अंतरराष्ट्रीय

US Tariffs: सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद ट्रंप का पलटवार, 10% ग्लोबल टैरिफ का ऐलान

सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद ट्रंप ने ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत अधिकांश आयात पर 10% अस्थायी वैश्विक टैरिफ लागू कर दिया, जबकि कुछ रणनीतिक क्षेत्रों को छूट दी गई है।

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- February 21, 2026 | 8:54 AM IST

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने एक बार फिर टैरिफ को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनके पहले के पारस्परिक टैरिफ आदेश को रद्द किए जाने के कुछ ही घंटों बाद ट्रंप ने अधिकांश विदेशी सामानों पर 10 प्रतिशत का वैश्विक आयात शुल्क लगाने का कार्यकारी आदेश जारी कर दिया।

व्हाइट हाउस की ओर से 20 फरवरी को जारी फैक्ट शीट के अनुसार, ट्रंप ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 का उपयोग करते हुए 150 दिनों के लिए अस्थायी आयात अधिभार लगाने का फैसला किया है। यह नया शुल्क वाशिंगटन समयानुसार 24 फरवरी को रात 12 बजकर 1 मिनट से लागू होगा और 24 जुलाई तक प्रभावी रहेगा। हालांकि, कांग्रेस चाहे तो इसे पहले समाप्त कर सकती है या इसकी अवधि बढ़ा सकती है।

ट्रंप का बयान

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इस फैसले की घोषणा करते हुए इसे “सभी देशों पर 10 प्रतिशत का वैश्विक टैरिफ” बताया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय लगभग तुरंत प्रभाव से लागू किया जाएगा। साथ ही, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उन न्यायाधीशों की आलोचना की जिन्होंने उनके पिछले टैरिफ कदम को खारिज किया था। ट्रंप ने अदालत के फैसले को अनुचित बताया और कहा कि वह राजस्व संग्रह को मजबूत बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि अब समायोजन की प्रक्रिया शुरू होगी और सरकार पहले से अधिक राजस्व जुटाने की दिशा में काम करेगी।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्या था

इससे पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6 के मुकाबले 3 मतों से फैसला सुनाते हुए कहा था कि ट्रंप द्वारा इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट का उपयोग कर व्यापक टैरिफ लगाना कानून के दायरे में नहीं आता। अदालत ने स्पष्ट किया कि आपातकालीन शक्तियों के तहत इतने बड़े पैमाने पर आयात शुल्क लगाना उचित नहीं है।

ट्रंप प्रशासन ने पिछले वर्ष 10 से 50 प्रतिशत तक के टैरिफ कई व्यापारिक साझेदार देशों पर लगाए थे। इनमें कनाडा, मेक्सिको और चीन जैसे प्रमुख देश शामिल थे। उस समय इन टैरिफ को फेंटेनिल तस्करी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के आधार पर उचित ठहराया गया था।

अमेरिकी टैरिफ पर अदालत की सख्ती, अरबों डॉलर रिफंड की संभावना

अमेरिका में आयात शुल्क को लेकर एक बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। एक संघीय अदालत ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट यानी IEEPA के तहत लगाए गए कुछ टैरिफ को अमान्य करार देते हुए उन्हें रद्द कर दिया है। इस फैसले के बाद ब्राज़ील और भारत से आने वाले सामान पर लगाए गए समान प्रावधानों वाले शुल्क भी सवालों के घेरे में आ गए हैं।

हालांकि अदालत ने यह स्पष्ट नहीं किया कि जिन कंपनियों ने अब तक शुल्क का भुगतान किया है, क्या उन्हें उसका पैसा वापस मिलेगा या नहीं। यह मामला अब निचली अदालतों के फैसले पर निर्भर करेगा। जानकारी के मुताबिक 1500 से अधिक कंपनियों ने इन शुल्कों को चुनौती दी थी और अब उनके लिए राहत की उम्मीद जगी है।

अरबों डॉलर तक पहुंच सकता है रिफंड

आर्थिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि अदालतें आयातकों के पक्ष में फैसला देती हैं तो सरकार को अरबों डॉलर की रकम लौटानी पड़ सकती है। यह राशि उन कंपनियों को दी जाएगी जिन्होंने विवादित टैरिफ के तहत अतिरिक्त शुल्क चुकाया था।

इस बीच, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने डलास के इकोनॉमिक क्लब में बोलते हुए कहा कि वर्ष 2026 में टैरिफ से होने वाली आय लगभग समान बनी रहेगी। उनका कहना है कि प्रशासन वैकल्पिक कानूनी प्रावधानों के माध्यम से राजस्व संग्रह जारी रखेगा।

नया टैरिफ क्यों लगाया गया

व्हाइट हाउस द्वारा जारी एक तथ्य पत्रक के अनुसार प्रशासन का मानना है कि अमेरिका गंभीर अंतरराष्ट्रीय भुगतान असंतुलन की स्थिति का सामना कर रहा है। सरकार का तर्क है कि लगातार बढ़ता व्यापार घाटा और भुगतान संतुलन में भारी कमी देश की वित्तीय स्थिरता, निवेशकों के भरोसे और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है।

इसी पृष्ठभूमि में प्रशासन ने ट्रेड एक्ट की धारा 122 का सहारा लिया है। यह प्रावधान राष्ट्रपति को 150 दिनों तक अधिकतम 15 प्रतिशत तक अस्थायी आयात अधिभार लगाने की अनुमति देता है। इस कदम के लिए पहले से कांग्रेस की मंजूरी आवश्यक नहीं होती।

