टेलीकॉम गियर निर्माताओं को दूरसंचार कंपनियों ने ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं क्योंकि सरकार की तरफ से उपकरण खरीद से संबंधित उनके आवेदन को मंजूरी नहीं मिली है। आवेदन को प्रमाणीकृत कराना होता है कि यह विश्वस्त स्रोत से लिया जा रहा है और उत्पाद भी भरोसे का है। यह दूरसंचार उत्पादों की सुरक्षा से जुड़े नए नियमों का हिस्सा है। ऐसे प्रमाणीकरण के बिना परिचालक अपने वेंडरों को नया ऑर्डर नहीं दे सकते क्योंकि उन्हें नहीं पता कि यह विश्वस्त श्रेणी में है या नहीं और इस्तेमाल के लिए तैयार है या नहीं। साथ ही टेलीकॉम गियर निर्माता न तो इसका आयात कर सकते हैं और न ही इस उपकरण का विनिर्माण कर सकते हैं, जिसमें कई हफ्तोंं का वक्त लगता है। उनका कहना है कि इस कदम से देश में उनकी योजना को झटका लग सकता है।
सरकार ने 15 जून को ट्रस्टेड टेलीकॉम पोर्टल शरू किया था और टेलीकॉम गियर निर्माताओं ने कहा कि उन्होंने उत्पादों के स्रोत व मूल स्थान की विस्तृत जानकारी दी है। लेकिन करीब 10 हफ्ते बीत चुके हैं और इस पर आगे कुछ भी जवाब नहीं मिला है। टेलीकॉम गियर निर्माताओं ने दूरसंचार विभाग से संपर्क साधा है और कहा है कि किसके लिए उन्हें विस्तृत जानकारी देनी है ताकि प्रक्रिया में तेजी आए। ग्लोबल टेलीकॉम गियर निर्माता के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, दूरसंचार कंपनियों के लिए बनाए जाने वाले उपकरणों पर वे छह महीने से नुकसान उठा रहे हैं। यह देश में डिजिटलीकरण की प्रक्रिया में देर करेगा। यह कारोबारी सुगमता से पूरी तरह से पलटाव है।
हुआवे जैसी कंपनियों ने आवेदन किया है और सूत्रों का कहना है कि 5जी उपकरणों के लिए कंपनी ने मंजूरी मांगी है। हआवे ने हालांकि इस मसले पर टिप्पणी करने से मना कर दिया। कंपनी का कहना है कि नियम उन्हें देश के टेलिकॉम गियर मार्केट में भागीदारी से नहीं रोकता। अन्य कंपनी एरिक्शन ने भी 5जी उपकरणों की मंजूरी के लिए आवेदन किया है। टेलीकॉम गियर निर्माताओं ने कहा कि 5जी उपकरणों के मामले में इस तरह की देरी से इसे शुरू करने में काफी देरी हो सकती है, खास तौर से 5जी सेवा के लिए सरकार की तरफ से स्पेक्ट्रम की नीलामी के बाद। 5जी पेश करने के मामले में भारत अन्य देशों से काफी पीछे है।
नैशनल सिक्युरिटी डायरेक्टिव फॉर टेलीकॉम ने सेवा प्रदाताओं को उन सभी दूरसंचार उपकरणों पर ‘ट्रस्टेड’ टैग लेना अनिवार्य बना दिया है जिन्हें दूरसंचार कंपनियां मूल उपकरण निर्माताओं (ओईएम) से खरीदना चाहती हैं। विश्लेषकों का कहना है कि चीनी दूरसंचार उपकरणों पर प्रतिबंध के प्रयास में ऐसा किया गया है, लेकिन वे पूरी तरह प्रतिबंध से अलग है, जैसा कि कुछ देशों ने किया है। उप-राष्टï्रीय सुरक्षा सलाहकार के नेतृत्व वाली नैशनल सिक्युरिटी कमेटी ऑफ टेलिकॉम यह निर्णय लेगी कि टैग किसे दिया जाएगा।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिका ने चीनी उपकरण खरीद बंद करने के लिए अपने वैश्विक सहयोगियों को राजी करने की कोशिश की है, क्योंकि ऐसे उपकरण का जासूसी के लिए गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है। ब्रिटेन, जापान और आस्ट्रेलिया जैसे देशों ने चीनी टेलीकॉम गियर पर सख्त प्रतिबंध लगा दिए हैं। इसकी वजह से भारतीय ओईएम को कई तरह के विवरण देने होंगे, जिनमें उत्पाद, संगठन, उसके शीर्ष-10 शेयरधारकों की जानकारी, उत्पत्ति वाले देश की जानकारी आदि मुख्य रूप से शामिल हैं।