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निर्यात की तैयारियों में गुजरात, महाराष्ट्र आगे

Last Updated- December 15, 2022 | 2:57 AM IST

औद्योगिक रूप से विकसित राज्यों जैसे गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु ने सरकार के नए निर्यात तैयारी सूचकांक 2020 में शीर्ष स्थान बनाया है। आज जारी सूचकांक में हर राज्य के निर्यात परिदृश्य को दिखाया गया है। नीति आयोग के मुताबिक इससे निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार के लिए रणनीति तैयार करने में मदद मिलेगी। नीति आयोग ने सूचकांक पर दांव लगाया है, जिससे निर्यात प्रक्रिया की चुनौतियों का आलोचनात्मक विश्लेषण हो सके। नीति आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पिछले 12 से 15 महीनों की स्थिति को देखते हुए सूचकांक से निर्यात क्षेत्र के लिए नीति बनाने में मदद मिलेगी, जिसे कि 2024 तक 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करने में मदद मिल सके।
यह सूचकांक 4 प्रमुख स्तंभों के मिश्रण पर आधारित है, जो क्षेत्रीय निर्यात में सुधार के लिए जरूरी हैं। इसके बारे में केंद्र व राज्यों के बीच व्यापक बहस के बाद फैसला किया गया था।  इसमें राज्य की व्यापार नीति, कारोबार सुगमता का आकलन, प्रमुख बुनियादी ढांचा सहूलियतें, व्यापार को समर्थन देने सहित निर्यात का खास माहौल और निर्यात का ऐतिहासिक प्रदर्शन शामिल किया गया है, जो वृद्धि और विविधीकरण के संकेत देते हैं।
इसमें राज्यों का वर्गीकरण उनके भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर किया गया है और उन्हें तटीय, भूस्थलीय, हिमालयी और केंद्र शासित इलाके  व शहरों वाले राज्य में बांटा गया है।  कुल मिलाकर तटीय इलाकों के अंक अन्य श्रेणियोंं की तुलना में सभी उपस्तंभों के हिसाब से ज्यादा हैं, जिनमें निर्यात प्रोत्साहन नीति, संस्थागत ढांचा, बुनियादी ढाचा, कारोबारी माहौल, वित्त तक पहुंच और निर्यात संबंधी बुनियादी ढांचा शामिल है। सिर्फ शोध एवं विकास संबंधी बुनियादी ढांचे के मामले में केंद्र शासित प्रदेशों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। पूर्वोत्तर के राज्य अपने स्वदेशी उत्पादों पर केंद्रित होकर ज्यादा निर्यात करने में सक्षम हुए हैं। इससे पता चलता है कि इस तरह के बास्केट (जैसे मसाला) पर ध्यान केंद्रित करके निर्यात को गति दी जा सकती है और इन राज्यों के किसानों की आमदनी में सुधार लाया जा सकता है।  रिपोर्ट में क्षेत्र के भीतर और एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में निर्यात संबंधी बुनियादी ढांचे में तुलनात्मक अंतर व कारोबारी समर्थन संबंधी समस्याओं और किसी खास निर्यात के अभाव को मुख्य चुनौती के रूप में दिखाया गया है, जो निर्यात में वृद्धि को प्रभावित कर रहे हैं।
इसके साथ ही रिपोर्ट में राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा विकास योजनाओं और सरकार-उद्योग-शैक्षिक जगत के बीच  ज्यादा तालमेल की वकालत की गई है।

First Published - August 26, 2020 | 11:33 PM IST

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