अमेरिका में आयात शुल्क को लेकर एक बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। एक संघीय अदालत ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट यानी IEEPA के तहत लगाए गए कुछ टैरिफ को अमान्य करार देते हुए उन्हें रद्द कर दिया है। इस फैसले के बाद ब्राज़ील और भारत से आने वाले सामान पर लगाए गए समान प्रावधानों वाले शुल्क भी सवालों के घेरे में आ गए हैं।

हालांकि अदालत ने यह स्पष्ट नहीं किया कि जिन कंपनियों ने अब तक शुल्क का भुगतान किया है, क्या उन्हें उसका पैसा वापस मिलेगा या नहीं। यह मामला अब निचली अदालतों के फैसले पर निर्भर करेगा। जानकारी के मुताबिक 1500 से अधिक कंपनियों ने इन शुल्कों को चुनौती दी थी और अब उनके लिए राहत की उम्मीद जगी है।

अरबों डॉलर तक पहुंच सकता है रिफंड

आर्थिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि अदालतें आयातकों के पक्ष में फैसला देती हैं तो सरकार को अरबों डॉलर की रकम लौटानी पड़ सकती है। यह राशि उन कंपनियों को दी जाएगी जिन्होंने विवादित टैरिफ के तहत अतिरिक्त शुल्क चुकाया था।

इस बीच, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने डलास के इकोनॉमिक क्लब में बोलते हुए कहा कि वर्ष 2026 में टैरिफ से होने वाली आय लगभग समान बनी रहेगी। उनका कहना है कि प्रशासन वैकल्पिक कानूनी प्रावधानों के माध्यम से राजस्व संग्रह जारी रखेगा।

नया टैरिफ क्यों लगाया गया

व्हाइट हाउस द्वारा जारी एक तथ्य पत्रक के अनुसार प्रशासन का मानना है कि अमेरिका गंभीर अंतरराष्ट्रीय भुगतान असंतुलन की स्थिति का सामना कर रहा है। सरकार का तर्क है कि लगातार बढ़ता व्यापार घाटा और भुगतान संतुलन में भारी कमी देश की वित्तीय स्थिरता, निवेशकों के भरोसे और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है।

इसी पृष्ठभूमि में प्रशासन ने ट्रेड एक्ट की धारा 122 का सहारा लिया है। यह प्रावधान राष्ट्रपति को 150 दिनों तक अधिकतम 15 प्रतिशत तक अस्थायी आयात अधिभार लगाने की अनुमति देता है। इस कदम के लिए पहले से कांग्रेस की मंजूरी आवश्यक नहीं होती।

अमेरिका में आयात पर 10% अतिरिक्त शुल्क, किन वस्तुओं को मिली छूट? जानें पूरा विवरण

अमेरिका ने अपनी व्यापार नीति में बड़ा बदलाव करते हुए अधिकांश आयातित वस्तुओं पर 10 प्रतिशत ऐड वेलोरम ड्यूटी लगाने का फैसला किया है। यह शुल्क वस्तु के मूल्य के आधार पर लगाया जाएगा और पहले से लागू कस्टम ड्यूटी के अतिरिक्त वसूला जाएगा। यानी जिन उत्पादों पर पहले से शुल्क लागू है, उन पर अब यह नई दर भी जोड़ी जाएगी।

किन वस्तुओं पर लागू होगा नया शुल्क?

सरकार के फैसले के अनुसार यह 10 प्रतिशत शुल्क ज्यादातर आयातित उत्पादों पर लागू होगा। इसका उद्देश्य व्यापक आर्थिक असंतुलन को सुधारना बताया गया है। प्रशासन का कहना है कि यह कदम किसी एक उद्योग को संरक्षण देने के बजाय समग्र व्यापार रणनीति को नए सिरे से व्यवस्थित करने के लिए उठाया गया है।

किन वस्तुओं को मिलेगी छूट?

हालांकि कुछ अहम श्रेणियों को इस अतिरिक्त शुल्क से बाहर रखा गया है। इनमें शामिल हैं:

  • महत्वपूर्ण खनिज और दुर्लभ धातुएं

  • ऊर्जा से जुड़े उत्पाद

  • दवाइयां और फार्मास्युटिकल सामग्री

  • कुछ इलेक्ट्रॉनिक सामान

  • एयरोस्पेस क्षेत्र से जुड़े उत्पाद

  • चुनिंदा कृषि वस्तुएं

सरकार का मानना है कि इन क्षेत्रों पर अतिरिक्त बोझ डालना रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से उचित नहीं होगा।

मुक्त व्यापार समझौतों के तहत छूट

जो उत्पाद अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा के बीच हुए US–Mexico–Canada Agreement के तहत शुल्क मुक्त हैं, वे इस नई ड्यूटी से भी मुक्त रहेंगे। इसी तरह Dominican Republic–Central America Free Trade Agreement के अंतर्गत आने वाले वस्त्र और परिधान भी अतिरिक्त शुल्क से बाहर रखे गए हैं।

इसके अलावा जिन आयातित वस्तुओं पर पहले से Section 232 के तहत टैरिफ लागू है, उन पर यह 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क नहीं जोड़ा जाएगा।

First Published : February 21, 2026 | 8:54 AM IST