दवाओं के लिए शीशी बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी स्कॉट कैशा का मानना है कि कोविड-19 टीके के लिए शीशी की वार्षिक बिक्री तिगुनी से अधिक होगी। कोविड-19 की दूसरी लहर कहीं अधिक संक्रामक एवं घातक है और इसे देखते हुए सीरम इंस्टीट्यूट सहित उसके शीर्ष ग्राहकों ने अपना उत्पादन काफी बढ़ा दिया है। इससे शीशी की मांग बढ़ेगी।
विशेषीकृत शीशा विनिर्माता स्कॉट एजी और जर्मनी की कंपनी कैशा के इस संयुक्त उद्यम का मानना है कि वित्त वर्ष 2021-22 में कोविड टीके के लिए करीब 38 करोड़ शीशी की बिक्री होगी जो एक साल पहले के मुकाबले 113 फीसदी अधिक है। स्कॉट कैशा के निदेशक ऋषद दादाचनजी ने यह बात कही। उन्होंने कहा, ‘हमारे प्रमुख ग्राहकों से मांग दोगुना बढ़ गई है और इससे संकेत मिलता है कि निकट भविष्य में मांग तीन गुना बढ़ जाएगी।’ एस्ट्राजेनेका के कोविड-19 टीके का उत्पादन करने वाली कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया जुलाई से हर महीने 10 करोड़ खुराक का उत्पादन करने की तैयारी कर रही है जबकि फिलहाल वह 7 करोड़ खुराक का उत्पादन करती है। आमतौर पर एक शीशी में टीके की कई खुराक रखी जा सकती है।
भारत टीका उत्पादन का एक प्रमुख केंद्र है जहां फिलहाल अपने लोगों के लिए कोविड-19 के टीके का जोरशोर से उत्पादन चल रहा है। अप्रैल के मध्य से अब तक इस वैश्विक महामारी के कारण भारत में करीब 1,14,000 लोगों की मौत हो चुकी है।
दादाचनजी ने कहा कि स्कॉट कैशा रूसी टीका स्पूतनिक वी के भारतीय विनिर्माताओं को भी शीशियों की आपूर्ति करने के लिए बातचीत कर रही है लेकिन फिलहाल कोई ऑर्डर नहीं मिला है। उन्होंने कहा, ‘हमसे पूछताछ की गई है। इस मुद्दे पर बातचीत अभी भी जारी है।’
दवाओं और टीकों को रखने में इस्तेमाल होने वाले ट्यूबलर बोरोसिलिकेट शीशियां बनाने वाली भारत की सबसे बड़ी कंपनी स्कॉट कैशा कोविड-19 के 14 टीकों के लिए शीशियों की आपूर्ति कर रही है। इनमें से कुछ टीके का वाणिज्यिक उत्पादन हो रहा है और कुछ विकास के चरण में हैं।
कंपनी इस साल के अंत तक अपनी वार्षिक क्षमता को बढ़ाकर 1.7 अरब शीशी करने की योजना बना रही है। पिछले साल उत्पादन क्षमता 1.2 अरब शीशियों की थी। कंपनी के खुद के आकलन के अनुसार उसकी बाजार हिस्सेदारी 60 से 65 फीसदी है।