घरों की साफ-सफाई करने वाले उत्पादों का बाजार दिनोंदिन बढ़ता ही जा रहा है। लेकिन रेकिट बेंकिार और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसी बड़ी मछलियों के चारे को खा रही हैं कई छोटी-छोटी कंपनियां।
एसी नेलसन की रिटेल ऑडिट रिपोर्ट की मानें तो मुल्क में ब्रांडेड टॉयलेट क्लिनरों का बाजार चालू वित्त वर्ष के खत्म होते-होते 130 करोड़ रुपये के स्तर को छू लेगा।
पिछले साल के 112 करोड़ रुपये के स्तर से यह 16 फीसदी ज्यादा होगा। दूसरी तरफ फ्लोर क्लिनरों का बाजार इस साल मार्च के अंत तक 30 फीसदी बढ़कर 75 करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंच जाएगा।
हालांकि, बाजार का नेतृत्व करने वाली रेकिट बेंकिार का कहना है कि नए ब्रांड अब उसके टॉयलेट क्लिनर हार्पिक का बाजार खा रहे हैं।
पिछले वित्त वर्ष के अंत में इसका 77 फीसदी बाजार पर कब्जा था, जबकि नवंबर के अंत यह कब्जा सिमट कर 70 फीसदी रह गया था।
कमाई के मामले में भी देखें तो पिछले वित्त वर्ष के अंत में इस बाजार की 80 फीसदी कमाई हार्पिक से आती थी, जबकि नवबंर, 2008 के आंकड़ों को देखें तो यह घटकर सिर्फ 73 फीसदी के स्तर तक सिमट कर रह गई।
दूसरी तरफ, डाबर इंडिया की अलग-अलग उत्पादों को लाने और ब्रांड अम्बैस्डर को तैनात करने की रणनीति रंग दिखाती नजर आ रही है। उसके ब्रांड ‘सैनिफ्रेश’ की बाजार में हिस्सेदारी आठ फीसदी से बढ़कर 13.5 फीसदी हो चुकी है।
इसी के साथ इस ब्रांड ने ‘डोमैक्स’ से भी नंबर दो की कुर्सी भी हथिया ली। वहीं, नंबर दो की कुर्सी से उतरने के बाद भी डोमैक्स की बाजार में हिस्सेदारी 8.1 फीसदी से बढ़कर नवंबर में 11.7 फीसदी हो चुकी थी। डावर के प्रवक्ता ने बताया कि, ‘हमने ‘सैनिफ्रेश’ को जुलाई 2008 में ‘सैनिफ्रेश शाइन’ के रूप में फिर से लॉन्च किया था।
साथ ही, हमने साक्षी तंवर को भी बतौर ब्रांड अम्बैस्डर साइन किया। नए विज्ञापन कैंपन और फिर हमें लोगों के घरों का रास्ता खुद ही मिल गया।’
दूसरी तरफ, ब्रांडेड फ्लोर क्लिनरों के हिंदुस्तानी बाजार में 2008 में केविनकेयर (टॉप मॉप), एससी जॉनसन (मिस्टर मशल) और डाबर इंडिया (डैजल) उतरे।