प्रमुख वाहन कंपनी टोयोटा किर्लोस्कर मोटर (टीकेएम) भारतीय परिचालन को लेकर प्रतिबद्घ बनी हुई है, हालांकि कंपनी ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि उसने महामारी के दौर में सरकार से उपयुक्त कर संरचना का अनुरोध किया है। कंपनी ने कहा है, ‘हम ऐसी स्थिति को पसंद करेंगे जिसमें हम भारतीय बाजार और देश में अपने परिचालन के प्रति वचनबद्घ बने रहें। भारत हमारी वैश्विक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।’
कंपनी का यह बयान ब्लूमबर्ग की उस रिपोर्ट के बाद आया है जिसमें कहा गया कि टोयोटा ने भारत में विस्तार की कोई योजना नहीं बनाई है। कंपनी ने इसके लिए ऊंचे कर की व्यवस्था को कारण बताया था।
ब्लूमबर्ग ने टीकेएम के वाइस चेयरमैन शेखर विश्वनाथन के हवाले से कहा, ‘किसी सुधार के अभाव में हम भारत से नहीं निकले, लेकिन हम यहां अपना दायरा नहीं बढ़ाएंगे।’
भारत के यात्री वाहन बाजार में 3 प्रतिशत से कम की बाजार भागीदारी के साथ टीकेएम भी अन्य वाहन कंपनियों की तरह कोविड-19 महामारी से प्रभावित हुई है।
भारत में वाहन बिक्री महामारी से काफी पहले, सितंबर 2019 से ही कमजोर हुई है, क्योंकि कई नियम और स्वामित्व की ऊंची लागत तथा धीमी अर्थव्यवस्था से खरीदार प्रभावित हुए हैं। इसके परिणामस्वरूप बिक्री वित्त वर्ष 2019-20 में घट गई।
पिछले महीने बिजनेस स्टैंडर्ड के साथ एक साक्षात्कार में विश्वनाथन ने कहा था कि कंपनी निर्धारित लागत घटाने के प्रयास में उत्पाद पेशकशों से लेकर विपणन और बिक्री खर्च तक, परिचालन के सभी पहलुओं पर पुनर्विचार कर रही है।
ऑटोमोबाइल को सिन गुड्स के तौर पर श्रेणीबद्घ किया गया है जिन पर 28 प्रतिशत दर लागू है, जो जीएसटी में सर्वाधिक ऊंचा कर स्लैब है। भारत के वाहन उद्योग का निर्माण जीडीपी में 49 प्रतिशत का योगदान है।
टीकेएम ने एक बयान में कहा, ‘कोविड-19 के प्रभाव की वजह से गहराई मंदी के बीच, वाहन उद्योग ने सरकार से एक उचित कर ढांचे के जरिये इस उद्योग को बचाए रखने का अनुरोध किया है। उसे उम्मीद है कि सरकार इस उद्योग और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए हरसंभव कदम उठाएगी।’
प्रौद्योगिकी और श्रेष्ठ कार्य प्रणालियां साझा करने के संबंध में भारत में सुजूकी के साथ टोयोटा की ताजा भागीदारी सरकार की मेक इन इंडिया पहल के अनुरूप भी है और इसका मकसद दोनों कंपनियों की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ाना है।