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कंपनियों के लिए पांच गुना ज्यादा महंगाई

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Last Updated- December 06, 2022 | 11:43 PM IST

बढ़ती कीमतों की चुभन से सबसे ज्यादा दर्द उद्योग घरानों को हो रहा है। उनकी कारोबारी लागत 35 फीसदी तक बढ़ गई है जो थोक मूल्य सूचकांक के स्तर के मुकाबले करीब 5 गुना ज्यादा है।


सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स द्वारा पेश रिपोर्ट के मुताबिक उद्योग घरानों को इकाई लगाने या फिर उत्पादन क्षमता का विस्तार करने, वितरण एवं फ्रैंचाइजी इकाई बैठाने या फिर भारत में निवेश आदि में महंगाई का सामना करना पड़ रहा है। सिटीग्रुप ने इस अवधारणा को ‘कारोबारी महंगाई’ का नाम दिया है।


रिपोर्ट के मुताबिक भारत में कारोबार शुरु करना या चलाना काफी महंगा सौदा साबित हो रहा है। यही वजह है कि कंपनियों का लाभ प्रभावित हो रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि परिसंपत्ति, पूंजी और सेवाओं पर आधारित कारोबार शुरु करने की लागत पिछले 3 साल में काफी तेजी से बढ़ी है और कारोबारी महंगाई सालाना 10 से 35 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रही है। 


सिटीग्रुप के विश्लेषक आदित्य नारायण ने रिपोर्ट में कहा ‘निकट भविष्य में कारोबारी महंगाई में तेजी बरकरार रहने की उम्म्मीद है।’ उल्लेखनीय है कि देश में मुद्रास्फीति की दर 4 फीसदी से बढ़कर 7 फीसदी से ऊपर पहुंच चुकी है और पिछले कई हफ्तों से यह बाजार की सुर्खियों में है। लेकिन कारोबारी महंगाई की तरफ बहुत कम लोगों का ही ध्यान गया है।


उन्होंने कहा कि कारोबारी महंगाई में इस्पात, भूमि, किराए, श्रम और पूंजी की लागत शामिल है जिसमें काफी तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एक कारोबार को चलाने के लिए उक्त संसाधनों की जरूरत पड़ती है।  नारायण ने कहा यह अलग बात है कि  कारोबार महंगाई का दबाव वैश्विक है।

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First Published - May 15, 2008 | 10:26 PM IST

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