वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक भारत के 8 मुख्य क्षेत्रों की वृद्धि मई में घटकर सात महीने के निचले स्तर 0.5 प्रतिशत पर आ गई, जो अप्रैल में (संशोधित आंकड़ों के अनुसार) 1.8 प्रतिशत थी। सूचकांक में 28.04 का सबसे अधिक भार रखने वाले पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पादों का उत्पादन मई में तेजी से घटकर 8.7 प्रतिशत पर आ गया, जो पिछले 42 महीनों का सबसे निचला स्तर है। अप्रैल में इन उत्पादों के उत्पादन में 0.5 प्रतिशत की हल्की गिरावट दर्ज की गई थी। कोयला उत्पादन में भी मई में 9.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले 10 महीनों का सबसे कम स्तर है।
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस के अनुसार कोयला उत्पादन में नकारात्मक वृद्धि इसलिए हुई क्योंकि कंपनियों ने इन्वेंटरी को अधिक कुशल तरीके से प्रबंधित करने पर ध्यान दिया और उत्पादन में कटौती की। आंकड़ों के अनुसार 8 में से 5 क्षेत्रों में उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई, जबकि केवल इस्पात, सीमेंट और बिजली उत्पादन में वृद्धि देखी गई। कच्चे तेल का उत्पादन मई में 4.6 प्रतिशत घटा, जो पिछले महीने की 3.9 प्रतिशत गिरावट से अधिक है, जबकि प्राकृतिक गैस उत्पादन में गिरावट बढ़कर 3 महीने के निचले स्तर 4.9 प्रतिशत पर पहुंच गई।
उर्वरक उत्पादन में गिरावट कम हुई और यह अप्रैल के 8.6 प्रतिशत की तुलना में मई में 0.9 प्रतिशत रह गई। भीषण गर्मी के बीच मांग बढ़ने से बिजली उत्पादन मई में 24 महीने के उच्च स्तर 8.7 प्रतिशत पर पहुंच गया, जो अप्रैल के 5.6 प्रतिशत से अधिक है। इक्रा के प्रधान अर्थशास्त्री राहुल अग्रवाल ने कहा कि बिजली क्षेत्र की तेज वृद्धि ने कुल कोर आउटपुट को सकारात्मक दायरे में बनाए रखा।