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Mustard Crop: रकबा बढ़ने के बीच अब मौसम ने दिया साथ, सरसों के रिकॉर्ड उत्पादन की आस

Mustard Crop: केडिया एडवाइजरी की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल सरसों का उत्पादन 10 फीसदी बढ़ने का अनुमान

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रामवीर सिंह गुर्जर   
Last Updated- January 28, 2026 | 4:03 PM IST

Mustard Crop: इस साल सरसों किसानों को राहत मिल सकती है। सरसों के रकबा में 3 फीसदी से ज्यादा वृद्धि दर्ज की गई है। अब तक मौसम भी सरसों किसानों का साथ दे रहा है। हालिया बारिश भी उनके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। मौजूदा हालात में इस साल सरसों के उत्पादन में 10 फीसदी तक इजाफा होने का अनुमान है और उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है।

इस साल कितना रहा सरसों का रकबा?

इस साल किसानों ने सरसों की खूब बोआई की है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 89.36 लाख हेक्टेयर में सरसों की बोआई हो चुकी है। पिछले साल यह आंकड़ा 86.57 लाख हेक्टेयर था। इस तरह इस साल सरसों के रकबा में 3.2 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरसों का सामान्य रकबा 79.17 लाख हेक्टेयर है। सामान्य रकबा से इस साल करीब 12.50 फीसदी ज्यादा सरसों बोई गई है।

केडिया एडवाइजरी की सरसों पर जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि पारंपरिक उत्पादक राज्यों में सरसों के रकबा के रुझान मिले-जुले रहे हैं। राजस्थान में सरसों का रकबा मामूली बढ़कर 35.35 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है। वहीं मध्य प्रदेश में 41 फीसदी की बड़ी बढ़त के साथ रकबा 11.79 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया। उत्तर प्रदेश में सरसों की खेती में उल्लेखनीय विस्तार दर्ज किया गया है। पिछले एक दशक में यहां रकबा लगभग तीन गुना बढ़कर 16.99 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है। हालांकि रिपोर्ट यह भी बताती है कि उत्तर-पूर्वी राज्यों और झारखंड में चुनौतियां बनी हुई हैं। अनियमित बारिश और बोआई में देरी के कारण इन क्षेत्रों में सरसों का रकबा घटा है। असम में रकबा घटकर 2.88 लाख हेक्टेयर, झारखंड में घटकर 3.52 लाख हेक्टेयर रह गया है।

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इस साल कितना हो सकता है सरसों का उत्पादन?

केडिया एडवाइजरी की इस रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2025–26 के दौरान सरसों का उत्पादन करीब 10 फीसदी बढ़ने की उम्मीद है। इसकी वजह बोआई में बढ़ोतरी और फसल की अनुकूल स्थिति मानी जा रही है। सरकार ने इस साल सरसों उत्पादन का लक्ष्य 139 लाख टन तय किया है, जबकि 2024–25 में उत्पादन 126.67 लाख टन रहा था।

विशेषज्ञों का कहना है कि फसल की स्थिति कुल मिलाकर बेहतर है और पाला न पड़ने से पैदावार की संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं। तिलहन उद्योग के अहम कारोबारी संगठन सेंट्रल ऑर्गेनाइजेशन फॉर ऑयल इंडस्ट्री एंड ट्रेड (COOIT) के चेयरमैन सुरेश नागपाल ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि इस साल सर्दी भी सरसों की फसल के लिए अच्छी पड़ी और अब इस समय हो रही बारिश इस फसल के लिए फायदेमंद हैं। पाला न पड़ने से सरसों को अब तक नुकसान भी नहीं हुआ है। अगर आगे भी मौसम अनुकूल रहा तो इस साल सरसों का रिकॉर्ड उत्पादन हो सकता है।

उद्योग के मुताबिक इस साल सरसों का उत्पादन 120 लाख टन तक पहुंच सकता है,जो अब तक का रिकॉर्ड होगा। इससे पहले 2023 में 115 लाख टन रिकॉर्ड उत्पादन हुआ था। पिछले साल यह गिरकर 111 लाख टन रह गया था।

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ओलावृष्टि बढ़ा सकती है किसानों की चिंता

अभी तक मौसम सरसों की फसल के लिए अनुकूल रहा है। केडिया एडवाइजरी की रिपोर्ट में कहा गया कि ओलावृष्टि से कुछ इलाकों में फसल को नुकसान हो सकता है। हालांकि, अधिकांश सरसों उत्पादक क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश और अनुकूल तापमान फसल के लिए सहायक बने हुए हैं। मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के किसान दिनेश सिंह ने कहा कि इस समय सरसों को पानी की जरूरत थी, बारिश का पानी ज्यादा फायदेमंद होता है। यह एक तरह से खाद का काम करता है। ऐसे में दो दिन से बारिश होना इस फसल की उत्पादकता को बढ़ाएगा। अब अगर आगे ओले ना पड़े तो इस साल सरसों की पैदावार अच्छी हो सकती है।

First Published : January 28, 2026 | 4:03 PM IST