ऐसा लगता है कि कॉर्पोरेट बॉन्ड बाजार में एक बार फिर से अपनी पुरानी पहचान वापस पा रहा है। टाटा कैपिटल के अपरिवर्तनीय डिबेंचर्स (एनसीडी) के पब्लिक इश्यू की शुक्रवार तक 800 करोड रुपये से ज्यादा की खरीदारी हुई है जो अनुमान से कहीं ज्यादा है।
इस खरीदारी में बड़े क़ारोबारियों और संस्थानों के भागीदारी करने से पब्लिक इश्यू ने जबरदस्त कारोबार किया है। गौरतलब है कि टाटा कैपिटल का यह इश्यू 2 फरवरी को बाजार में खरीदारी के लिए खुला था जो मंगलवार को बंद हो जाएगा।
एनसीडी इश्यू के प्रदर्शन को लेकर काफी चितिंत रहे टाटा समूह की गैर-बैंकिंग वित्तीय इकाई टाटा कैपिटल ने ग्रीन-शू ऑप्शन के साथ अतिरिक्त 1,000 करोड़ रुपये के अलावा 500 करोड रुपये जुटाने की योजना बनाई थी। इस पूरे प्रकरण पर नजर रख रहे एक सूत्र ने कहा कि शुक्रवार तक कंपनी ने 2,300 करोड़ रुपये तक जुटा लिये हैं।
कंपनी के एनसीडी के इस कदर जबरदस्त प्रदर्शन करने पर सूत्र का कहना था कि बैंकरों सहित किसी ने भी एनसीडी को इस तरह हाथों-हाथ लिए जाने की आशा नहीं थी। सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट इंडिया, आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज और डीएसपी मेरिल लिंच इस इश्यू के अग्रणी प्रबंधकों में से एक हैं।
अभी तक कंपनी को खुदरा निवेशकों से 75,000 आवेदन मिले हैं जबकि कुल आवेदन की सीमा 100,000 है। इस इश्यू के खुले रहने के अंतिम दो दिनों में खुदरा निवेशकों के आवेदन सीमा के बहुत नजदीक तक आ जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
उल्लेखनीय है कि टाटा कैपिटल पूंजी बाजार, हाउसिंग फाइनैंस, परिसंपत्ति प्रबंधन, वाहन ऋण, रिटेल फाइनैंस, मचर्ेंट बैंकिंग और प्राइवेट इक्विटी इन्वेस्टमेंट के क्षेत्र में अपनी सेवा मुहैया कराती है। कंपनी साल भर के और क्यूमुलेटिव पेमेंट ऑप्शन पर 12 फीसदी का ब्याज दे रही है।
टाटा कैपिटल के एनसीडी के बाजार में बेहतर प्रदर्शन करने के बाबत आईडीबीआई गिल्ट के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्य अधिकारी एन एस वेंकटेश ने कहा कि निश्चित तौर यह कॉर्पोरेट बॉन्ड के प्राइमरी मार्केट के छोटे स्तर पर ही सही पर अपने अस्तित्व में आने का संकेत है।
वेंकटेश ने कहा कि ऐसे लोग जिन्होंने इक्विटी मार्केट में निवेश कर काफी नुकसान उठाया है, वे अब सरकारी प्रतिभूतियों और कॉर्पोरेट बॉन्ड की तरफ अपना रुख कर रहे हैं। मौजूदा समय में दस सालों वाले बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड पर 6.24 फीसदी का रिटर्न मिल रहा है जो तीन महीने पहले के स्तर से 100 आधार अंक कम है।
गौरतलब है कि पिछले तीन महीनों के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 300 आधार अंकों तक की कटौती कर चुकी है। ब्याज दरों में बदलाव आने के साथ भी इन प्रतिभूतियों पर मिल रहे रिटर्न में भी काफी कमी आई है।
फिलहाल कंपनियां समान परिपक्वता वाले पेपर पर रिस्क फ्री इल्ड से 250-300 आधार अंकों से ज्यादा का मुनाफा दे रहे हैं। ये अभी भी 10 फीसदी ज्यादा का भुगतान करती हैं जिससे मुद्रा बाजार में विश्वास की कमी की दास्ता को स्पष्ट रूप से बयां करता है।
हाल में ही रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपने एनसीडी से दो किस्तों में 1,000 रुपये से ज्यादा की रकम जुटाई। तीन सालों की परिपक्वता अवधि वाले बॉन्ड पर रिलायंस इंडस्ट्रीज सालाना 10.10 फीसदी का भुगतान करेगी जबकि दस सालों की परिपक्वता वाले बॉन्ड पर 10.75 फीसदी का भुगतान करेगी।