पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा 25 जून को होने वाली अपनी बोर्ड बैठक में फ्रैंकलिन टेम्पलटन म्युचुअल फंड के निवेशकों को पैसा लौटाने और फंड हाउस के खिलाफ विशेष ऑडिट की स्थिति से संबंधित कानूनी मामलों पर चर्चा किए जाने की संभावना है।
इस मामले से जुड़े दो अधिकारियों ने बताया कि नियामक इस बैठक में बिकवाली दबाव महसूस कर रहे म्युचुअल फंडों की जानकारी और उनकी डेट योजनाओं की तरलता स्थिति के बारे में भी बोर्ड को अवगत करा सकता है। सेबी का आठ सदस्यीय बोर्ड कोरोनावायरस महामारी की वजह से पहली बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बैठक करेगा।
एक अधिकारी ने कहा, ‘प्रस्तावित बोर्ड बैठक से पहले, सेबी के वरिष्ठ अधिकारियों ने म्युचुअल फंड तरलता, बिकवाली दबाव, और इनमें गिरावट रोकने के उपायों आदि पर विस्तार से चर्चा की है।’ बोर्ड को फ्रैंकलिन एमएफ से संबंधित ताजा घटनाक्रम और अदालती मामले (जिसमें सेबी को प्रतिक्रिया देने को कहा गया है) से भी अवगत कराया जाएगा। फंड हाउस के खिलाफ निवेशकों द्वारा कई अदालती मामले दर्ज कराए गए हैं और 6 डेट योजनाओं को बंदए किए जाने की पूरी प्रक्रिया को चुनौती दी गई है।
एक संबंधित मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली के सात निवेशकों द्वारा दायर कराई गई याचिता खारिज कर दी है।
सेबी ने पिछले सप्ताह इस फंड हाउस के ऑडिटर चोकसी ऐंड चोकसी को मामले के कुछ खास पहलुओं की जांच का आदेश दिया था, जैसे निवेश का औचित्य, फ्रैंकलिन एमएफ की योजनाओं और बॉन्ड जारीकर्ताओं की ऑडिटिंग के वक्त जोखिम प्रबंधन उपाय। नियामक का कहना है कि फंड हाउस द्वारा किए गए कुछ खास निवेश म्युचुअल फंड की आदर्श आचार संहिता के विपरीत थे। ऑडिट रिपोर्ट जुलाई के मध्य तक सौंपे जाने की संभावना है। फ्रैंकलिन टेम्पलटन के निर्णय से निवेशकों के बीच आशंका पैदा हुई है जिससे खासकर क्रेडिट योजनाओं में बिकवाली दबाव बढ़ा है।
एक अन्य अधिकारी ने कहा कि इस तरह के घटनाक्रम के प्रबंधन के लिए आरबीआई द्वारा हस्तक्षेप किए जाने की जरूरत होगी। उन्होंने कहा, ‘सेबी बिकवाली दबाव से पैदा हुए जोखिम को कम करने के लिए सेफगार्ड पर विचार कर रहा है।’
इसके अलावा, बोर्ड कोविड-19 से संबंधित उपायों और कदमों और दबाव से ग्रसित क्षेत्रों पर इनके प्रभाव की भी चर्चा करेगा। वह वैश्विक सूचीबद्घता पर परामर्श पत्र की भी अनुमति दे सकता है।
दिसंबर 2018 में सेबी की समिति ने अपनी 26 पृष्ठ की रिपोर्ट सौंपी जिसमें एंटी-मनी लाउंडरिंग रूपरेखाओं की ताकत पर आधारित 10 वैश्विक अधिकार क्षेत्र सुझाए गए थे। इन देशों में अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, और हॉन्गकॉन्ग शामिल हैं। सूत्रों का कहना है कि नियामक खासकर निवेश और पड़ोसी देशों से सूचीबद्घता से संबंधित सुझावों में बदलाव ला सकता है।
सात सदस्यीय समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि सिर्फ अच्छी गुणवत्ता वाली कंपनियों को ही वैश्विक रूप से सूचीबद्घता की अनुमति दी जाएगी जिससे कि पर्याप्त तरलता सुनिश्चित की जा सके और हेरफेर की गुंजाइश घटाई जा सके।
मौजूदा कर नियमों के तहत, किसी विदेशी स्टॉक एक्सचेंज पर गैर-सूचीबद्घ भारतीय कंपनी के इक्विटी शेयरों के स्थानांतरण से अर्जित आय को भारत में पूंजीगत लाभ कर की श्रेणी में शामिल किया गया है।