टेलीकॉम

TRAI की बड़ी सिफारिश: वित्त वर्ष 2027 तक हो स्पेक्ट्रम नीलामी, रिजर्व प्राइस में भी कटौती का प्रस्ताव

साथ ही उसने सुझाव भी दिया है कि जो कंपनियां दिवाला समाधान प्रक्रिया से गुजर रही हैं उनके पास मौजूद स्पेक्ट्रमों को तुरंत वापस लेकर दोबारा नीलाम किया जाए

Published by
बीएस संवाददाता   
Last Updated- February 24, 2026 | 10:26 PM IST

भारत के दूरसंचार नियामक ने सिफारिश की है कि दूरसंचार विभाग (डीओटी) को वित्त वर्ष 2027 के भीतर स्पेक्ट्रम नीलामी करानी चाहिए। इससे दूरसंचार कंपनियों को नेटवर्क विस्तार और नई तकनीकों में निवेश को लेकर स्पष्टता मिलेगी। साथ ही उसने सुझाव भी दिया है कि जो कंपनियां दिवाला समाधान प्रक्रिया से गुजर रही हैं उनके पास मौजूद स्पेक्ट्रमों को तुरंत वापस लेकर दोबारा नीलाम किया जाए।

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने सिफारिश की है कि 600 मेगाहर्ट्ज, 800 मेगाहर्ट्ज, 900 मेगाहर्ट्ज, 1800 मेगाहर्ट्ज, 2100 मेगाहर्ट्ज, 2300 मेगाहर्ट्ज, 2500 मेगाहर्ट्ज, 3300 मेगाहर्ट्ज और 26 गीगाहर्ट्ज बैंड में उपलब्ध सभी स्पेक्ट्रम को बिक्री के लिए रखा जाए। ट्राई ने 2024 की तुलना में अधिकांश बैंड के लिए आरक्षित मूल्य भी कम कर दिया है।

नई योजना का प्रस्ताव करते हुए ट्राई ने कहा कि नीलामी में सफल बोलीदाता अगर ऐसे क्षेत्र जहां नेटवर्क कमजोर हो, वहां नए बेस स्टेशन स्थापित करते हैं तो वे स्पेक्ट्रम की लागत में 10 फीसदी तक कम करने में सक्षं होंगे। फिलहाल, दूरदराज के इलाकों में दूरसंचार साइट बनाने के लिए डिजिटल भारत निधि के पैसों से कंपनियों को वित्तीय सहायता दी जाती है।

ट्राई ने नई कंपनियों के लिए नेटवर्थ की आवश्यकता घटाने का भी प्रस्ताव किया है और उनके लिए प्रति सर्कल न्यूनतम नेटवर्थ 50 करोड़ रुपये की गई है। जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के लिए इसे 50 करोड़ से घटाकर 25 करोड़ रुपये किया जाएगा, जिससे बाजार में अधिक कंपनियों के शामिल होने का रास्ता खुलेगा।

उसने यह भी सिफारिश की है कि किसी कंपनी को कुल उपलब्ध स्पेक्ट्रम का 35 फीसदी से अधिक नहीं खरीदने की अनुमति होगी। इसका उद्देश्य बाजार में प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना है। ट्राई ने 6 गीगाहर्ट्ज (ऊपरी) बैंड 6425–6725 मेगाहर्ट्ज और 7025–7125 मेगाहर्ट्ज को 2027 की वर्ल्ड रेडियोकम्युनिकेशन कॉन्फ्रेंस (डब्ल्यूआरसी) के परिणाम आने तक नीलामी से बाहर रखने का सुझाव। नियामक ने यह भी प्रस्ताव रखा कि 6जी स्पेक्ट्रम खरीदने वाली कंपनियों को चार साल तक परीक्षण करने की अनुमति दी जाएगी।

600 मेगाहर्ट्ज बैंड के लिए ट्राई ने 4 साल के लिए भुगतान पर रोक और रोलआउट में देरी की जवाबदेही का प्रस्ताव रखा है ताकि 1 गीगाहर्ट्ज से कम वाले नेटवर्क कवरेज में निवेश को प्रोत्साहन मिल सके। लाइसेंस अवधि सामान्यत: 20 साल की होती है लेकिन 600 मेगाहर्ट्ज बैंड के लिए 24 साल की सिफारिश की गई है। नियामक के अनुसार, इससे कंपनियों को लंबी अवधि के निवेश योजना बनाने और बेहतर तथा व्यापक कवरेज सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

ट्राई ने यह भी सुझाव दिया है कि सरकार को स्पेक्ट्रम वापस करने की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए। साथ ही, 2300 मेगाहर्ट्ज से 40 गीगाहर्ट्ज बैंड में विशेष मात्रा में स्पेक्ट्रम इंटरनेट सेवा प्रदाताओं, एम2एम प्रदाताओं और घरेलू गैर-सार्वजनिक नेटवर्क (सीएनपीएन) के लिए अलग रखा जाए।

First Published : February 24, 2026 | 10:26 PM IST