विषैले चीनी खिलौनों का आयात रुकने से खाली हुए 1400 करोड़ रुपये के भारतीय खिलौना बाजार को हथियाने के लिए खिलौना निर्माताओं में होड़ मच गई है।
बढ़ती मांग के मद्देनजर संगठित कंपनियां छोटे अंसगठित खिलौना निर्माताओं से साझा करने की योजना बना रही हैं। वहीं असंगठित खिलाड़ियों ने भी अपने उत्पादन को बढ़ाने के लिए काम के समय में 3 से 4 घंटे की बढ़ोतरी व नए कारीगरों की भर्तियां शुरु कर दी हैं।
कुछ कारोबारी इस मौके का फायदा उठाने के लिए बैंक से ऋण लेकर उत्पादन में बढ़ोतरी करने की योजना बना रहे हैं। साथ ही कुछ कारोबारी ब्रांडिंग के जरिये अपने उत्पाद को बाजार में स्थापित करना चाहते हैं।
टॉया एसोसिएशन ऑफ इंडिया (टीएओई) के अध्यक्ष राजकिशोर का कहना है कि इतने बड़े बाजार पर अपनी पकड़ बनाने के लिए अभी हमने अपनी रणनीति को तैयार नहीं किया है। इसके लिए हम 29 तारीख को खिलौना निर्माताओं के साथ एक बैठक करने वाले हैं।
टीएओई के पूर्व अध्यक्ष विष्णु स्वरूप अग्रवाल का कहना है कि चीन से खिलौना आयात रुकने के बाद भारतीय खिलौना निर्माण इकाइयों की उत्पादन दर में 20 से 30 फीसदी की बढ़ोतरी होगी। अभी भारत का खिलौना कारोबार सालाना चार हजार करोड़ रुपये का है।
इसका 40 फीसदी(1600 करोड़ रुपये) विदेशों से आयात होता है। विदेशों से आयातित खिलौने में भी चीन से आयातित खिलौनों की हिस्सेदारी करीब 90 फीसदी (1400 करोड़ रुपये) है।
टीएओई के अधिकारियों के मुताबिक इसके लिए कुछ संगठित कंपनियां छोटे स्तर पर खिलौने का निर्माण करने वाले निर्माताओं से साझा करने की योजना पर भी काम कर रही हैं।
पैराडाइस टॉया मेकर्स के प्रमुख आर. एन. श्रीवास्तव बताते हैं कि, ‘पहले घरेलू बाजार में चीनी खिलौनों से प्रतिस्पर्धा के चलते हमारे खिलौनों की 60 फीसदी खपत दूसरे देशों को होती थी।
लेकिन अब घरेलू बाजार के भी खाली होने के कारण हम अपने उत्पादन को 30 फीसदी तक बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।