भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के सदस्य सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि प्रमुख संकेतक आर्थिक मजबूती के संकेत दे रहे हैं, साथ ही गति में कमी के भी संकेत मिले हैं। इसकी वजह से पिछले वित्त वर्ष की तुलना में वित्त वर्ष 2027 में कम वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। मनोजित साहा के साथ टेलीफोन पर नई दिल्ली से बातचीत में भट्टाचार्य ने कहा कि पश्चिम एशिया शांति संधि के बाद भी वृद्धि-महंगाई संतुलन का दृष्टिकोण अनिश्चित बना हुआ है। संपादित अंश:
मौद्रिक नीति समिति की बैठक के ब्योरे में आपने कहा कि वृद्धि और महंगाई दर को लेकर अनिश्चितता है। युद्ध समाप्त होने की संभावना बढ़ने के साथ क्या आपको लगता है कि स्थिति साफ हुई है?
सबसे पहले मैं साफ कर दूं कि ये विचार मेरे अपने हैं, एमपीसी के नहीं। वृद्धि और महंगाई दर को लेकर एमपीसी का अनुमान अन्य आंकड़ों के अलावा कच्चे तेल की औसत कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल पर आधारित थे। यह अब कम होने की संभावना है। आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान कुछ समय तक बनी रह सकती है और ऐसे में वित्त वर्ष 2027 में वृद्धि की रिकवरी और महंगाई दर की चाल को लेकर अनुमान लगाना मुश्किल है। वृद्धि व महंगाई दर को लेकर एमपीसी के ताजा अनुमान संभवतः अभी सबसे अच्छे संकेतक हैं।
जून की बैठक के बाद से कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज गिरावट और होर्मुज स्ट्रेट के खुलने की उम्मीद के बीच क्या आपको लगता है कि एमपीसी वृद्धि के समर्थन में आ सकती है?
एमपीसी का काम वृद्धि को ध्यान में रखते हुए कीमतों में स्थिरता बनाए रखना है। साफतौर पर यह करना कठिन कवायद है। बैठक के बाद आए खुदरा महंगाई दर के आंकड़ों से इनपुट लागत में वृद्धि का कुछ बोझ ग्राहकों पर डाले जाने के संकेत मिल रहे हैं। इनके आगे चलकर असर पर नजर रखने की जरूरत है कि खुदरा महंगाई व्यापक रूप से न फैल जाए। जैसा कि मैंने अपने बयान में कहा है कि संधि के बाद भी वृद्धि- महंगाई दर के बीच संतुलन को लेकर स्थिति अनिश्तित बनी हुईहै।
पश्चिम एशिया में 4 महीनों से चल रहे संघर्ष का असर वृद्धि पर अधिक है, या महंगाई दर पर?
एमपीसी की समीक्षा के समय वृद्धि व महंगाई दर दोनों के लिए जोखिम था। प्रमुख संकेतक आर्थिक मजबूती के संकेत दे रहे थे, लेकिन उससे गति में कमी के भी संकेत मिले। यही कारण है कि वित्त वर्ष 2027 में जीडीपी वृद्धि का अनुमान पिछले वित्त वर्ष के 7.6 प्रतिशत अनुमान की तुलना में घटकर6.6 प्रतिशत था। अगर वृद्धि कम होती है तो खर्च करने की क्षमता कम होने से कंपनियों की कीमत बढ़ाने की शक्ति घटती है। ऐसी स्थिति में महंगाई दर का अनुमान लगाना मुश्किल है। इसमें बहुत ज्यादा अनिश्तितता शामिल है।
क्या मॉनसून की कमी रिजर्व बैंक के वित्त वर्ष 2027 के लिए महंगाई के अनुमान पर प्रतिकूल असर डाल सकती है?
अपर्याप्त बारिश की संभावना खाद्य महंगाई के लिए जोखिम है। अगर ऐसा होता है तो सरकार के सक्रिय कदमों के बावजूद खाद्य पदार्थों के महंगे होने की संभावना है। हालांकि आमदनी घटने की स्थिति को देखते हुए विवेकाधीन व्यय पर पड़े असर पर नजर रखने की जरूरत है। यह तीसरे दौर का प्रभाव है।
रिजर्व बैंक और सरकार ने विदेशी आवक बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं। क्या आपको लगता है कि आवक से वित्त वर्ष 2027 में बीओपी घाटे की भरपाई हो सकेगी?
केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक के मिली जुली कवायदों से विदेशी मुद्रा की आवक बढ़ने का अनुमान अर्थशास्त्रियों और विश्लेषकों ने लगाए हैं। मीडिया रिपोर्टों में इसका विश्लेषण किया गया है। इस आवक से चालू खाते का घाटा संतुलित होगा। पश्चिम एशिया के समझौते से मिल रहे शुरुआती संकेतों को देखते हुए मुझे उम्मीद बनी हुई है।
विदेशी आवक को आकर्षित करने के उपायों के बाद रिजर्व बैंक की नकदी प्रबंधन रणनीति किस दिशा में है?
मैं अर्थशास्त्री के रूप में नकदी प्रबंधन पर बोलता हूं, यह एमपीसी के दायरे में नहीं आता। हालांकि रीपो दर के बारे में फैसला लेने में इसकी बड़ी भूमिका है। रिजर्व बैंक ने पिछले कई साल से व्यवस्था में नकदी पर्याप्त स्तर पर बनाए रखा है। विदेशी मुद्रा की आवक से घरेलू बाजार में स्वतः नकदी बढ़ेगी।