारत को समग्र एफटीए पर बातचीत में सावधानी बरतनी चाहिए। जीटीआरआई ने बताया, ‘अमेरिका का कनाडा और मेक्सिको के साथ जनवरी 1994 से मुक्त व्यापार समझौता नाफ्टा लागू है। लेकिन ट्रंप अपने पहले कार्यकाल में ही इसकी शर्तों से असंतुष्ट थे और इसकी जगह 2018-19 में यूएसएमसीए (यूएस-मेक्सिको-कनाडा एफटीए) को लेकर आए थे। उन्होंने फिर दावा किया है कि नाफ्टा समझौता पुराना पड़ चुका है और इससे अमेरिकी कामगारों के हितों को नुकसान पहुंचता है। अब वे अपने ही समझौते से नाखुश हैं और यूएसएमसीए की शर्तों की अवहेलना कर कनाडा और मेक्सिको पर 25 फीसदी शुल्क लगा दिया है।’

अमेरिका ने एक महीने के विराम के बाद मंगलवार को कनाडा और मेक्सिको पर 25 फीसदी शुल्क लगा दिया था। अब चीन पर अमेरिका में निर्यात करने पर संयुक्त रूप से 20 फीसदी का शुल्क लगता है जबकि पहले यह शुल्क 10 फीसदी था। जीटीआरआई ने कहा, ‘बैठकर बातचीत करने के दौरान स्थिति खराब हो सकती है। अमेरिका न केवल भारत से शुल्क कटौती की मांग कर सकता है बल्कि अतिरिक्त रियायतें जैसे सरकारी खरीद को खोलने, कृषि सब्सिडी कम करने, पेटेंट संरक्षण को कमजोर करने और अबाधित आंकड़ों के प्रवाह की मांग कर सकता है। भारत इन मांगों का दशकों से विरोध कर रहा है।’

Advertisement
First Published - March 4, 2025 | 10:51 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement