अर्थव्यवस्था

‘बजट के आंकड़ों से आगे बढ़ना जरूरी’, एक्सपर्ट्स ने बताया 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का असली फॉर्मूला

नई दिल्ली में मिशन 2047 पर चर्चा में एक्सपर्ट्स ने 6.5% ग्रोथ, विकसित राज्य, ग्लोबल वैल्यू चेन, समावेशी विकास और MSME पर फोकस की अहमियत पर जोर दिया

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- February 21, 2026 | 10:21 AM IST

नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में 18 फरवरी को देश की आर्थिक दिशा और भविष्य की चुनौतियों पर एक बड़ी चर्चा हुई। ‘द सेक्रेटेरिएट’ और ‘चिंतन रिसर्च फाउंडेशन’ (CRF) के साझा प्रयास से आयोजित इस कार्यक्रम का विषय था “इंडियाज ग्रोथ स्टोरी बियॉन्ड द बजट: नेविगेटिंग मिशन 2047″। इस चर्चा में नीति निर्माताओं और एक्सपर्ट्स ने साफ किया कि अगर भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनना है, तो हमें केवल सालाना बजट के भरोसे रहने के बजाय लंबी समय के बदलावों पर ध्यान देना होगा।

6.5% का ‘प्लेटो’ और राज्यों की भूमिका

प्राइमस पार्टनर्स के चेयरमैन दविंदर संधू ने एक कड़वी लेकिन जरूरी सच्चाई सामने रखी। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था फिलहाल 6.5% की विकास दर के एक ‘प्लेटो’ (ठहराव) पर पहुंच गई है। अब यहां से आगे बढ़ने के लिए सिर्फ सरकारी राजकोषीय नीतियां काफी नहीं होंगी।

संधू के मुताबिक, भारत को मिशन 2047 के लिए कम से कम 25 साल के एक ऐसे ‘पॉलिटिकल कंसेंसस’ (राजनीतिक सहमति) की जरूरत है, जिसे चुनाव या सरकार बदलने पर बदला न जाए। उन्होंने यह भी आगाह किया कि राज्यों के बीच बढ़ती असमानता हमारे निवेश और सामाजिक स्थिरता के लिए खतरा बन सकती है।

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इसी बात को आगे बढ़ाते हुए एक्सपर्ट्स ने कहा कि विकास केवल दिल्ली की सोच तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जब तक हमारे राज्य अपनी क्षमता और कॉम्पिटिशन नहीं बढ़ाएंगे, तब तक ‘विकसित भारत’ का सपना अधूरा रहेगा। इसे ‘विकसित राज्य’ की अवधारणा से ही हासिल किया जा सकता है।

बाजार का आकार और एक्सपोर्ट की नई परिभाषा

फाउंडेशन फॉर इकोनॉमिक डेवलपमेंट के फाउंडर-डायरेक्टर राहुल अहलूवालिया ने बाजार को लेकर एक अलग नजरिया पेश किया। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ की आबादी की वजह से हम एक बड़े बाजार दिखते जरूर हैं, लेकिन अगर प्रति व्यक्ति आय के हिसाब से देखें, तो हम दुनिया के सबसे छोटे बाजारों में से एक हैं। उन्होंने जोर दिया कि गरीबी कम करने का सबसे सटीक रास्ता ‘तेज विकास’ ही है।

वहीं, ग्लोबल मार्केट में भारत की पकड़ मजबूत करने पर चर्चा करते हुए एक्सपर्ट्स ने कहा कि अब हमें ‘वॉल्यूम’ (मात्रा) से ‘वैल्यू’ (कीमत और क्वालिटी) की तरफ बढ़ना होगा। CRF से जुड़ी बिदिशा भट्टाचार्य ने सुझाव दिया कि भारत को गेहूं-चावल जैसे कम मुनाफे वाले सामानों के बजाय फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग गुड्स जैसे हाई-टेक प्रोडक्ट्स के निर्यात पर ध्यान देना चाहिए।

पूर्व राजदूत बाला भास्कर ने आज के दौर की मुश्किलों का जिक्र करते हुए कहा कि अब अर्थशास्त्र पूरी तरह से ‘जियोपॉलिटिक्स’ और ‘सेंक्शन्स’ (प्रतिबंधों) से तय होता है। ऐसे में AI और बदलती तकनीक के बीच भारत को बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) को मजबूत बनाकर अपनी जगह पक्की करनी होगी।

कुल मिलाकर, सभी एक्सपर्ट इस बात पर सहमत दिखें कि मिशन 2047 के लिए भारत को समावेशी विकास, MSME सेक्टर को और आजादी व ग्लोबल सप्लाई चेन में अपनी गहरी पैठ बनाने की जरूरत है।

First Published : February 21, 2026 | 10:18 AM IST