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उद्योगों में हरित ईंधन अनिवार्य

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Last Updated- December 11, 2022 | 5:06 PM IST

भारत ने पिछले साल ग्लासगो में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (सीओपी-26) के दौरान जो वादे किए थे, उन्हें ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने ऊर्जा संरक्षण विधेयक में संशोधन का प्रस्ताव किया है। इसका मकसद पर्यावरण के अनुकूल यानी हरित ईंधन और औद्योगिक ऊर्जा दक्षता से संबंधित लक्ष्य हासिल करना तथा देश में अपना कार्बन क्रेडिट बाजार तैयार करना है।
विधेयक में कहा गया है कि संशोधन का प्रस्ताव अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने की भारत की योजना और राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को ध्यान में रखते हुए किया गया है। यह विधेयक सीओपी-26 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घो​षित पांच लक्ष्य हासिल करने में भी मदद करेगा।

लोकसभा में आज पेश विधेयक में सभी उद्योगों के लिए हरित ईंधन जैसे ग्रीन हाइड्रोजन, ग्रीन अमोनिया, बायोमास के उपयोग की अनिवार्य सीमा तय करने का भी प्रस्ताव है। प्रस्ताव में कहा गया है कि कुछ निश्चित उपभोक्ताओं के लिए ऊर्जा के स्रोत के तौर पर गैर-जीवाश्म ईंधन की खपत कम से कम रखने के लिए कानूनी प्रावधान की जरूरत महसूस की गई। इससे जीवाश्म ईंधन की खपत कम करने में मदद मिलेगी और वातावरण में कार्बन उत्सर्जन कम होगा।’
हरित ईंधन की खपत बढ़ाने का प्रस्ताव तब आया है, जब इस क्षेत्र से जुड़ी दिग्गज कंपनियां अदाणी एंटरप्राइजेज, रिलायंस इंडस्ट्रीज, रीन्यू पावर और एसीएमई ने हरित ईंधन उत्पादन के क्षेत्र में उतरने की घोषणाएं की हैं। अदाणी न्यू इंडस्ट्रीज ने ग्रीन हाइड्रोजन तथा इससे संबं​धित तंत्र और 2030 से पहले सालाना 10 लाख टन क्षमता वाला ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र वि​कसित करने के लिए अगले 10 साल में 50 अरब डॉलर (3.9 लाख करोड़ रुपये) निवेश करने की योजना बनाई है। रिलायंस इंडस्ट्रीज पिछले साल ही हरित ऊर्जा और हरित ईंधन कारोबार में उतर चुकी है। कंपनी ने घोषणा की थी कि वह एक दशक के अंदर ग्रीन हाइड्रोजन की कीमत घटाकर 1 डॉलर प्रति किलोग्राम तक लाएगी। 

निजी क्षेत्र को कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए प्रोत्साहित करने के मकसद से केंद्र सरकार देश के पहले कार्बन ट्रेडिंग बाजार के लिए कानूनी ढांचा तैयार करना चाहती है। 2012 में दुनिया भर में कार्बन क्रेडिट की कीमतें घटने के कारण इसका बाजार कम हो गया था। लेकिन अब उसमें सुधार हो रहा है। विक​सित देशों ने स्वच्छ विकास प्रणाली के लिए वित्तीय मदद भी बंद कर दी है।

केंद्र सरकार ने विधेयक के प्रस्ताव में कहा है कि कार्बन उत्सर्जन कम करने की कवायद को बढ़ावा देने के लिए कार्बन बाजार का कानूनी ढांचा बनाना जरूरी है। इससे स्वच्छ ऊर्जा और ऊर्जा दक्ष क्षेत्रों में निजी कंपनियों का निवेश भी बढ़ेगा। कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए ‘कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना’ शुरू की जाएगी और उत्सर्जन लक्ष्य हासिल करने वालों को प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। इन प्रमाणा पत्रों की खरीद-बिक्री उनके साथ की जा सकेगी, जो अपने उत्सर्जन लक्ष्य पूरे करने में नाकाम रहते हैं।

विधेयक में ज्यादा से ज्यादा क्षेत्रों को शामिल करते हुए जुर्माने का प्रावधान भी बदला गया है। ऊर्जा सरंक्षण में चूक करने वालों के लिए जुर्माने की रा​शि पहले जितना ही रखी गई है, लेकिन इसमें ऑडिटिंग, वाहन आदि क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है। ईंधन खपत नियमों के अनुपालन में नाकाम रहने वाले वाहन विनिर्माताओं को उससे पिछले साल बेचे गए हरेक वाहन के बदले अतिरिक्त जुर्माना देना होगा। विधेयक के अनुसार 0.2 लीटर प्रति 100 किलोमीटर तक के नियम का पालन नहीं करने पर प्रति वाहन 25,000 रुपये और 0.2 लीटर प्रति 100 किलोमीटर से अ​धिक के मामले में 50,000 रुपये प्रति वाहन जुर्माना लगेगा। इससे ऊपर के अनुपालन में चूक पर प्रति वाहन 10 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।  ऊर्जा संरक्षण इमारत संहिता के दायरे का विस्तार कर बड़े आवासीय परिसर भी शामिल किए गए हैं। केंद्र की योजाना क्षेत्रीय और स्थानीय जलवायु परिस्थितियों के हिसाब से ऊर्जा संरक्षण इमारत संहिता में संशोधन करने की है।

जलवायु परिवर्तन पर एनडीसी को मंजूरी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन प्रारूप सम्मलेन को सूचना दिए जाने के लिए भारत के अद्यतन किए गए राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (एनडीसी) को आज मंजूरी दे दी। इस मंजूरी ने सीओपी-26 में घोषित प्रधानमंत्री के ‘पंचामृत’ को उन्नत जलवायु लक्ष्यों में परिवर्तित कर दिया है। बयान में कहा गया कि 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का भारत का दीर्घकालिक लक्ष्य हासिल करने की दिशा में यह जरूरी कदम है। इसमें कहा गया है कि भारत अब अपने सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन तीव्रता को 2030 तक 45 प्रतिशत तक कम करने के लिए प्रतिबद्ध है।  

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First Published - August 4, 2022 | 10:29 AM IST

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