जनवरी से मार्च तिमाही के दौरान देश में एफएमसीजी बाजार में एक साल पहले की समान अवधि के मुकाबले 6 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। नीलसन आईक्यू की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि वृद्धि को मुख्य तौर पर कीमत में दो अंकों की वृद्धि से बल मिला। हालांकि तिमाही के दौरान इस क्षेत्र की मात्रात्मक बिक्री में 4.1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। मात्रात्मक बिक्री में गिरावट की मुख्य वजह सभी क्षेत्रों और शहर श्रेणियों में कमजोर खपत रही।
नीलसन आईक्यू ने अपनी विज्ञप्ति में कहा है, ‘खपत में गिरावट के संकेत सभी क्षेत्रों और शहर वर्गों में मिले लेकिन ग्रामीण बाजार में इसकी झलक कहीं अधिक दिखी। ग्रामीण बाजारों की खपत में 5.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई जो पिछली तीन तिमाहियों की सर्वाधिक गिरावट है। दक्षिणी एवं उत्तरी क्षेत्रों में मात्रात्मक बिक्री में गिरावट 5 फीसदी से अधिक रही।’ रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि देश के ग्रामीण बाजारों में शहरी बाजारों के मुकाबले अधिक मूल्यवृद्धि की गई। तिमाही के दौरान ग्रामीण बाजार में मूल्यवृद्धि 11.9 फीसदी रही जबकि शहरी बाजारों में यह आंकड़ा 8.8 फीसदी रहा। मूल्यवृद्धि से खपत पर दबाव बढ़ गया। तिमाही के दौरान लगभग सभी श्रेणियों की मात्रात्मक बिक्री में गिरावट दर्ज की गई लेकिन फूड श्रेणी के मुकाबले गैर-फूड श्रेणी में गिरावट की रफ्तार कहीं अधिक रही। गैर-फूड श्रेणी की मात्रात्मक बिक्री -9.6 फीसदी रही जबकि फूड श्रेणी में यह आंकड़ा -1.8 फीसदी रहा।
फूड श्रेणी के तहत बिक्री को छोटे पैक का सहारा मिला। चॉकलेट, नमकीन स्नैक्स एवं कॉन्फेक्शनरी श्रेणी में ग्राहकों का जोर छोटे पैक पर होने से बिक्री को कुछ राहत मिली। रिफाइंड एवं गैर-रिफाइंड खाद्य तेल, वनस्पति तेल, पैकेटबंद आटा आदि श्रेणियों में करीब 15 फीसदी की मूल्यवृद्धि दर्ज की गई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इनपुट लागत में तेजी के दबाव के कारण तिमाही के दौरान छोटे विनिर्माताओं द्वारा कारोबार समेटने की रफ्तार 5.3 फीसदी बढ़ गई। छोटे विनिर्माता बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों के कंधों पर डालने में असमर्थ थे और इसलिए उन्हें अपना कारोबार समेटना पड़ा। नीलसन आईक्यू ने एक विज्ञप्ति में कहा, ‘पिछले साल की तरह वृहद आर्थिक परिदृश्य अब भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए खपत पैटर्न को निर्धारित कर रहा है और उनमें मूल्यवृद्धि का प्रभाव दिख रहा है।’ विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘यदि वैश्विक वृहद कारकों का प्रभाव बरकरार रहा तो भी सरकरा के प्रोत्साहन और सामान्य मॉनसून से राहत मिलेगी। ऐसे में खुदरा कारोबार के लिए सकारात्मक धारणा बरकरार है और पारंपरिक दुकानदार अपने स्टॉक को बरकरार रख रहे हैं।’